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दिल देकर देखो.... | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
दिल देकर देखो ..ऐसे जुमले यूँ तो कई बार सुनने को मिलते हैं लेकिन वाकई अगर दिल देखने को मिले तो कैसा लगेगा और वो भी अपना ही दिल. ब्रिटेन की 23 वर्षीय युवती जेनिफ़र सटन को अपना ही दिल देखने का मौका मिल रहा है. दरअसल इस साल ऑपरेशन के ज़रिए उनका हृदय प्रतिरोपण किया गया. उन्हें बचपन में रिस्ट्रिक्टिव कार्डियोमाओपेथी नाम की जानलेवा बीमारी थी और इस कारण उनका दिल बदलना पडा. अब उनके दिल को अस्थाई तौर पर केंद्रीय लंदन में रखा गया है. भावनात्मक अनुभव जेनिफ़र ने जून में सर्जरी के बाद अपना 'दिल देने का फ़ैसला किया'- प्रदर्शनी के लिए. उन्हें उम्मीद है कि उससे अंगो के दान के प्रति लोगों में जागरुकता बढ़ेगी और साथ ही उस बीमारी के प्रति भी जिससे जेनिफ़र की जान जा सकती थी. अपना ही दिल देखने के बाद जेनिफ़र का कहना था, पहली बार अपना दिल देखना मेरे लिए बहुत भावनात्मक अनुभव है. जब ये मेरे अंदर था तो इसके चलते मुझे बहुत दर्द और परेशानी हुई. अब इसे बाहर देखकर बहुत अजीब सा लग रहा है. आख़िरकर मैं इस ठेलेनुमा चीज़ को देख सकती हूँ जिसने मुझे इतना परेशान किया. रिस्ट्रिक्टिव कार्डियोमाओपेथी के कारण मरीज़ की मौत भी हो सकती और हृदय प्रतिरोपण ही एक मात्र उपचार है. | इससे जुड़ी ख़बरें हृदय की रसौली का पहला सफल ऑपरेशन21 जून, 2007 | विज्ञान दिल के दौरे से मोटे मरीज़ों को राहत20 जून, 2007 | विज्ञान नमक कम खाएँ, दिल बचाएँ 20 अप्रैल, 2007 | विज्ञान महिला के दोनों हाथों का प्रतिरोपण12 दिसंबर, 2006 | विज्ञान चेहरे का प्रतिरोपण सफल होने का दावा04 जुलाई, 2006 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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