|
इंसुलिन के इंजेक्शन के बजाय गोली | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
शोधकर्ताओं का कहना है कि जल्द ही डायबटीज़ यानी मधुमेह से पीड़ित लोगों को बार बार इंसुलिन का इंजेक्शन नहीं लेना होगा और इसके बजाय गोली खाने से ही काम चल जाया करेगा. ब्रिटेन के एबरडीन स्थित रोबर्ट गार्डन विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने पाया कि इंसुलिन को एक परत से ढका जा सकता है यानि इसको गोली की शक्ल दी जा सकती है. फिलहाल इंसुलिन को इंजेक्शन के जरिए शरीर में पहुँचाया जाता है ताकि ख़ून में पहुँचने से पहले ये बेअसर न हो जाए. इस शोध से उन लोगों को राहत मिलेगी जो इंजेक्शन लेने से डरते हैं. ब्रिटेन के मैनचेस्टर में ब्रिटिश दवा कंपनियों के सम्मेलन में दिखाया गया कि कैसे एक परत चढ़ाने से इंसुलिन के एंज़ाइमों को नष्ट होने से रोका जा सकता है. डॉक्टर कॉलिन थॉम्पसन का कहना था,'' हम लोग मुँह से सेवन कर सकने वाली इंसुलिन तैयार करने में लगे हैं क्योंकि अध्ययन से पता चला है कि अनेक लोग इंजेक्शन लेने से डरते हैं.'' डायबिटीज़ के टाइप-1 रोगियों को इंसुलिन का इंजेक्शन लेना होता है जबकि टाइप-2 से पीड़ित रोगी खान पान या फिर गोलियों के सेवन से इसे नियंत्रित कर लेते हैं. इंसुलिन वह दवा है जो इंजेक्शन के रुप में डायबिटीज़ के मरीज़ों को लेनी होती है जिससे कि उनके खून में शर्करा की मात्रा स्थिर बनी रहे. उल्लेखनीय है कि दुनिया भर में हो रही मौतों के लिए मधुमेह चौथा सबसे बड़ा कारण माना जाता है. | इससे जुड़ी ख़बरें दूध पीने से घटता है मधुमेह का जोखिम15 जुलाई, 2007 | विज्ञान पश्चिमी खानपान के ख़तरे11 जुलाई, 2007 | विज्ञान डायबिटीज़ के बढ़ते ख़तरे पर चेतावनी13 नवंबर, 2006 | विज्ञान प्रोटीन बढ़ने से मधुमेह का ख़तरा15 जून, 2006 | विज्ञान 'एशिया में मधुमेह का बढ़ता खतरा'23 फ़रवरी, 2006 | विज्ञान इंसुलिन की ज़्यादा मात्रा ख़तरनाक?14 दिसंबर, 2005 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||