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'एशिया में मधुमेह का बढ़ता खतरा' | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि अगले 20 सालों में एशियाई देशों में मधुमेह के मामलों में 90 फ़ीसदी की बढ़ोतरी होगी. इतना ही नहीं ये बीमारी और इससे जुड़ी बीमारियाँ 21वीं सदी की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन सकती हैं. दुनिया के बाकी देशों की तुलना में एशिया में ये मधुमेह काफ़ी तेज़ी से फैल रही है. मधुमेह की चपेट में आने वालों में बच्चों समेत हर उम्र के लोग शामिल हैं. भारत में इस समय करीब तीन करोड़ तीस लाख मुधमेह के मरीज़ है जबकि चीन और पाकिस्तान में क्रमश दो करोड़ और 60 लाख मरीज़ हैं. तेज़ी से फैल रही मधुमेह बीमारी का कारण मुख्यत मनुष्यों के जीन को बताया है. इसके अलावा खान-पान में बदलाव भी इसके लिए ज़िम्मेदार है. भारतीय डॉक्टर कपूर बताते हैं कि नई दिल्ली में छह में से हर एक बच्चा मोटापे का शिकार है, लोग एक हफ़्ते में औसतन तीन बार घर से बाहर या होटल में खाना खाते हैं. मदरास मधुमेह शोध संस्थान के डॉक्टर वी मोहन बताते हैं," भारतीय लोगों में ऐसे जीन होते हैं जिनसे मधुमेह होने की आशंका बढ़ जाती है जबकि उनमें ऐसे जीनों की कमी होती है जो मधुमेह के प्रति रक्षा करते हैं." चिंताजनक बात ये है कि ज़्यादातर एशियाई देश, मधुमेह के मरीज़ों की संख्या में बढ़ोतरी से पैदा होने वाली स्थिति से निपटने के लिए तैयार नहीं है. डॉक्टर वी मोहन कहते हैं कि स्थिति से निपटने के लिए सरकारों को तत्काल क़दम उठाने की ज़रूरत है. एशिया महाद्वीप में मधुमेह के सबसे ज़्यादा मरीज़ पाए जाते हैं. नैरू प्रशांत द्वीप में मधुमेह के सबसे अधिक मरीज़ हैं. | इससे जुड़ी ख़बरें डायबिटीज़ को लेकर चेतावनी14 नवंबर, 2004 | विज्ञान 'करी पत्ते से मधुमेह के इलाज में मदद'29 सितंबर, 2004 | विज्ञान डायबटीज़ के मरीज़ों को राहत की उम्मीद20 सितंबर, 2004 | विज्ञान इंजेक्शन की ज़रूरत नहीं रहेगी19 अप्रैल, 2004 | विज्ञान अब शाकाहारी इंसुलिन06 अगस्त, 2003 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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