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मां का दूध सबसे बेहतर: विशेषज्ञ | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र की दो एजेंसियों ने चेतावनी दी है कि एशिया प्रशांत क्षेत्र में बच्चों को मां का दूध पिलाने की प्रवृत्ति में आ रही कमी के कारण नवजात शिशुओं के बचने की संभावना कम हो रही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनीसेफ का कहना है कि अभिभावकों को इस बारे में और जागरुक करने की ज़रुरत है कि मां के दूध का कोई और विकल्प नहीं हो सकता है. फिलीपींस में चल रहे एक सम्मेलन में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहना है कि शिशु के स्वास्थ्य के लिए मां का दूध ही सबसे उत्तम होता है और इससे शिशुओं की मृत्यु दर में कमी आती है. हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते है कि कई विकासशील देशों में लोग बच्चे को बोतल का दूध पिलाते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि यह दूध मां के दूध से बेहतर और सुरक्षित है जबकि ऐसा नहीं है. यूनीसेफ से जुड़ी कैरन कोडिंग कहती हैं कि विकासशील देशों में ज्यादातर परिवार में मां का दूध नहीं पिलाया जाता क्योंकि वो समझते हैं कि बोतल से दूध पिलाना बेहतर है. विशेषज्ञों के अनुसार कंबोडिया में जहां मां का दूध पिलाने के कार्यक्रम को ज़ोर शोर से लागू किया गया है वहां शिशु मृत्यु दर में काफ़ी कमी आई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन से जुड़ी डॉक्टर चेसा लटर ने बीबीसी को बताया कि मां का दूध न केवल पैसे बचाता है बल्कि इससे विकासशील देशों में बच्चों की जान भी बचती है. लटर का कहना था कि विकासशील देशों में जहां साफ पेयजल की कमी है और बच्चों का दूध गंदा हो सकता है वहां मां का दूध बच्चों के लिए जीवनदायक होता है. | इससे जुड़ी ख़बरें माँ के दूध का असर पहले ही दिन से09 मई, 2005 | विज्ञान अब माँ के दूध का भी होगा कारोबार06 अगस्त, 2005 | विज्ञान माँ का दूध पिलाने का रिकॉर्ड06 मई, 2006 | विज्ञान दूध और जुड़वां बच्चों में संबंध20 मई, 2006 | विज्ञान 'क्लोन जानवरों के माँस और दूध सुरक्षित'29 दिसंबर, 2006 | विज्ञान बिना दूध की चाय क्या ज़्यादा सेहतमंद!09 जनवरी, 2007 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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