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बच्चों में आती हैं माँ की खाने की आदतें | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
गर्भवती महिलाओं को अपने खानपान का ख़ास ध्यान रखना चाहिए, क्योंकि इस दौरान वे जो खाती हैं, बहुत संभव है कि अपने बच्चे को भी वो वैसा ही खाते देखें. एक अध्ययन के अनुसार ऐसी महिलाएँ जो गर्भावस्था के दौरान जमकर फ़ास्ट फ़ूड लेती हैं, उनसे जन्मे बच्चे में भी फ़ास्ट फ़ूड के प्रति दीवानगी देखी जा सकती है. रॉयल वेटरिनरी कॉलेज के शोधकर्ताओं ने चूहों पर ये प्रयोग किए. शोध के अनुसार ऐसे चूहे जो बच्चा देने वाले थे, उन्हें खाने में बिस्कुट, मिठाई, कुरकुरे आदि दिया गया. पसंद इन चूहों से जन्मे बच्चों में पाया गया कि वे अपौष्टिक आहार ज़्यादा पसंद करते हैं. ब्रिटिश जर्नल ऑफ़ न्यूट्रिसन में प्रकाशित इस शोध के अनुसार चूहों के बच्चों के इस व्यवहार का अध्ययन उनके गर्भ में रहने के दौरान किया गया. वैज्ञानिक अपने शोध से पहले ही साबित कर चुके हैं कि मनुष्य बचपन में जो कुछ खाता है उसका असर भविष्य में दिखता है और मोटापा और दिल की बीमारियों के जोख़िम की शुरुआत भी यहीं से होती है. नए शोध से पता चला है कि गर्भावस्था के दौरान बहुत ज़्यादा खाना ख़तरनाक है, कम से कम चूहों के मामले में तो यह एकदम सही है. शोध में कुछ चूहों को बच्चा पैदा करने और स्तनपान कराने के दौरान भी संतुलित आहार के रूप में बिस्कुट, कुरकुरे जैसा फ़ास्ट फ़ूड दिया गया. नतीजा नवजात चूहों के व्यवहार में अंतर साफ़ दिखा. ऐसे चूहे जिन्होंने गर्भावस्था के दौरान सामान्य भोजन खाया था, उनके बच्चों ने कम खाना खाया और फ़ास्ट फूड पसंद नहीं किया, जबकि जंक फ़ूड खाने वाली चूहियों के बच्चे जंक फ़ूड पर टूट पड़े और ज़्यादा खाने के लिए लालायित दिखे. शोध से स्पष्ट हुआ कि फ़ास्ट फ़ूड खाने वाले चूहों ने चूहा-आहार खाने वालों से लगभग दोगुना खाना खाया. उल्लेखनीय है कि वैज्ञानिक शोध से साबित कर चुके हैं कि बर्गर और फ़्रेंच-फ़्राइज़ जैसे फ़ास्ट फ़ूड की लत हेरोइन की लत की तरह मुश्किल से छूटने वाली साबित हो सकती है. फ़ास्ट फ़ूड को मोटापे का प्रमुख कारण भी पाया गया है. |
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