सोशल: किसकी दहशत में जी रहे हैं भारतीय मुसलमान?

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बीते कुछ समय में भारत में कई ऐसी वारदातें हुई हैं जिसमें भीड़ ने क़ानून अपने हाथों में ले लिया और इसका अंजाम किसी की मौत बनकर सामने आया.

चाहें वो दादरी के अख़लाक हों या फिर मेवात के पहलू खान.

सबसे ताज़ा घटना दिल्ली से सटे बल्लभगढ़ की है, जहां 16 साल के एक मुसलमान युवक जुनैद हाफिज़ को ट्रेन में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला.

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इस पर लोगों ने हमें अपनी राय दी. इस विषय पर हमें हज़ारों लोगों के कमेंट मिले. जवाब में पाठकों ने मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है.

'भरोसा दिलाने की आवश्यकता'

उमाशंकर जटवार ने लिखा है कि इस वक़्त मुस्लिम समुदाय को हमारे 'ईद मुबारक' लिखे-बोले से कहीं ज्यादा भरोसा पैदा करने की जरुरत है. उन्हें यक़ीन दिलाने की ज़रूरत है कि वो हमारे दुश्मन नहीं है. हम उनसे नफ़रत नहीं करते. उन्हें इस बात का यक़ीन दिलाया जाना ज़रूरी है कि वो भी इस देश में उतने ही नागरिक हैं जितने हम हिंदू हैं. उनके भी उतने ही अधिकार हैं जितने हमारे हैं. बराबरी का अहसास दिलाना ज़रूरी है.

गुरूदेव नानावारे ने लिखा है कि मोदी राज में भारत का मुसलमान ही नहीं, बल्कि दलित और आदिवासी भी ख़ौफ़ में जी रहे हैं.

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सरकार की ज़िम्मेदारी

विजय जाट ने लिखा है कि जो लोग भारत में रहते हैं और यहां की सोचते हैं, वो खुल कर जीते हैं. लेकिन जिसका जिस्म भारत का है और दिल पाकिस्तान का, वो ख़ौफ़ में जी रहे हैं और वो लोग आगे भी ख़ौफ़ में ही जिएंगे.

ज़ाकिर हुसैन ने लिखा है कि भारत में ख़ौफ़ में तो पूरा समाज है. लेकिन मुसलमानों में ज़्यादा ख़ौफ़ है. यह सच है. ज़्यादातर घटनाएं मुसलमानों के साथ हो रही हैं. सरकार को इसकी ज़िम्मेदारी लेते हुए इसका ध्यान रखना चाहिए.

ग़ुलाम मोइनुद्दीन ने लिखा है कि मुसलमानों को कभी इंसान का ख़ौफ़ होता ही नहीं. मुसलमान सिर्फ़ अल्लाह का ख़ौफ़ रखते हैं. राजनीति करने वाले लोग देश को तबाह कर रहे हैं और लोग धर्म देखकर इंसानियत को बर्बाद कर रहे हैं.

ज़ुबैर खान ने लिखा है कि भारत में जितने मुसलमान हैं, वो सभी पाकिस्तानी हैं. यह बात एक दिन हिंदुस्तान को बर्बाद कर देगी.

शकील अहमद ने लिखा है कि भारत का इंसान किसी इंसान से नहीं डरता.

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