अजय देवगन और किच्चा सुदीप की हिन्दी की बहस में कूदे नेता-अभिनेता

अजय देवगन और किच्चा सुदीप

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इमेज कैप्शन, अजय देवगन और किच्चा सुदीप

पहले अभिनेता नवाज़ुद्दीन सिद्दीक़ी, फिर दक्षिण भारतीय फ़िल्मों के अभिनेता किच्चा सुदीप और अब अजय देवगन. फ़िल्मों में हिंदी भाषा के इस्तेमाल पर शुरू हुई चर्चा अब तेज़ हो रही है.

कुछ दिन पहले नवाज़ुद्दीन सिद्दीकी ने एक इंटरव्यू में कहा था, '''अगर मैं तीन चीज़ें बदल सकता तो मैं सबसे पहले बॉलीवुड का नाम बदलकर हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री रखूंगा. दूसरा- हमारे पास जो स्क्रिप्ट आती है वो रोमन में आती है, उसको याद करना मुश्किल हो जाता है. मैं उसे देवनागरी में मांगता हूँ. तीसरा- आप हिंदी में फ़िल्म बना रहे हो लेकिन सब डायरेक्टर असिस्टेंट इंग्लिश में बात कर रहे हैं.''

नवाज़ की इस बात पर चर्चा चल ही रही थी कि साउथ फ़िल्मों के एक्टर किच्चा सुदीप का एक इंटरव्यू भी चर्चा में आ गया.

किच्चा सुदीप ने एक निजी चैनल 'कर्नाटक तक' को दिए इंटरव्यू में कहा, ''हिंदी अब कोई राष्ट्र भाषा नहीं है तो अब राष्ट्र भाषा कौन सी है? पैन इंडिया क्या है. क्योंकि हम साउथ से आते हैं तो हमें पैन इंडिया कह दिया जाता है. हिंदी को पैन इंडिया क्यों नहीं कहा जाता है? ये हमारी तमिल, तेलुगू, मलयालम फ़िल्में डब करते हैं. दक्षिण भारत की फ़िल्में वहाँ अच्छा कर रही हैं.''

किच्चा सुदीप के इंटरव्यू के इस हिस्से पर अजय देवगन ने ट्विटर पर प्रतिक्रिया दी है. इस प्रतिक्रिया पर किच्चा सुदीप ने भी जवाब दिया.

आगे पढ़िए दोनों एक्टर्स ने एक दूसरे से ट्विटर पर क्या कहा?

अजय देवगन ने कहा, ''किच्चा सुदीप मेरे भाई, आपके अनुसार अगर हिंदी हमारी राष्ट्र भाषा नहीं है तो आप अपनी मातृभाषा की फ़िल्मों को हिंदी में डब करके क्यों रिलीज़ करते हैं? हिंदी हमारी मातृभाषा और राष्ट्र भाषा थी, है और हमेशा रहेगी. जन गण मन.''

इस ट्वीट पर किच्चा ने जवाब दिया, ''हेलो अजय सर, मैंने जिस संदर्भ में अपनी बात कही थी, मेरा मानना है कि शायद वह बिल्कुल अलग रूप में आप तक पहुँची है. जब मैं आपसे व्यक्तिगत तौर पर मिलूंगा तो संभवत: मैं आपको यह बात समझा पाऊंगा कि वह बयान क्यों दिया गया था. इसका मक़सद दु:ख पहुँचाना, उकसाना या कोई बहस शुरू करना नहीं था. मैं ऐसा क्यों करूंगा सर?''

इसके बाद उन्होंने एक और ट्वीट में कहा, ''हमारे देश की हर भाषा से मुझे प्रेम है और मैं उसका आदर करता हूँ. मैं अब इस विषय को यहीं रोकना चाहूँगा क्योंकि मैंने बिल्कुल ही अलग संदर्भ में अपनी बात कही थी. बहुत सारा प्यार और शुभकामनाएं. जल्द ही आपसे मिलने की उम्मीद है. ''

अजय देवगन

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किच्चा और अजय: 'कन्नड़ में लिखता तो आप समझते?'

इसके बाद सुदीप ने एक और ट्वीट किया. उसमें उन्होंने कहा, '' और सर, आपने जो हिंदी में लिखा, मैं उसे समझ सकता हूँ. ऐसा इसलिए क्योंकि हम सभी हिंदी का सम्मान करते हैं, उससे प्रेम करते हैं और हमने इसे सीखा. कृपया बुरा न मानें...लेकिन मैं यह सोच रहा था कि अगर मैं अपनी प्रतिक्रिया कन्नड़ में लिखता तो इस पर क्या होता...!! क्या हमारा भी वास्ता भारत से नहीं है सर. ''

इस पर अजय देवगन ने कहा, ''किच्चा सुदीप, आप दोस्त हैं, शुक्रिया ग़लतफ़हमी दूर करने के लिए. मैंने हमेशा सिनेमा उद्योग को एक माना है. हम सभी भाषाओं का सम्मान करते हैं और हम सभी से उम्मीद करते हैं कि वे भी हमारी भाषा का सम्मान करें. ऐसा लगता है कि अनुवाद में कुछ बातें रह गईं.''

