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'तेज़ गति से बढ़ रहा है जलस्तर' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
शोधकर्ताओं के मुताबिक विश्व में समुद्रों का जल स्तर अनुमान से कहीं ज़्यादा गति से बढ़ रहा है. कोपनहेगन में जलवायु परिवर्तन पर हुए सम्मेलन में वैज्ञानिकों ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र ने इसे कम करके आंका था और 2100 तक जल स्तर एक मीटर या उससे ज़्यादा तक बढ़ सकता है. वैज्ञानिकों का कहना है कि इसमें बर्फ़ पिघलने से जल स्तर पर पड़ने वाले असर को शामिल नहीं किया गया है. उनके मुताबिक लाखों लोगों पर इसका बुरा असर पड़ेगा. विश्व जनसंख्या का 10 प्रतिशत हिस्सा निचले स्थलों पर रहता है यानी वहाँ पानी आसानी से भर सकता है. संयुक्त राष्ट्र की समिति आईपीसीसी ने 2007 में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि समुद्रों के जल स्तर में 59 सेंटीमीटर तक की बढ़ोत्तरी हो सकती है. यूनिवर्सिटी ऑफ़ कोलोराडो के प्रोफ़ेसर कोनार्ड स्टेफ़न ने ग्रीनलैंड में कम होती बर्फ़ की ओर ध्यान दिलाते कहा कि पिछले एक दशक में इसमें कमी आई है. उन्होंने कहा कि जलस्तर में एक मीटर की वृद्धि हो सकती है जो संयुक्त राष्ट्र के अनुमान से करीब तीन गुना तक ज़्यादा होगी. वैज्ञानिकों के दल ने जो अनुमान लगाया है वो तटीय इलाक़े में रहने वाले लोगों के लिए चिंताजनक बात है. ब्रिटेन में पूर्व के तटीय इलाक़े की देखरेख का काम संभालने वाली एजेंसी के अधिकारी डेविड कैंप कहते हैं कि समुद्र जल स्तर में थोड़ा सा भी बदलाव चिंता की बात है. | इससे जुड़ी ख़बरें 'जलवायु परिवर्तन और मलेरिया में संबंध'16 फ़रवरी, 2009 | विज्ञान 'ग्लोबल वार्मिंग को कम करके आंका गया'15 फ़रवरी, 2009 | विज्ञान बढ़ती गर्मी से पेंग्विनों को ख़तरा27 जनवरी, 2009 | विज्ञान जलवायु पर बादलों के असर का अध्ययन23 अक्तूबर, 2008 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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