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'वेब पितामह' को मिला नाइटहुड सम्मान
वर्ल्ड वाइड वेब यानी डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू के जनक टिम बर्नर्स ली को नाइटहुड से सम्मानित किया गया है. सर टिम बर्नर्स ली ने 10 साल पहले इंटरनेट पर अलग-अलग वेबसाइटों को देखने की सुविधा निकाली जिसके कारण वेब जगत में उन्हें "वेब पितामह" कहा जाता है. नाइटहुड दिए जाने के बाद सरल और मृदु स्वभाव वाले टिम ने कहा कि वे एक बिल्कुल साधारण व्यक्ति हैं और नाइटहुड पाकर वे सम्मानित महसूस कर रहे हैं. ब्रिटिश वैज्ञानिक टिम अमरीका में रहते हैं और उन्हें कुछ दिन पहले ई-मेल नहीं बल्कि टेलीफ़ोन पर ये बताया गया कि उनका नाम नए साल में नाइटहुड से सम्मानित किए जानेवाले लोगों में शामिल है. क्रांति
1955 में लंदन में जन्मे टिम ने ऑक्सफ़ोर्ड विश्वविद्यालय के क्वींस कॉलेज से फ़िज़िक्स की पढ़ाई की. मगर एक साथी के साथ मिलकर हैकिंग यानी इंटरनेट के माध्यम से छेड़छाड़ करने के आरोप में उन्हें विश्वविद्यालय का कंप्यूटर इस्तेमाल करने से रोक दिया गया. बाद में उन्होंने एक टेलीविज़न, एक मोटरॉला माइक्रोप्रोसेसर और एक सोल्डरिंग आयरन की सहायता से ख़ुद ही कंप्यूटर तैयार कर लिया. फिर जब वे स्विटज़रलैंड की राजधानी जिनेवा में कर्न फ़िज़िक्स इंस्टीट्यूट में थे तो उन्होंने वह हाइपरटेक्स्ट प्रोग्राम तैयार किया जिसने नेट दुनिया में क्रांति ला दी. इस प्रोग्राम को 90 के दशक की शुरूआत में वर्ल्ड वाइड वेब यानी डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू का नाम दिया गया. सर टिम ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के एक सम्मेलन में फिर उस कंप्यूटर पर काम किया जिसपर उन्होंने अपना क्रांतिकारी आविष्कार किया था. सरलता
नाइटहुड मिलने के बाद सर टिम ने कहा कि नाइटहुड का सम्मान मिलने से ये साबित होता है कि उनके जैसे साधारण लोग भी जब कुछ ऐसा करते हैं जो कामयाब हो जाए तो लोग उन्हें जानने लगते हैं. उन्होंने कहा कि ये सम्मान इस बात की पहचान है कि इंटरनेट कितना ताक़तवर बन गया है. उन्होंने कहा,"एक समय था जब लोग इंटरनेट को दूसरी दुनिया की चीज़ समझते थे मगर अब लोग ये महसूस करने लगे हैं कि ये एक ऐसी चीज़ है जिसे हम इसी दुनिया में इस्तेमाल करते हैं". सर टिम अभी अमरीका में बोस्टन स्थित मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी में पढ़ा रहे हैं. |
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