अपने नंबर, ईमेल बिना वजह किसी को नहीं दीजिए

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कोई भी मोबाइल नंबर नंबर अगर 'नेशनल डू नॉट कॉल' पर पूरी तरह से ब्लॉक केटेगरी पर रजिस्टर किया हुआ है तो उसपर किसी तरह के कॉल करना या एसएमएस भेजना गलत है. टेलीकॉम नियामक ट्राई (http://www.nccptrai.gov.in/nccpregistry) को आप ईमेल या एक ऐप के ज़रिये शिकायत कर सकते हैं और उसके ख़िलाफ़ कारवाई की जाएगी.
मोबाइल फ़ोन ग्राहकों के अनचाहे कॉल से परेशान होने के बाद देश में अक्टूबर 2007 के बाद यही क़ानून है. उसके बाद भी कई बार अनचाहे कॉल ये मैसेज आते ही हैं. इनसे बचने के लिए ये तरीके को अपने फ़ोन और ईमेल के लिए ज़रूर लागू करने की सोचें.
अपने ईमेल एड्रेस और फ़ोन नंबर कभी भी, कहीं भी कांटेस्ट में नहीं दीजिए. कंपनियां आपको बढ़िया ईनाम जीतने के ख्वाब दिखा कर ईमेल और फ़ोन नंबर लेने की कोशिश करती हैं. ऐसे कांटेस्ट आपके काम के नहीं होते हैं और इससे सिर्फ कंपनियों को फायदा होता है.

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ऑनलाइन कई ट्रांसजैक्शन करने के लिए ईमेल और फ़ोन नंबर देना ज़रूरी है. ऐसी ज़रुरत के लिए एक ऐसा ईमेल रखिये जो आपके रोज़ के काम का नहीं है. इसमें कंपनियां अपने बेकार का ईमेल भेजेंगी तो वो आपके लिए परेशानी नहीं बनेंगी. अलग मोबाइल नंबर रखने से उस पर आने वाले मेल या मैसेज को आपको पढ़ने की ज़रूरत नहीं होगी.
आजकल कई जगह खरीदारी करते समय जब आप पैसे देने जाते हैं तो वो आपसे मोबाइल नंबर मांगते हैं. ये नंबर कभी नहीं देना चाहिए. ऐसे स्टोर पर आपको कई लुभावने ऑफर देने की बात कही जायेगी और सेल के बारे में पहले खबर मिलने की भी बात होगी. पर ये सब आपके मोबाइल नंबर और ईमेल को लेने के लिए कहा जाता है. क्रेडिट कार्ड की जानकारी तो पैसे देते समय उन्हें मिल ही जाता है.
अगर आप ऑनलाइन खरीदारी करते हैं जहां अपने नंबर देना ज़रूरी है, अनजाने लोगों को अपना फ़ोन नंबर देना होता है और डेटिंग वेबसाइट पर फ़ोन नंबर देना चाहते हैं तो हश्ड (https://hushed.com) नाम के ऐप को डाउनलोड करके दूसरे नंबर की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं. पहले तीन दिन तक ये फ्री है और उसके बाद अनलिमिटेड कॉल और मैसेज के लिए आपको हर महीने 350 रुपये लगेंगे.

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अगर काम और घर के लिए अलग फ़ोन नंबर रखेंगे तो दोनों को मैनेज करना बहुत आसान हो जाएगा. उसी तरह अनचाहे मैसेज के लिए अब एक फ़ोन नंबर रखना आपकी ज़िन्दगी को आसान बना देता है.
आप साल में भले ही दो बार छुट्टी लेते हैं लेकिन कई ट्रैवल कंपनी आपको रोज़ ईमेल भेजकर अपने नए ऑफर के बारे में जानकारी देती हैं.
रिटेल कंपनियां भी ऐसे ऑफर आप तक ईमेल या मोबाइल से पहुंचाती हैं. अगर 100 ग्राहकों को ईमेल भेजकर 2-4 से जवाब मिल जाता है तो कंपनियों के लिए ये बहुत सस्ता पड़ता है. इसीलिए वो आपसे पर्सनल जानकारी मांगती हैं. लेकिन कंपनियों को अगर सभी 100 ग्राहकों को चिट्ठी भेजना पड़े और 10 भी उसका जवाब भेज भी दें तो कंपनियों के लिए ये बहुत महंगा पड़ता है.
आपको भले ही जो परेशानी हो, लेकिन अपने खर्चे कम करने के लिए कंपनियां आपसे ही जानकारी ले रही हैं. खुद जानकारी दे कर अगर परेशानी मोल लेना है तो अपने मोबाइल नंबर और ईमेल को आप सभी को बांट सकते हैं.
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