'महाराष्ट्र में बीजेपी यमराज, मध्य प्रदेश में जनरल डायर'

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मध्यप्रदेश के मंदसौर में पुलिस फ़ायरिंग में कम से कम 5 किसानों समेत 6 लोगों की मौत हो गई है और इसके बाद सोशल मीडिया पर विपक्षी नेताओं और आम लोगों का आक्रोश दिख रहा है.
सरकार ने मंदसौर, रतलाम और उज्जैन में इंटरनेट सेवा बंद कर दी है. लेकिन आंदोलनकारियों के सोशल मीडिया के ज़रिये लामबंद होने की ख़बरें भी आ रही हैं.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मामले को संभालने की कोशिश करते हुए किसानों की सभी 'वाजिब' मांगे मानने का ऐलान किया है. उन्होंने मृतकों के परिजनों को पहले 10 लाख रुपये के मुआवज़े का ऐलान किया था, बाद में इसे बढ़ाकर एक करोड़ रुपये कर दिया गया है.

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लेकिन विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने इस पूरे मामले में आक्रामक रुख़ अपनाते हुए बीजेपी सरकार पर तीखे हमले किए हैं.
कांग्रेस के शहज़ाद पूनावाला ने लिखा, 'महाराष्ट्र में बीजेपी किसानों के लिए यमराज बन गई है, क्योंकि वहां वे ख़ुदकुशी कर रहे हैं और मध्य प्रदेश में प्रदर्शनकारी किसानों को जनरल डायर की तरह मार रही है.'

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आम आदमी पार्टी के नेता और कवि कुमार विश्वास ने कविता की दो पंक्तियों के ज़रिये बीजेपी सरकार को 'हत्यारा' कहा. उन्होंने लिखा, 'जो धरापुत्र का वध कर दे,वह राजपुरुष नाकारा है, जिस पर किसान का रक्त गिरे उस का शासक हत्यारा है.'

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स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव ने लिखा, 'मंदसौर में परेशान किसानों पर फायरिंग मध्य प्रदेश सरकार का किसानों के लिए निष्ठुर रवैया दिखाती है. किसान आज देश में सबसे ज़्यादा हाशिये पर हैं.'
रिट्वीट करते हुए वरिष्ठ वकील और स्वराज अभियान के नेता प्रशांत भूषण ने इस सरकार को 'अब तक की सबसे अलोकतांत्रिक और ग़रीब विरोधी सरकार' बताया.

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मध्यप्रदेश के गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने इस मामले पर कहा है कि फ़ायरिंग पुलिस की ओर से नही की गई है. इस पर पुरुषोत्तम तिबरेवाल लिखते हैं, 'अगर पुलिस की मंदसौर घटना में कोई भूमिका नहीं थी तो सरकार 10 लाख का मुआवज़ा क्यों दे रही है? पीड़ितों को शांत करने के लिए?'

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समर अनार्य लिखते हैं, 'साल 2014 के बाद से जिन प्रदेश सरकारों ने आम लोगों पर गोलियां चलाने के आदेश दिए हैं, वे हैं: गुजरात, हरियाणा, झारखंड, जम्मू-कश्मीर और मध्य प्रदेश. ये सभी बीजेपी शासित प्रदेश हैं. #सबकासाथसबकोगोली?'

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किन मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं किसान?
किसान 20 सूत्रीय मांगों को लेकर एक जून से हड़ताल कर रहे हैं. उनकी मांग है कि
- स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए.
- किसानों का कर्ज माफ़ किया जाए.
- किसानों को उचित समर्थन मूल्य दिया जाए.
- मंडी का रेट निर्धारण हो.
- किसानों को पेंशन दी जाए.
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