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सोशल: 'नाकामियों को छिपाने के लिए सेना का सहारा ले रही है मोदी सरकार'
गुरुवार को बीबीसी हिन्दी ने अपने फ़ेसबुक पेज पर एक सवाल पूछा था कि क्या भारत सरकार सेना का राजनीतीकरण कर रही है? इस सवाल पर सैकड़ों पाठकों ने अपनी राय रखी.
कई लोगों ने इस सवाल पर कहा कि भारत सरकार सेना का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है तो कई लोगों ने इसे ख़ारिज कर दिया. लोगों ने इस मामले में खुलकर अपना पक्ष रखा है. हम उन पाठकों का पक्ष आपके समक्ष रख रहे हैं.
रामकुमार मीणा ने कहा, ''मोदी सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए सेना का सहारा ले रही है. मोदी सरकार का ग्राफ अब कांग्रेस से भी नीचे है. आम जनता परेशान है और यह सरकार हर जगह फेल हो चुकी है.''
सचिन प्रताप सिंह ने कहा, ''सरकार आर्मी को मेनस्ट्रीम में लाने की कोशिश कर रही है जोकि बहुत ज़रूरी है. बहुत सालों से कांग्रेस ने आर्मी की जो दुर्गति कर रखी थी उसे बदलने का वक़्त है.''
मोहम्मद रफ़ीक ने कहा, ''बिल्कुल सही है, मोदी सरकार सेना का राजनीतीकरण कर रही है. हर बात में सेना को लाना सही नहीं है. मोदी सरकार देश में एक अघोषित गृह युद्ध छेड़ने की तैयारी में है.''
परेश त्रिवेदी ने कहा,''मोदी सरकार सेना का राजनीतीकरण नहीं कर रही है बल्कि सेना को अधिकार दे रही है. पिछली सरकारों ने तो सेना को कठपुतली बना रखा था.''
वसीम रज़ा का कहना है,''वसीम रज़ा केवल राजनीतीकरण ही नहीं बल्कि भगवाकरण करने की भी कोशिश हो रही है, लेकिन भारत में ये ज़रा मुश्किल है.''
कालिदास नाम के फ़ेसबुक यूजर ने कहा, ''मेजर गोगोई को बहुत जल्द भारत रत्न देना चाहिए.'' रवि अग्रवाल पूछते हैं,''क्या सेना की कार्रवाई पर सवाल उठाने वालों को जवाब देना ज़रूरी नहीं है? क्या कुछ लोग राजनीतिक कारणों से अपने ही देश की सेना पर सवाल नहीं उठा रहे?''
योगेश कुमार कहते हैं कि सेना भी इतनी बेवकूफ़ है कि इन के जाल में फंस गई है और अपनी फ़जीहत ख़ुद करा रही है.
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