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जलवायु परिवर्तन: अमरीका की नई शर्त | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जलवायु परिवर्तन पर बाली सम्मेलन में सहमति जताने के बावजूद अमरीका ने फिर नई शर्तें रखी हैं. वहीं ब्रिटेन और जर्मनी ने प्रगति पर संतोष जताया है. पर्यावरणविदों ने अमरीका पर बाली में मिली सफलता पर पलीता लगाने का आरोप लगाया है. अमरीकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश का कहना है कि कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के लिए विकासशाली देशों को उत्साहित नहीं किया जा रहा है जो चिंता की बात है. उनके कार्यालय व्हाइट हाउस ने एक बयान जारी कर कहा है कि विकासशील देशों को भी उत्सर्जन में कटौती की प्रक्रिया में भागीदार बनाना होगा लेकिन बाली सम्मेलन में जिस 'रोडमैप' पर सहमति बनी है उसमें इसका कोई ज़िक्र नहीं है. व्हाइट हाउस का कहना है कि सिर्फ़ विकसित देशों के प्रयास से जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से नहीं निपटा जा सकता. दूसरी ओर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री गोर्डन ब्राउन और जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल ने कहा है कि बाली में बनी सहमति से आगे का रास्ता तैयार हुआ है. सहमति बाली में जलवायु परिवर्तन पर सभी पक्षों में एक 'रोडमैप' पर सहमति बनी है जिसके आधार पर ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लए नया समझौता तैयार होगा. 'रोडमैप' के दस्तावेज़ के मुताबिक अगले दो वर्षों में बातचीत के आधार एक नया समझौता तैयार होगा जो 1997 के क्योटो प्रोटोकॉल की जगह लेगा.
क्योटो समझौते की सीमा वर्ष 2012 में ख़त्म हो रही है और इसे अमरीका का समर्थन प्राप्त नहीं है. इंडोनेशियाई द्वीप बाली में संयुक्त राष्ट्र की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के आख़िर में कई बार ऐसा लगा कि समझौते के प्रारूप पर सहमति नहीं बन पाएगी. अमरीका ने यह कहते हुए जलवायु परिवर्तन पर तैयार समझौते के प्रारूप को ख़ारिज कर दिया कि इसमें विकासशील देशों के लिए कोई अनिवार्यता नहीं है लेकिन बाद में अमरीका ने 'रोडमैप' स्वीकार कर लिया. सम्मेलन में ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के दस्तावेज़ पर आरंभिक सहमति तो बन गई लेकिन लक्ष्य तय नहीं हो सके जिसके लिए यूरोपीय संघ ज़ोर लगा रहा था. समझौते के प्रारुप पत्र से यह भी स्पष्ट नहीं है कि कार्बन डाईऑक्साइड के उत्सर्जन में कमी लाने में विकासशील देशों की कितनी भागीदारी होगी. अमरीका ने चेतावनी दी थी कि अगर प्रदूषण फैलाने वाली ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी लाने के लिए कोई बाध्यकारी लक्ष्य निर्धारित किया गया तो वह इसे स्वीकार नहीं करेगा. दूसरी ओर यूरोपीय संघ जलवायु परिवर्तन से उपजी चुनौतियों से निपटने के लिए इसे ज़रूरी बता रहा था. इस मतभेद को दूर करने के लिए कोई बीच का रास्ता निकाला गया. |
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