वायु प्रदूषण से दिमाग़ को भी नुक़सान?

    • Author, डेविड शुकमैन
    • पदनाम, साइंस एडिटर, बीबीसी न्यूज़

नए शोध से संकेत मिले हैं कि दिमाग़ के टिशू में वायु प्रदूषण के कण होने के कारण अल्ज़ाइमर जैसी बिमारी हो सकती है.

यह नतीजा लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के एक अध्ययन में सामने आया है.

शोध में वायु प्रदूषण से होने वाले नए स्वास्थ्य जोखिमों के बारे में बताया गया है.

अभी तक हमें वायु प्रदूषण के कारण दिल और सांस की बीमारी के बारे में पता था लेकिन नए शोध ने इससे होने वाली अन्य समस्याओं की ओर भी ध्यान केंद्रित किया है.

लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता दल ने मर चुके लोगों के दिमाग़ के सैंपल इकट्ठा कर के यह शोध किया है.

प्रोफेसर बारबरा माहेर
इमेज कैप्शन, प्रोफेसर बारबरा माहेर.

लैंकेस्टर यूनिवर्सिटी की प्रोफ़ेसर और शोधकर्ता दल की सदस्य प्रोफ़ेसर बारबरा माहेर बताती हैं, "हमें दिमाग़ के सैंपल में वायु प्रदूषकों के लाखों कण मिलें. एक मिलीग्राम दिमाग़ के टिशू में हमें लाखों मैगनेटिक प्रदूषक कण मिले हैं. इससे दिमाग़ के क्षतिग्रस्त होने की प्रबल संभावना है."

सांस के माध्यम से शरीर में पहुंचने वाले प्रदूषण के कणों का बड़ा भाग तो श्वास की नली में जाता है लेकिन इसका एक छोटा हिस्सा स्नायु तंत्र से होते हुए दिमाग़ में भी पहुंचता है.

शोध से पता चला है कि ये मैगनेटिक प्रदूषक कण दिमाग़ में पहुंचने वाली आवाज़ों और संकेतों को रोक सकते हैं, जिससे की अल्ज़ाइमर जैसी बीमारी हो सकती है.

हालांकि अल्ज़ाइमर के साथ इसके जुड़े होने की पुष्टि अभी पूरी तरह से नहीं हुई है.

डॉक्टर क्लेयर वाल्टन
इमेज कैप्शन, डॉक्टर क्लेयर वाल्टन.

अल्ज़ाइमर सोसायटी की डॉक्टर क्लेयर वाल्टन कहती हैं कि यह पहली बार है जब वायु प्रदूषण पर होने वाले शोध से ऐसे किसी संभावना का पता चला है. यह अहम बात है.

यह अध्ययन अभी शुरुआती दौर में है और इससे अभी बहुत सारे सवालों का पता नहीं चला है. लेकिन यह अध्ययन इस दिशा में कई नए शोध के दरवाज़े खोलता है.

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