आत्मदाह के ख़िलाफ़ अफ़ग़ानिस्तान में अभियान

अफ़ग़ानिस्तान सरकार आत्मदाह की समस्या से निपटने के लिए मंगलवार से देश भर में एक मीडिया अभियान शुरु कर रही है.
देश में आत्मदाह करने वाले लोगों में से ज़्यादातर महिलाएँ हैं.
स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल 22 हज़ार से ज़्यादा ऐसी महिलाओं का इलाज किया गया जिन्होंने आत्मदाह का प्रयास किया था.
इनमें से कुछ तो दुर्घटनाएँ थीं लेकिन ज़्यादातर आत्महत्या की कोशिश ही थी.
अधिकारियों का कहना है कि इनमें से बहुत सी महिलाओं ने इसलिए आत्मदाह करके अपनी जान लेने की कोशिश की क्योंकि वे घरेलू हिंसा या इसी तरह की किसी दुर्व्यवहार की शिकार थीं.
देशव्यापी समस्या
हाल तक आत्मदाह की घटनाएँ पश्चिमी अफ़ग़ानिस्तान के हेरात में हो रही थीं.
ये इलाक़ा ईरान से सटा हुआ है जहाँ ख़ुद को आग के हवाले कर देना एक आत्महत्या का सबसे प्रचलित तरीक़ा है.

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इन मामलों में युवा महिलाएँ या तो घरेलू ईंधन से जल गईं थीं या फिर खाना पकाने के तेल से.
बहुत सी महिलाएँ बुरी तरह से घायल हुईं या फिर उनकी मौत ही हो गई.
बीबीसी संवाददाता जिल मैकगिरिंग का कहना है कि यदि कोई महिला आत्महत्या की कोशिश करती है तो पूरा परिवार शर्मसार होता है, ख़ासतौर पर यदि इसकी वजह घरेलू हिंसा हो.
इसलिए ये जानना बहुत कठिन होता है कि ये हादसा था या फिर आत्महत्या की कोशिश.
लेकिन एक बात साफ़ है कि ये मामले अब बढ़ते जा रहे हैं और अब ये एक देशव्यापी समस्या बन गई है.
अभियान
सरकार अपने अभियान में महिलाओं के लिए रसोई घर में सुरक्षा का पाठ पढ़ाना चाहती है जिससे कि हादसों की संख्या को कम किया जा सके.
इस अभियान में जलने से मिलने वाले ज़ख़्मों और उससे मिलने वाले दर्द को भी बयान किया जाएगा.
सरकार के इस अभियान में घरेलू हिंसा के ख़िलाफ़ भी संदेश देने की योजना है क्योंकि ऐसा प्रतीत होता है कि इसी की वजह से आत्मदाह की घटनाएँ बढ़ रही हैं.












