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बिना दूध की चाय क्या ज़्यादा सेहतमंद! | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चाय के बारे में प्रकाशित एक नए शोध में कहा गया है कि चाय में दूध डालने से उससे होनेवाले फ़ायदे ख़त्म हो जाते हैं. चाय के बारे में ये शोध प्रकाशित हुआ है यूरोपियन हार्ट जर्नल में. परीक्षण 16 महिलाओं पर किया गया. चाय पीने के दो घंटे पहले और दो घंटे बाद तक इन औरतों की बाँहों पर नज़र रखी गई. पाया गया कि जिन महिलाओं ने बिना दूध वाली चाय पी, उनकी नसों में ज़्यादा बेहतर संकुचन हो रहा था जिससे उनमें रक्त की आपूर्ति आराम से हो पा रही थी. शोध करनेवाले एक प्रोफ़ेसर ने बताया कि इस जानकारी के बाद अब इस बात का कारण पता चल सकता है कि उन देशों में दिल की बीमारी के मामले क्योंकर कम होते जा रहे हैं जहाँ लोग बिना दूध वाली चाय पीते हैं. दूसरी तरफ़ ब्रिटेन में ऐसा नहीं हुआ जहाँ दूध वाली चाय पीने का प्रचलन है. वैसे ये पता नहीं है कि यूरोप में लोगों ने कब से चाय में दूध डालना शुरू कर दिया. पहली बार इसका उल्लेख होता है 1680 के आस-पास के दस्तावेज़ों में. मगर आज ब्रिटेन और उसके पुराने उपनिवेशों जैसे भारत या हाँगकाँग में ही वो चाय पी जाती है जिसमें दूध डाला जाता है. वैसे इस शोध में ये पता नहीं चलता है कि दूध वाली चाय से कोई नुक़सान होता है कि नहीं. ब्रिटेन में हर साल लगभग साढ़े 16 करोड़ प्याली चाय पी जाती है और लगता नहीं कि इस शोध के सामने आने के बाद इस आँकड़े पर कोई फ़र्क पड़ेगा. भारत में तो चाय का प्रयोग बड़े पैमान पर होता है और शहरों से लेकर दूर-दराज़ के गाँवों तक चाय हर घर में पी जाती है. कहीं ज़्यादा दूध डालकर तो कहीं बहुत कम दूध के साथ. | इससे जुड़ी ख़बरें 'हरी चाय से दिल की सेहत अच्छी'13 सितंबर, 2006 | विज्ञान एशियाई बच्चों में विटामिन-डी की कमी03 सितंबर, 2006 | विज्ञान चाय पीना पानी से भी 'बेहतर' है!24 अगस्त, 2006 | विज्ञान इंटरनेट लिंक्स बीबीसी बाहरी वेबसाइट की विषय सामग्री के लिए ज़िम्मेदार नहीं है. | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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