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सोमवार, 09 मई, 2005 को 04:47 GMT तक के समाचार
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माँ के दूध का असर पहले ही दिन से
माँ का दूध अनमोल है
कुछ महिलाएँ बच्चों को अपना दूध पिलाने से कतराती हैं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि शिशु को माँ का दूध पिलाने से पहले ही दिन से शिशु और माँ, दोनों को ही इसके फ़ायदे नज़र आने लगते हैं.

ब्रिटेन के राष्ट्रीय जन्म ट्रस्ट (एनसीटी) ने पाया है कि 500 महिलाओं से बात की गई तो उनमें से आधी से ज़्यादा को इन फ़ायदों के बारे में पता ही नहीं था.

ट्रस्ट महिलाओं को अपने शिशुओं को दूध पिलाने के लिए प्रोत्साहित करने का अभियान चला रहा है और ताज़ा परिणामों से उसके इस अभियान को बल मिला है.

ब्रिटेन में एक सरकारी अभियान में 427 पुरुषों से पूछा गया तो उनमें से 79 प्रतिशत ने कहा कि वे अपने बच्चों को माँ का दूध पिलाने के हिमायती हैं.

इंगलैंड और वेल्स में क़रीब एक तिहाई महिलाओं ने अपने बच्चों को कभी भी अपना दूध नहीं पिलाया, जबकि स्वीडन में ऐसी महिलाओं की संख्या सिर्फ़ दो प्रतिशत थी.

अलग राय

2003 में ब्रिटेन सरकार ने बच्चों को अपना दूध पिलाने वाली महिलाओं की संख्या हर साल दो प्रतिशत बढ़ाने का लक्ष्य रखा था लेकिन विशेषज्ञ स्वीकार करते हैं कि बच्चों को ख़ुद का दूध पिलाना बहुत सी महिलाओं को रास नहीं आता या फिर उनके लिए यह कोई उपयुक्त विकल्प नहीं है.

विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामले में महिलाओं को अपनी निजी पसंद का मौक़ा दिया जाना चाहिए.

तैयार हो जाती हैं...
 हम हर माँ को प्रोत्साहित करते हैं कि वह बच्चे को अपना दूध पिलाए. कभी-कभार यह आसान नहीं होता लेकिन सही राय, मदद और प्रोत्साहन पर बहुत सी महिलाएँ इसके लिए तैयार हो जाती हैं.
एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता

इन विरोधाभासी विचारों को देखते हुए ही ट्रस्ट ने माँ के दूध के फ़ायदों के बारे में यह सर्वेक्षण कराया था.

सर्वेक्षण में पाया गया कि 10 में से 9 महिलाओं को यह नहीं मालूम था कि एक महीने तक बच्चे को माँ का दूध पिलाने से उसके स्वास्थ्य पर दीर्घकालीन अच्छा असर पड़ता है जो 14 साल तक बना रहता है.

बहुत सी महिलाओं को यह भी नहीं मालूम था कि बच्चों को अपना दूध पिलाने से महिलाओं में कैंसर सहित अनेक बीमारियों का ख़तरा कम हो जाता है.

राष्ट्रीय जन्म ट्रस्ट की एक विशेषज्ञ बेलिंडा फ़िप्प कहती हैं, "चूँकि माँ के दूध के फ़ायदे पहले ही दिन से शुरू हो जाते हैं, इसलिए बच्चों को माँ का दूध जितना भी पिलाया जाए, यह वाक़ई गर्व करने वाली बात है."

"यह वाक़ई उत्साहजनक बात है कि बहुत से पुरूष बच्चों को माँ का दूध पिलाए जाने की हिमायत करते हैं."

एक स्वास्थ्य कार्यकर्ता क्रिस्टीन कार्सन कहती हैं, "हम हर माँ को प्रोत्साहित करते हैं कि वह बच्चे को अपना दूध पिलाए. कभी-कभार यह आसान नहीं होता लेकिन सही राय, मदद और प्रोत्साहन पर बहुत सी महिलाएँ इसके लिए तैयार हो जाती हैं."

"हमें उम्मीद है कि बहुत सी महिलाएँ अपने बच्चों को अपना दूध पिलाने के लिए प्रोत्साहित होंगी और दोनों में इसके जो फ़ायदे होते हैं उनसे भी हौसला बढ़ेगा."

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