'हिंदू नाम' हटाने की सलाह पर भड़के सुशांत

सुशांत

इमेज स्रोत, TWITTER

इमेज कैप्शन, सुशांत सिंह राजपूत

फ़िल्मकार संजय लीला भंसाली पर राजपूत करणी सेना के हमले के विरोध में अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने अपना सरनेम ट्विटर से हटा दिया है.

31 साल के इस अभिनेता के ट्विटर अकाउंट पर केवल सुशांत नाम दिख रहा है.

हालांकि सरनेम हटाने के बावजूद एक ट्विटर यूज़र के सवाल पर भड़कते हुए सुशांत ने ख़ुद को 10 गुना ज़्यादा राजपूत बताया. एक ट्विटर यूज़र ने सुशांत से पूछा कि आप अपना नाम क्यों नहीं बदल लेते तो सुशांत उस पर बुरी तरह से भड़क गए.

नीतीश नाम के इस ट्विटर यूज़र ने सुशांत से पूछा, ''यदि आप किसी धर्म का पालन नहीं करते तो हिन्दू नाम क्यों रखा है? सरनेम के साथ इसे भी हटा लीजिए.''

इसके जवाब में सुशांत ने कहा, ''मूर्ख मैंने अपना सरनेम बदला नहीं है. तुम यदि बहादुरी दिखाओगे तो मैं तुमसे 10 गुना ज़्यादा राजपूत हूं. मैं कायरतापूर्ण हरकत के ख़िलाफ़ हूं.''

सुशांत

इमेज स्रोत, TWITTER

सुशांत ने ट्विटर पर लिखा, ''जब तक हम अपने सरनेम से मोहग्रस्त रहेंगे तब तक हमें भुगतना होगा. यदि आपके पास साहस है तो आप पहले नाम से ख़ुद को सामने रखें.''

हाल ही में 'एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी' में धोनी का किरदार निभाने वाले सुशांत ने अगले ट्वीट में कहा, ''मानवता से ऊपर कोई जाति और मजहब नहीं है.''

इसी हफ़्ते शुक्रवार को जयपुर में भंसाली पर पद्मावती फ़िल्म की शूटिंग के दौरान हमला हुआ था. राजपूत करणी सेना के सदस्यों ने आरोप लगाया कि वह इतिहास को विकृत करके पेश कर रहे हैं. कैमरे और अन्य उपकरणों को तोड़ने से पहले प्रदर्शनकारियों ने भंसाली के साथ मारपीट की और उनके कपड़े फाड़ दिए थे.

सुशांत

इमेज स्रोत, TWITTER

इस फ़िल्म में दीपिका पादुकोण पद्मावती की भूमिका में हैं और रणबीर सिंह अलाउद्दीन ख़िलजी का किरदार अदा कर रहे हैं. शाहिद कपूर को इसमें पद्मावती के पति राजा रतन सिंह की भूमिका दी गई है.

सुशांत के ट्वीट पर कई लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. विशाल प्रताप नाम के एक ट्विटर यूज़र ने लिखा, ''सरनेम हमारे पिता और पूर्वजों के आदर में लगाया जाता है. कुछ मूर्खों की बेवकूफ़ाना हरकत का मतलब यह नहीं होता कि हम इसे छोड़ दें.''

सुशांत

इमेज स्रोत, TWITTER

इमेज कैप्शन, सुशांत सिंह राजपूत

सुशांत ने इसके जवाब में कहा, ''मैं अपने पिता का आदर करता हूं और वह इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं, लेकिन इससे मुझे किसी के अनादर करने की अनुमति नहीं मिल जाती. हिंसा कोई बहादुरी नहीं है. आप एक अकटलबाजी पर डर के कारण पलटवार कर रहे हैं. अपनी बात कहने की गुंजाइश हमेशा होती है, लेकिन एक सभ्य तरीका होना चाहिए.''

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)