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शुक्रवार, 01 दिसंबर, 2006 को 18:17 GMT तक के समाचार
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ख़तरनाक हो सकता है मोबाइल कचरा
मोबाइल कचरा
खतरनाक हो सकता है मोबाइल कचरा
मोबाइल फ़ोन दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के मुक़ाबले भले ही छोटे आकार के हों, लेकिन हमारी ज़रूरत बन चुका यह उपकरण पर्यावरण के लिए कई समस्याएँ पैदा कर सकता है.

मोबाइल हैंडसेट की बिक्री दिनोंदिन बढ़ती जा रही है और एक आकलन के मुताबिक केवल इसी वर्ष 94 करोड़ फोन बिक जाएंगे और अगले वर्ष तक इसके एक अरब पार कर जाने की संभावना है.

अस्सी के दशक के अंत में ये फ़ोन बाज़ार में आए थे और तब से अब तक करीब पाँच अरब हैंडसेट लोगों के हाथों में पहुँच चुके हैं.

मोबाइल फ़ोनों के पर्यावरण पर पड़नेवाले प्रभावों के एक अध्ययन में पाया गया है कि दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की तरह मोबाइल फ़ोन के भीतर भी कई ख़तरनाक पदार्थ पाए जाते हैं.

यदि इन पुराने हैंडसेट और इनके हानिकारक पुर्जों को ठीक तरीके से निपटाया नहीं जाता तो ये पर्यावरण के लिए घातक साबित हो सकते हैं.

घातक धातुएँ

इन हैंडसेट के निर्माण में पारा, सीसा और कैडमियम जैसे भारी धातुओं का इस्तेमाल किया जाता है.

इनकी बैटरी में पाया जाने वाला निकल और लीथियम भी हानिकारक पदार्थों की श्रेणी में आते हैं.

ये सारे पदार्थ मनुष्य में कैंसर और दूसरी घातक बीमारियों का कारण बन सकते हैं और यदि इन्हें पर्यावरण में यूँ ही मुक्त छोड़ दिया गया तो इनका प्रभाव विनाशकारी हो सकता है.

समस्या तब शुरु होती है जब इन हैंडसेट को यूँ ही खुले में फेंक दिया जाए. इससे ये जहरीले पदार्थ मिट्टी और भूमिगत जल में घुल-मिल सकते हैं.

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के आकलन के अनुसार बेकार हो चुके इलेक्ट्रॉनिक पदार्थों का करीब पाँच करोड़ टन कचरा पश्चिमी देशों से विकासशील देशों में भेज दिया जाता है.

पहले इनमें से ज़्यादातर कचरा एशिया के दो बड़े देश चीन और भारत में भेज दिया जाता था.

लेकिन अब कड़े क़ानूनों के कारण ये कचरा अफ़्रीकी देशों में भेज दिया जाता है जहाँ इससे निपटने की कोई सुविधा मौजूद नहीं है.

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