इस पर भी किच्चा सुदीप ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ''अनुवाद और उसका मतलब सिर्फ़ देखने का नज़रिया होता है. यही वजह है कि बिना पूरी बात जाने प्रतिक्रिया नहीं देने वाली बात मायने रखती है. मैं आपको दोष नहीं देता हूँ अजय देवगन सर. शायद मेरे लिए तब ख़ुशी का मौक़ा होता जब रचनात्मक वजह से आपकी तरफ़ से ट्वीट आता. प्यार और आदर''

हिंदी

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'हिंदी राष्ट्रभाषा' की सच्चाई और हिंदी पर विवाद का इतिहास

इस पूरी बहस में 'हिंदी राष्ट्रभाषा' है का मुद्दा भी रहा और आम बातचीत में अक्सर ऐसा कह दिया जाता है कि हिंदी राष्ट्र भाषा है. इस पर देश के जाने माने संविधान विशेषज्ञ सुभाष कश्यप का मानना रहा है कि देश की कोई एक राष्ट्रभाषा नहीं है बल्कि संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाएं राजभाषा हैं.

हिंदी का मुद्दा लंबे समय से चला आ रहा. आजादी से पहले भाषा के प्रश्न पर ज्यादा विवाद नहीं था लेकिन इसके बाद असहमतियां बढ़ती गईं और भाषाओं के आधार पर राज्यों का विभाजन तक हुआ. भारत की स्वतंत्रता में अहम भूमिका निभाने वाले सी राजगोपालाचारी पहले हिंदी के प्रचारक थे. लेकिन बाद में वे तमिलनाडु में हिंदी-विरोध की अगुवाई करने लगे.

सांकेतिक तस्वीर

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इस मुद्दे पर दूसरे कलाकार और नेताओं की प्रतिक्रियाएं

अगर बात मुंबई की करें तो वहां देश के अलग-अलग हिस्सों से कलाकार जाते हैं और काम करते हैं. कई गायक ऐसे हैं जो दूसरी भाषा के हैं और वे हिंदी के गाने गाते हैं. नवाजुद्दीन, किच्चा सुदीप और अजय देवगन मुद्दे पर लोग सोशल मीडिया पर इस बारे में भी लिख रहे हैं.

निर्देशक राम गोपाल वर्मा ने इस पर कहा, ''इस बारे में सबसे बड़ी ज़मीनी सच्चाई किच्चा सुदीप सर यह है कि उत्तर के स्टार असुरक्षित हैं और दक्षिण भारत के स्टार से जलते हैं क्योंकि कन्नड़ डब वाली फ़िल्म केजीएफ2 पहले दिन 50 करोड़ रुपये कमा लेती है और हम आने वाले दिनों में हिन्दी फ़िल्मों के पहले दिनों के आंकड़े देखने जा रहे हैं.''

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अभिनेत्री कस्तूरी शंकर ने लिखा, ''आदरणीय अजय देवगन जी, हॉलीवुड की कई फ़िल्में हिंदी में डब होती हैं. उम्मीद है कि आप यह नहीं समझते हैं कि हिंदी अमेरिका की मातृभाषा और राष्ट्र भाषा है. 60 करोड़ भारतीयों के लिए हिंदी हमारी मातृभाषा कभी नहीं थी और राष्ट्रभाषा बनेगी भी नहीं. मैं किच्चा सुदीप के साथ हूँ.''

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कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने इस मामले में किच्चा सुदीप का समर्थन करते हुए लिखा, ''अभिनेता किच्चा सुदीप का बयान सही है कि हिंदी राष्ट्र भाषा नहीं है. उनके बयान में कुछ भी ग़लत नहीं है. अभिनेता अजय देवगन न केवल उग्र हैं बल्कि उनका यह व्यवहार हास्यास्पद है.''

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कर्नाटक के एक और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कहा, ''हिंदी न तो कभी हमारी राष्ट्र भाषा थी और न कभी होगी. प्रत्येक भारतीय का यह कर्तव्य है कि वह देश की भाषाई विविधता का सम्मान करे. हर भाषा का अपना एक समृद्ध इतिहास होता है, जिस पर लोगों को गर्व होता है. मुझे कर्नाटक का होने पर गर्व है.''

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सोशल मीडिया पर इस बारे में क्या कह रहे हैं लोग

केतन नाम के एक यूजर ने लिखा, ''आप हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री नाम करवा लीजिये. लेकिन बम्बई में बन रही फ़िल्म में शामिल हर कोई, हर किसी से, हिंदी में बात करे, बहुत मुश्किल मामला रहेगा. मलयालम, कन्नड़, तमिल आदि बहुत ज़्यादा लोकल इंडस्ट्री है. हम तो फ़िल्में ही ग़ैर हिंदी भाषी जगह बनवा रहे हैं.''

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वहीं, @Sameer2464 हैंडल से लिखा गया, '' मैं अजय देवगन से सहमत हूँ. अगर आपको भाषा के तौर पर हिंदी पसंद नहीं है तो आपको अपनी फ़िल्में भी डब नहीं करनी चाहिए.''

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अमरनाथ शिवशंकर नाम के एक यूजर ने लिखा, ''आज अजय देवगन ने जो बोला वह हिंदी बोलने वाले भारत की दोषपूर्ण भाषा नीति के बारे में जो सोचते हैं, उसकी एक झलक मात्र है. कई दशकों से केंद्र सरकार हिंदी भाषी लोगों को विशेष महत्व देती रही है और यही कारण है. यहीं पर इस मुद्दे को ठीक किये जाने की ज़रूरत है.''

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