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मछली तो खाओ पर देखभाल कर | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मछली की शौकीन महिलाएँ अगर माँ बनने की सोच रही हैं तो उन्हें सजग रहने और ‘ज़्यादा वसायुक्त’ मछलियों के भोजन से परहेज करने की ज़रूरत है. वैज्ञानिकों का मानना है कि अधिक वसायुक्त मछली खाने से गर्भवती महिलाओं की कोख में पल रहे बच्चे का जन्म समय से पहले होने का जोखिम बढ़ जाता है. शोधकर्ताओं ने ‘न्यू साइंटिस्ट’ पत्रिका को बताया कि यह ख़तरा मैकरेल, सालमोन और सार्डिन्स जैसी छोटी समुद्री मछलियों में ज्यादा वसा के कारण होता है. हालाँकि शोधकर्ताओं ने यह भी कहा है कि कम वसा वाली मछलियों के सेवन से गर्भवती महिलाओं को कोई ख़तरा नहीं है. खाद्य मानकों पर नज़र रखने वाली एक एजेंसी का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को सप्ताह में दो बार भोजन में मछली खानी चाहिए. सलाह वैज्ञानिकों ने सुझाव दिया है कि गर्भवती महिलाओं को पारे के अधिक स्तर वाली मछलियों, मसलन शार्क, मार्लिन और स्वर्डफिश को अपने भोजन में शामिल करने से परहेज़ करना चाहिए. इन मछलियों को छोड़ कर अन्य प्रजाति के मछलियों का सेवन गर्भावस्था में लाभप्रद है. अध्ययन में सामने आया है कि गर्भधारण के दौरान मछली का सेवन करने वाली महिलाओं के बच्चे स्वस्थ और उचित वज़न के होते हैं. इसके अलावा उनकी दिमागी शक्ति भी दूसरे बच्चों की तुलना में अधिक होती है. | इससे जुड़ी ख़बरें माँ का दूध पिलाने का रिकॉर्ड06 मई, 2006 | विज्ञान अब माँ के दूध का भी होगा कारोबार06 अगस्त, 2005 | विज्ञान जच्चा-बच्चा के स्वास्थ्य पर चिंता08 अप्रैल, 2005 | विज्ञान रोमानिया की महिला 66 साल में माँ बनी16 जनवरी, 2005 | विज्ञान कैंसरग्रस्त महिलाओं का माँ बनना आसान24 सितंबर, 2004 | विज्ञान लड़की या लड़का माँ की सोच का नतीजा05 अगस्त, 2004 | विज्ञान गर्मियों में पैदा माँओं के बच्चे कम29 अप्रैल, 2004 | विज्ञान | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
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