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होम्योपैथिक दवाओं के प्रभाव पर सवाल | |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
चिकित्सा क्षेत्र की एक प्रमुख पत्रिका ने होम्योपैथी उपचार प्रणाली पर हमला करते हुए होम्योपैथिक दवाओं को परीक्षणों में प्रयुक्त गुणहीन नकली गोलियों जैसा अप्रभावी क़रार दिया है. मेडिकल जर्नल 'लान्सेट' के अनुसार इस मुद्दे पर अब और अध्ययन की कोई ज़रूरत नहीं है और डॉक्टरों को रोगियों को ये बताने में संकोच नहीं करना चाहिए कि होम्योपैथी का कोई फ़ायदा नहीं है. पत्रिका ने ब्रिटेन और स्विटज़रलैंड के विशेषज्ञों की एक संयुक्त टीम द्वारा किए गए 110 परीक्षणों की रिपोर्ट प्रकाशित की है. अध्ययन टीम ने ये परीक्षण अस्थमा, एलर्जी और माँसपेशियों से जुड़ी बीमारियों समेत विभिन्न बीमारियों पर किए. छोटे नमूने वाले सामान्य परीक्षणों में तो होम्योपैथिक और सामान्य, दोनों किस्म की दवाओं को असरदार पाया गया, लेकिन उच्च कोटि के परीक्षण में होम्योपैथिक दवाओं का वही असर देखा गया जो कि गुणहीन नकली गोलियों का था. दावा अध्ययन से जुड़े बर्न विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर मैथियस एगर के अनुसार कुछ लोगों ने होम्योपैथिक दवाओं के असरदार होने की बात की है वो इलाज़ के पूरे अनुभव के कारण ऐसा कहते होंगे क्योंकि होम्योपैथ डॉक्टर रोगी को पूरा समय देते हैं. हालाँकि होम्योपैथी पर सवाल उठाते हुए 'लान्सेट' ने इस बात का भी ज़िक्र किया है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट में होम्योपैथिक दवाओं को गुण-रहित गोलियों से बेहतर माना गया है. लेकिन 'लान्सेट' की रिपोर्ट के अनुसार विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट का आधार पुराने और आसान परीक्षणों को बनाया गया है. सोसायटी ऑफ़ होम्योपैथ्स की एक प्रवक्ता ने 'लान्सेट' की रिपोर्ट पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा है कि होम्योपैथिक दवाएँ प्रभावी होती हैं इस पर संदेह की कोई गुंज़ाईश नहीं है. प्रवक्ता ने गुणहीन नकली गोलियों के मुक़ाबले दवाओं के असर के परीक्षण की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाया. |
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