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दो साल बाद तेज़ी से चढ़ेगा पारा | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
तापमान पर असर डालने में समुद्री लहरों और मानवीय गतिविधियों की भूमिका आँकने की नई प्रणाली के मुताबिक दो साल बाद गर्मी तेज़ी से बढ़ सकती है. ब्रिटेन में हैडली सेंटर के वैज्ञानिकों की एक टीम ने यह नया मॉडल विकसित किया है. वैज्ञानिकों का दावा है कि इससे अगले एक दशक के दौरान तापमान में संभावित ऊतार-चढ़ाव का अध्ययन किया जा सकता है. वैसे पहले भी इस तरह के मॉडल बनते रहे हैं लेकिन उनमें भविष्यवाणी अगले सौ वर्षों के आधार पर की गई जबकि इसमें निकट भविष्य की तस्वीर पेश करने की कोशिश की गई है. विज्ञान पत्रिका साइंस में इस नए मॉडल के बारे में जानकारी दी गई है. इसमें कहा गया है कि वर्ष 2009 से 2014 के बीच तापमान में तेज़ी से वृद्धि हो सकती है. नए आकलन के मुताबिक वर्ष 2014 में दुनिया का औसत तापमान वर्ष 2004 के मुक़ाबले 0.3 डिग्री सेल्सियस बढ़ेगा. हाल ही में संयुक्त राष्ट्र ने कई देशों के अंतरराष्ट्रीय पैनल से जो रिपोर्ट तैयार की थी उसके मुताबिक 21 वीं सदी के अंत तक तापमान में 1.8 से चार फ़ीसदी की वृद्धि हो सकती है. हैडली सेंटर के मौसम विज्ञानी डग स्मिथ का कहना है, "दस साल के अध्ययन के लिए प्राकृतिक बदलाव और मानवीय गतिविधियों की भूमिका दोनों अहम हैं जबकि एक सदी के लिए ऐसा ही अध्ययन करने में सिर्फ़ मानवीय गतिविधियों की भूमिका प्रभावी साबित होगी." |
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