रोमिला थापर के पुराने वीडियो से सोशल मीडिया पर क्यों ट्रेंड हुए युधिष्ठिर और अशोक

आइंस्टाइन और न्यूटन के बाद अब सोशल मीडिया पर ट्रेंड हो रहे हैं युधिष्ठिर और अशोक. साथ-साथ ट्रेंड में हैं जानी-मानी इतिहासकार रोमिला थापर. वजह है उनका एक पुराना वीडियो, जो अचानक सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है.

अभी ये तो ठीक-ठीक नहीं पता चल सका है कि वीडियो किस मौके का है और कितना पुराना है लेकिन इसमें रोमिला थापर जो कहती नज़र आ रही हैं, वो कुछ ऐसा है:

महाभारत के शांतिपर्व में बताया गया है कि जब युधिष्ठिर से राजभार ग्रहण करने को कहा गया तो उन्होंने कहा कि वो राजा नहीं बल्कि संन्यासी बनना चाहते हैं. इसके बाद उन्हें धीरे-धीरे राजा बनने के लिए मनाया जाता है. इस दौरान राजा के जीवन और संन्यासी के जीवन के बारे में विस्तृत चर्चा होती है. बौद्ध धर्म का मूल भी इसी में है. यानी सत्ता बनाम संन्यास में. आज कुछ इतिहासकार मानते हैं कि जब युधिष्ठिर ने सत्ता संभालने से इनकार किया तब हो सकता है कि उनके मन में सम्राट अशोक की छवि रही हो.

ट्विटर समेत बाकी सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म्स पर रोमिला थापर का तकरीबन एक मिनट का ये वीडियो छाया हुआ है और इस पर तीखी बहस हो रही है.

हालांकि यह क्लिप सिर्फ़ एक मिनट की है और अभी ये मालूम नहीं चल पाया है कि इससे पहले या बाद में उन्होंने क्या कहा.

अब कुछ लोगों का कहना है कि जब महाभारत काल अशोक के समय से बहुत पहले का था. ऐसे में युधिष्ठिर अशोक से प्रेरणा कैसे ले सकते हैं?

सोशल मीडिया पर एक तबका रोमिला थापर पर इतिहास और जानकारियों को तोड़ने-मरोड़ने का आरोप मढ़ रहा है.

फ़ेसबुक और ट्विटर पर कुछ मीम्स भी शेयर हो रहे हैं जिनमें अशोक को महाभारत के युद्ध में दिखाया जा रहा है.

दिनकर शर्मा ने ट्वीट किया, "शायद संन्यास लेते वक़्त युधिष्ठिर के मन में सोनिया गांधी की छवि रही होगी, जिन्होंने मनमोहन सिंह के लिए कुर्सी छोड़ दी."

हालांकि एक वर्ग रोमिला थापर के समर्थन में भी है.

कुनाल वैद्य ने ट्वीट किया, "महाभारत एक ऐसी किताब है जो अशोक के शासनकाल के बाद लिखी गई. इसे लिखने वाले ने युधिष्ठिर के किरदार की कल्पना की थी."

धर्म, संस्कृति और मिथकों के जानकार देवदत्त पटनायक ने ट्वीट किया है, "वो बस महाकाव्य के एक किरदार की तुलना एक ऐतिहासिक व्यक्तित्व से कर रही हैं. शांत रहिए."

इससे कुछ दिनों पहले रोमिला थापर तब चर्चा में आई थीं जब जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय ने उनसे उनकी सीवी मांगी थी.

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