सोशल: इस बजट में पकौड़े वालों को क्या मिला?

पकौड़ा, बजट, बजट 2018, सोशल मीडिया

इमेज स्रोत, My City Links/Facebook

"अगर कोई आदमी आपके टीवी स्टूडियो के सामने पकौड़े बेचता है और शाम को 200 रुपये कमाकर जाता है, तो आप इसे रोजगार मानेंगे कि नहीं मानेंगे?"

हाल ही में एक टीवी इंटरव्यू के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रोजगार और अर्थव्यवस्था के बारे में पूछे जाने पर यही जवाब दिया था.

इसके बाद सोशल मीडिया पर खूब हो-हल्ला और हंसी मज़ाक हुआ.

बजट, सोशल मीडिया

इमेज स्रोत, Twitter

गुरुवार को पेश हुए बजट के बाद सोशल मीडिया में एक बार फिर पकौड़ों पर गर्मागर्म चर्चा हो रही है.

ट्विटर पर #पकौड़ा_बजट ट्रेंड कर रहा है.

चटखारे लगाकर थोक के भाव में चुटकुले और मीम्स शेयर किए जा रहे हैं.

मुबश्शिर आलम ने पूछा है, "क्या इस बजट में भी पकौड़ा उद्योग के लिए अनुदान राशि नहीं दी गई? आखिर रोजगार के लिए सरकार कब गंभीर होगी?"

बजट, सोशल मीडिया

इमेज स्रोत, Twitter

लोकेश ने एक मजेदार तस्वीर पोस्ट की और लिखा, "70 लाख रोजगार इस साल. #पकोड़ा_बजट."

बजट, सोशल मीडिया

इमेज स्रोत, Twitter

सूरज कुमार गुप्ता ने बजट के बाद अपना दर्द इस मीम के जरिए बयां किया.

ट्विटर

इमेज स्रोत, Twitter

एक सोशल मीडिया यूज़र ने फ़िल्म 'वेलकम' के एक सीन का सहारा लिया और मिडिल क्लास की निराशा समझाने की कोशिश की.

बजट, सोशल मीडिया

इमेज स्रोत, Twitter

@Diggi840 नाम के ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया, "कॉर्पोरेट टैक्स रेट 25% घटा दिया गया. सांसदों की सैलरी दोगुनी हो गई. अब मिडिल क्लास पकौड़े तले."

बजट, सोशल मीडिया

इमेज स्रोत, Twitter

ख़ैर, ये तो रही हंसी-मज़ाक की हल्की-फुल्की बातें. लेकिन असल में पकौड़े बेचने वालों के लिए बजट में कुछ है क्या? अगर हां, तो क्या?

इस बारे में बीबीसी ने पर्सनल फ़ाइनेंस की जानकारी रखने वाले जाने-माने सीए डीके मिश्रा से बात की.

वो कहते हैं, "पकौड़े वालों की बात करें तो वे असंगठित क्षेत्र के कारगर माने जाएंगे और असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों के लिए बजट में अलग से कोई ऐलान नहीं किया गया है."

बजट, सोशल मीडिया

इमेज स्रोत, Facebook

तो क्या पकौड़े वालों के बजट में कुछ है ही नहीं?

इस सवाल पर डीके मिश्रा ने कहा, "नहीं, ऐसा भी नहीं. आम तौर पर असंगठित क्षेत्र में करने वाले लोग गरीब तबके में आते हैं. इसलिए गरीबों के लिए जिन योजनाओं या सुविधाओं का एलान हुआ, उसका फ़ायदा इन्हें भी मिलेगा. मसलन, 10 करोड़ लोगों के लिए पांच लाख रुपये के स्वास्थ्य बीमा की सुविधा."

उन्होंने कहा कि ग़रीब परिवारों को मुफ़्त गैस कनेक्शन, शौचालय और घर के लिए किए गए ऐलानों का फ़ायदा भी इन्हें मिलेगा.

इसके अलावा बटज में प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का फ़ंड बढाने की घोषणा की गई, इसका फ़ायदा भी असंगठित क्षेत्र में काम करने वालों को मिलना चाहिए.

छोड़िए X पोस्ट
X सामग्री की इजाज़त?

इस लेख में X से मिली सामग्री शामिल है. कुछ भी लोड होने से पहले हम आपकी इजाज़त मांगते हैं क्योंकि उनमें कुकीज़ और दूसरी तकनीकों का इस्तेमाल किया गया हो सकता है. आप स्वीकार करने से पहले X cookie policy और को पढ़ना चाहेंगे. इस सामग्री को देखने के लिए 'अनुमति देंऔर जारी रखें' को चुनें.

चेतावनी: तीसरे पक्ष की सामग्री में विज्ञापन हो सकते हैं.

पोस्ट X समाप्त

लेकिन फिर रोजगार का क्या?

इसके जवाब में डीके मिश्रा कहते हैं, "रोज़गार तभी बढ़ेगा जब मैन्युफ़ैक्चरिंग सेक्टर में निवेश बढ़ेगा और आर्थिक वृद्धि दर बढ़ेगी. पिछले दो-तीन साल में कुछ ख़ास विदेशी निवेश नहीं हुआ है और अर्थव्यवस्था की धीमी रफ़्तार के पीछे भी ये एक बड़ी वजह है."

वो कहते हैं कि दो करोड़ नौकरियों का वादा बस एक राजनीतिक बयान बनकर रह गया. 'मेक इन इंडिया' बुरी तरह फ़्लॉप रहा और चीजें पुराने ढर्रे पर चलती रहीं. जब तक ये हालात नहीं बदलेंगे, रोजगार की उम्मीद करना बेमानी होगी.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)