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इमरान ख़ान ने फिर उठाई उंगली, मोहम्मद कैफ बोले- लेक्चर न दें
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान ख़ान ने एक बार फिर अल्पसंख्यकों के साथ बर्ताव के मुद्दे को लेकर भारत पर निशाना साधा है.
इमरान ख़ान ने मंगलवार को पाकिस्तान के संस्थापक क़ायदे आज़म मोहम्मद अली जिन्ना की जयंती पर ट्विटर पर फिर भारत के बारे में तीखी टिप्पणी की.
इमरान ने ट्विटर पर लिखा, ''जिन्ना ने एक ऐसे पाकिस्तान की कल्पना की थी जो लोकतांत्रिक, न्यायपूर्ण और दयाभाव वाला राष्ट्र बने. सबसे अहम ये है कि वो हमारे अल्पसंख्यकों को बराबरी का दर्जा देना चाहते थे. याद रखना चाहिए कि अपने शुरुआती राजनीतिक जीवन में वो हिंदू-मुस्लिम एकता के दूत थे.''
अपने दूसरे ट्वीट में वे लिखते हैं, ''मुसलमानों के लिए अलग राष्ट्र का उनका संघर्ष तब शुरू हुआ जब वो समझ गए कि बहुसंख्यक हिंदू मुसलमानों को समान नागरिक नहीं मानेंगे.''
इमरान ने लिखा, ''नया पाकिस्तान उनकी ही सोच वाला पाकिस्तान है जिसमें हम ये सुनिश्चित करेंगे कि हमारे यहां अल्पसंख्यकों के साथ एक जैसा व्यवहार किया जाए, ऐसा नहीं जैसा कि भारत में हो रहा है.''
इमरान का बयान और मोहम्मद कैफ के तेवर
मंगलवार को पूर्व भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद कैफ़ ने भी इमरान ख़ान को निशाने पर लिया.
कैफ ने ट्विटर पर लिखा, ''भारत में अल्पसंख्यकों की आबादी घटने की बजाय बढ़ रही है इसलिए अल्पसंख्यकों की जनसंख्या पर वो लेक्चर न दें.
वे लिखते हैं, ''पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की आबादी दो प्रतिशत से भी कम रह गई है. दूसरी ओर आज़ादी के बाद भारत में अल्पसंख्यकों की आबादी बढ़ रही है. पाकिस्तान अल्पसंख्यकों के साथ बर्ताव पर लेक्चर देने वाला सबसे आखिरी देश होना चाहिए.''
इमरान ख़ान ने कुछ दिनों पहले भी भारत में अल्पसंख्यकों को लेकर ट्वीट किए थे, जिनकी काफ़ी चर्चा हुई थी.
उन्होंने भारतीय अभिनेता नसीरुद्दीन शाह के एक पोस्ट के बाद भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि वह मोदी सरकार को दिखाएंगे कि अल्पसंख्यकों के साथ कैसे व्यवहार करते हैं.
नसीरुद्दीन शाह ने उनके बयान पर सख़्त एतराज़ जताते हुए उन्हें अपने देश की फ़िक्र करने की हिदायत दी थी.
इससे पहले इमरान खान के बयान पर एआईएमआईएम सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने भी ट्विटर पर लिखा था, ''पाकिस्तानी संविधान के अनुसार, केवल एक मुस्लिम राष्ट्रपति बनने के लिए योग्य है. भारत में वंचित समुदायों के कई राष्ट्रपति रहे हैं. खान साहब को हमसे समावेशी राजनीति और अल्पसंख्यक अधिकारों के बारे में कुछ सीखना चाहिए.''
नसीरुद्दीन ने क्या कहा था?
दरअसल नसीरुद्दीन शाह ने इसी हफ़्ते देश में उन्मादी भीड़ के हाथों मारे जा रहे निर्दोष लोगों पर चिंता ज़ाहिर की थी.
नसीर ने कहा था, ''ऐसा माहौल देख उन्हें चिंता होती है कि कहीं मेरी औलाद से कोई यह न पूछ दे कि वो हिन्दू है या मुसलमान.''
उन्होंने कहा था, ''मेरे बच्चे ख़ुद को क्या बताएंगे क्योंकि उन्हें तो धर्म की तालीम ही नहीं दी. मुझे इस माहौल से डर नहीं लगता बल्कि ग़ुस्सा आता है.''
नसीरुद्दीन के इस बयान पर देखते-देखते हंगामा खड़ा हो गया. उनके समर्थन और विरोध में बयान आने लगे.
इसी विवाद में इमरान ख़ान ने भी ट्वीट कर दिया जिसके बाद इस मामले ने एक नया मोड़ ले लिया.
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