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शनिवार, 10 जनवरी, 2004 को 17:36 GMT तक के समाचार
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धमकी वाले ई-मेल का बुरा असर
धमकाने वाले ई-मेलों से ब्लड प्रेशर ऊँचा
धमकाने वाले ई-मेलों से ब्लड प्रेशर ऊँचा

ई-मेल के ज़रिए अपने कर्मचारियों को धमकाने वाले बॉस मुश्किल में पड़ सकते हैं.

ब्रिटेन में एक शोध में ये बात सामने आई है कि ऐसे धमकी के अंदाज़ में भेजी गई ई-मेल से कर्मचारियों का ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है.

ये शोध बकिंघमशर में चिल्टर्न्स यूनिवर्सिटी कॉलेज के वैज्ञानिकों ने किया.

 ब्लड प्रेशर तब सबसे ज़्यादा बढ़ा जब ई मेल बॉसों की ओर से आए और वो भी धमकाने वाले तेवर में

हावर्ड टेलर

संस्था से जुड़े मनोवैज्ञानिक, प्रोफ़ेसर कैरी कूपर का कहना है कि कर्मचारियों को अनुशासित करने के लिए ई-मेल का प्रयोग नहीं किया जाना चाहिए.

उन्होंने बताया कि इस बात के प्रमाण हैं कि ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण बाद में जाकर स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है.

शोध

इस शोध के लिए 48 लोगों को चुना गया.

फिर ये देखा गया कि अलग-अलग परिस्थितियों में अलग ई-मेलों का उनके ब्लड प्रेशर पर क्या असर पड़ता है.

इसमें इन लोगों के पास दो तरह के लोगों के मेल भेजे गए- एक उनके समकक्षों के और दूसरा उनके बॉसों के.

फिर उनकी भाषा भी अलग थी- एक सामान्य और एक धमकी वाली.

शोध से जुड़े हावर्ड टेलर ने कहा,"ब्लड प्रेशर तब सबसे ज़्यादा बढ़ा जब ई मेल बॉसों की ओर से आए और वो भी धमकाने वाले तेवर में".

शोधकर्ता इस नतीजे पर पहुँचे कि इस तरह के ई-मेलों से काम पर बुरा असर पड़ता है.

ई-मेल पर पाबंदी

 ई-मेल हमारे लिए अब सहयोगी नहीं रहा बल्कि ये हमें तनाव में डालने का एक माध्यम बन गया है

प्रोफ़ेसर कैरी कूपर

कुछ कंपनियों ने हाल ही में अपने यहाँ कर्मचारियों के बीच संवाद के लिए ई-मेल के प्रयोग पर पाबंदी लगा दी गई.

उनका कहना है कि ई-मेल एक वरदान की जगह उनके लिए बोझ के समान बन गया है.

प्रोफ़ेसर कैरी कूपर ने कहा,"ई-मेल हमारे लिए अब सहयोगी नहीं रहा बल्कि ये हमें तनाव में डालने का एक माध्यम बन गया है."

उन्होंने कहा कि दफ़्तरों में महत्वपूर्ण निर्देश जारी करने या कोई समाचार देने के लिए सबसे अच्छा तरीक़ा ये है कि बात सीधे मुँह पर जाकर कही जाए न कि ई-मेल के ज़रिए.

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