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तकरार से हो सकता है दिल बीमार | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
शोध से पता चला है कि वैवाहिक जीवन में तकरार और नोकझोंक से तनाव और चिंता तो बढ़ती ही है, दिल की बीमारी का ख़तरा भी बढ़ जाता है. इसके पहले के अध्ययन में यह सामने आया था कि एकाकी जीवन जीने वालों की तुलना में वैवाहिक जीवन का आनंद उठाने वालों की सेहत कहीं अधिक अच्छी होती है. ताज़ा अध्ययन में ब्रिटेन के लगभग 9000 सरकारी कर्मचारियों को शामिल किया गया. अध्ययन में यह तथ्य उभरकर सामने आया कि वैवाहिक जीवन के लिए अपने जोड़ीदार का चुनाव ठीक से न करना आपके दिल के लिए ख़तरनाक हो सकता है. इससे बेहतर एकाकी जीवन जीना है. अध्ययन में शामिल अधिकतर लोग विवाहित थे. यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन में 12 साल तक इन लोगों पर लगातार अध्ययन किया गया और पाया गया कि जिन लोगों का वैवाहिक जीवन सबसे अधिक संकट में था, उन्हें हृदय संबंधी परेशानी रोगों की आशंका सुखी दांपत्य वाले जोड़ों की तुलना में 34 फ़ीसदी अधिक थी. शोध शुरु करने से पहले ऐसे लोगों की संख्या 8499 थी जिन्हें दिल संबंधी बीमारी नहीं थी, लेकिन 12 वर्षों के वैवाहिक जीवन के दौरान इनमें से 589 दिल के रोगी हो गए. अध्ययन में पाया गया कि ऐसे लोगों को दिल की बीमारी होने की आशंका ज़्यादा रहती है, जिनके रिश्ते अंतरंग होते हैं और जो भावुक होते हैं. ब्रिटिश हार्ट फाउंडेशन की हृदयरोग विशेषज्ञ कैथी रॉस कहती हैं, "भावनात्मक सहयोग की कमी के कारण दिल की बीमारी का ख़तरा बढ़ जाता है." उनका कहना है कि ऐसे लोग जिनका वैवाहिक जीवन रोज-रोज की झिकझिक के कारण तनावपूर्ण हो गया है, अगर उन्हें भावनात्मक सहयोग दिया जाए तो काफ़ी अच्छे नतीज़े मिल सकते हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें इंसुलिन के इंजेक्शन के बजाय गोली12 सितंबर, 2007 | विज्ञान जड़ी बूटियों के गुणों वाले भारतीय बुर्क़े07 सितंबर, 2007 | विज्ञान दिल देकर देखो....04 सितंबर, 2007 | विज्ञान बुढ़ापे की कहानी, 'तिल' की ज़ुबानी13 जुलाई, 2007 | विज्ञान दिल के दौरे से मोटे मरीज़ों को राहत20 जून, 2007 | विज्ञान नमक कम खाएँ, दिल बचाएँ 20 अप्रैल, 2007 | विज्ञान पैच बढ़ा सकता है सेक्स की चाहत27 मार्च, 2007 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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