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इस साल आएगा सौ डॉलर वाला लैपटॉप | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
विकासशील देशों में 'हर बच्चे के लिए एक लैपटॉप' परियोजना के तहत सस्ते लैपटॉप की पहली खेप वर्ष 2007 में जुलाई तक आ जाने की संभावना है. इस परियोजना के पीछे लगे लोगों को उम्मीद है कि वे इस लैपटॉप को सौ अमरीकी डॉलर में यानी कोई 45 सौ रुपयों में बेच पाने में सफल होंगे. इस लैपटॉप को ख़रीदने के लिए सहमति जताने वालों में ब्राज़ील, अर्जेंटीना, उरुग्वे, नाइजीरिया, लीबिया, पाकिस्तान और थाइलैंड हैं. एक्सओ मशीन नाम के इस सस्ते लैपटॉप की परियोजना को मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नालॉजी (एमआईटी) मीडिया लैब में 2004 में निकोलस नैग्रोपॉन्टे ने शुरु किया था. निकोलस नैग्रोपॉन्टे का कहना है कि इस मशीन के लिए अगले दो हफ़्ते में कई और अफ़्रीकी देश सामने आ सकते हैं. तकनीक इस लैपटॉप में 366 मेगाहर्ट्ज़ प्रोसेसर लगा हुआ है और इसमें वायरलेस नेटवर्क है. इसमें कोई हार्डडिस्क नहीं है और इसकी जगह यह 512 एमबी की फ़्लैश मेमोरी का उपयोग करता है. इसमें दो अतिरिक्त यूएसबी पोर्ट हैं जिसमें अतिरिक्त सामग्री रखने के लिए प्रावधान किया जा सकता है. समाचार एजेंसी एपी को दिए एक साक्षात्कार में निकोलस नैग्रोपॉन्टे ने कहा, "जब लोग एक्सओ मशीन का ज़िक्र एक कमज़ोर या अधूरे मशीन के रुप में करते हैं तो मुझे हँसी आती है क्योंकि अब बच्चों के पास एक असली मशीन आने वाली है." उनका कहना है, "यक़ीन मानिए कि मैं जल्दी ही अपना लैपटॉप छोड़कर एक्सओ पर काम करने लगूँगा क्योंकि यह ज़्यादा बेहतर होगी." वैसे कंप्यूटर लाइनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम को छोटे वर्ज़न के साथ काम करेगा और इसे माइक्रोसॉफ़्ट विंडोज़ और एप्पल मशीन से कुछ अलग डिज़ाइन किया गया है. इसे चलाने के लिए एक नया इंटरफेस डिज़ाइन किया गया है. | इससे जुड़ी ख़बरें केवल 100 डॉलर वाला लैपटॉप 18 नवंबर, 2005 | विज्ञान चाभी वाला लैपटॉप सिर्फ़ 100 डॉलर में29 सितंबर, 2005 | विज्ञान केवल दस हज़ार रूपए में कंप्यूटर15 मई, 2005 | विज्ञान मीलों के दायरे में वायरलेस ब्रॉडबैंड19 अप्रैल, 2005 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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