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माइक्रोसॉफ़्ट ने एजेंसियों से मदद माँगी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कंप्यूटर सॉफ़्टवेयर बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ने अपने विंडोज़ ऑपरेटिंग सिस्टम के कुछ कोड चोरी होने के मामले की जाँच में विभिन्न एजेंसियों से मदद माँगी है. ग़ौरतलब है कि माइक्रोसॉफ़्ट के कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम के कुछ ब्लूप्रिंट्स कड़ी सुरक्षा के बावजूद इंटरनेट पर लीक हो गए हैं. माइक्रोसॉफ़्ट को इस चोरी का पता कल ही चल गया था लेकिन अभी यह नहीं पता लगाया जा सका है कि यह हुआ कैसे. माइक्रोसॉफ़्ट के प्रवक्ता टॉम पिल्ला ने कहा है, "अभी हम यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि यह चोरी कैसे हुई और इस बारे में जाँच एजेंसियों की भी मदद ली जा रह है." माइक्रोसॉफ़्ट का कहना है कि विंडोज़ के वो सोर्स कोड चोरी हो गए हैं जिनके आधार पर विंडोज़ काम करता है. महत्वपूर्ण सोर्स कोड दरअसल वह भाषा होती है जिसके ज़रिए कंप्यूटर का कोई प्रोग्राम तैयार किया जाता है. कंप्यूटर की दुनिया में यह बहुत ही क़ीमती और महत्वपूर्ण होता है और बिल्कुल वैसा ही होता है जैसे किसी मकान का नक्शा. अगर नक्शा नहीं होगा तो वह ख़ास मकान बनेगा ही कैसे? ये सोर्स कोड ख़ासतौर से विंडोज़ 2000 और एनटी संस्करणों के थे. दुनिया भर में कंप्यूटर का इस्तेमाल करने वाले क़रीब 90 प्रतिशत लोग माइक्रोसॉफ़्ट के उत्पादों का ही प्रयोग करते हैं. कंप्यूटर विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह अंदाज़ा नहीं लगाया जा सका है कि इस चोरी से कंप्यूटर जगत को और माइक्रोसॉफ़्ट को कितना और किस तरह नुक़सान होगा क्योंकि इस बारे में बहुत कम सूचना उपलब्ध है. माइक्रोसॉफ़्ट ने माना है कि विंडोज़ के ताज़ा संस्करणों में कुछ ख़ामियों की वजह से कंप्यूटरों पर हैकरों के हमले बढ़ सकते हैं. |
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