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इस साल लौट सकता है अल-नीनो | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका के मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इस साल अल-नीनो फिर लौट सकता है. मौसम की भविष्यवाणी करने वाली एजेंसी का कहना है कि उन्होंने प्रशांत महासागर में तापमान में परिवर्तन दर्ज़ किया है जो अल-नीनो के आने का संकेत होता है. अल-नीनो एक ऐसी मौसमी परिस्थिति है जो प्रशांत महासागर के पूर्वी भाग यानी दक्षिणी अमरीका के तटीय भागों में महासागर के सतह पर पानी का तापमान बढ़ने की वजह से पैदा होती है. इसकी वजह से मौसम का सामान्य चक्र गड़बड़ा जाता है और बाढ़ और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाएँ आती हैं. सात साल पहले अल-नीनो की वजह से कई देशों में फसल चौपट हो गई थी और कई जगह भयंकर बाढ़ आई थी, जिससे दुनिया भर में अरबों डॉलर का नुक़सान हुआ था. माना जाता है कि अल-नीनो लगभग सात सालों में एक बार लौटता है. हालांकि कुछ मौसम विज्ञानी कह रहे हैं कि अल-नीनो के बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाज़ी होगी क्योंकि प्रशांत महासागर में इस साल तापमान अस्थिर ही रहा है. पिछला अल-नीनो पिछली बार अल-नीनो 1997-98 में आया था और एक ब्रितानी मौसम विज्ञानी के अनुसार 'अब उसके आने का समय है'.
अमरीकी मौसम विभाग का कहना है कि इस साल अल-नीनो के लौटने की 50 प्रतिशत संभावना है. हालांकि आमतौर पर अल-नीनो की भविष्यवाणी अप्रैल-मई महीने तक कर दी जाती है. और इस समय इसकी संभावना की बातें कुछ असामान्य हैं. 1997-98 में जब अल-नीनो आया था तब अफ़्रीका और एशिया में फसलों को भारी नुक़सान हुआ था और अमरीका के पश्चिमी तट पर बाढ़ आई थी. ऑस्ट्रेलिया और एशिया में विशेषज्ञ कह रहे हैं कि यदि अल-नीनो लौटा तो फसलों को भारी नुक़सान होगा. हालांकि अल-नीनो के सारे प्रभाव नकारात्मक या नुक़सान पहुँचाने वाले ही नहीं होते. अमरीका में चक्रवात संबंधी अध्ययन करने वाले कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि अल-नीनो की वजह से चक्रवात और तूफ़ान की संभावनाएँ कम हो जाती हैं. |
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