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संयुक्त राष्ट्र का सूचना तकनीक पर पहला सम्मेलन
संयुक्त राष्ट्र ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर का सूचना तकनीक का ऐसा सम्मेलन कराया है जिसमें अमीर और ग़रीब देशों के बीच तकनीकी विकास की खाई को पाटने की कोशिश की गई है. जिनेवा में हुए इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 170 देशों ने भाग लिया. इस सम्मेलन में ये तय हुआ कि दुनिया की कम से कम आधी जनसंख्या को वर्ष 2015 तक 'इलेक्ट्रॉनिक मीडिया' से जोड़ा जाए. इस विषय में विस्तृत योजना बाद में सामने आएगी. दुनिया भर के क़रीब दस हज़ार राजनीतिक नेताओं, व्यापारिक प्रतिनिधियों, विकास कार्य में लगे कार्यकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों को इस सम्मेलन ने एक मंच पर ला खड़ा किया. पिछले सप्ताह समाप्त हुए इस सम्मेलन के फलस्वरूप उपजे विचारों को 'सूचना युग का पहला संविधान' कहा जा रहा है. इस सम्मेलन में इंटरनेट और सूचना तकनीक के राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक प्रभावों और इसके स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में इस्तेमाल पर भी विस्तृत चर्चा हुई. इस सम्मेलन से एक बात ये भी साफ़ हो गई कि इंटरनेट के इस्तेमाल पर अब सिर्फ़ तकनीकी विशेषज्ञों का वर्चस्व नहीं है. बहस का एक और प्रमुख मुद्दा ये था कि किस तरह से इंटरनेट का विकास कार्यों में सर्वश्रेष्ठ इस्तेमाल हो सकता है. दुनिया भर की विविध संस्कृतियों, सभ्यताओं वाले समाजों को इंटरनेट के जरिए एक धागे में पिरोने की कोशिशों पर भी चर्चा हुई. अपने तरह के इस पहले सम्मेलन में तय किए गए एजेंडे की सफलता पर एक बार फिर से विचार 2005 में तुनिसिया में किया जाएगा. |
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