ज़रा अभ्यास और आप हो सकते हैं शरलॉक होम्स

शेरलॉक होम्स
    • Author, हेलन थॉमसन
    • पदनाम, बीबीसी फ़्यूचर

अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि वह सब कुछ बहुत जल्दी भूल जाते हैं. कुछ लोगों की याददाश्त की तारीफ़ भी होती है. जिसकी याददाश्त अच्छी होती है लोग उसे ऊपरवाले की नेमत मानते हैं.

मगर कोई भी थोड़ी सी मेहनत करके अपनी याददाश्त को बेहतर कर सकता है. बल्कि कई लोगों ने तो ऐसा किया भी है.

अमरीका के एलेक्स मलेन को ही लीजिए. कुछ साल पहले अगर आप एलेक्स से कहते कि वो ताश के पत्तों को याद करके उनके नाम बताए. ये काम उसे इक्कीस सेकेंड में करना हो तो वो सिरे से इनकार कर देते. मगर आज एलेक्स इतने ही वक़्त में ताश के पत्तों के पूरे पैकेट में मौजूद हर कार्ड का नाम याद कर लेते हैं. केवल 21.5 सेकेंड में.

अमरीका की मिसीसिपी यूनिवर्सिटी के छात्र एलेक्स आज वर्ल्ड मेमोरी चैंपियन हैं.

कुछ साल पहले एलेक्स ने पत्रकार जोशुआ फोयर की क़िताब, 'मूनवाकिंग विद आइंस्टाइन' पढ़ी थी. इस क़िताब में जोशुआ ने एक मेमोरी चैंपियनशिप में शामिल होने के अपने तजुर्बे को बयां किया है. जिसमें उन्होंने देखा कि कुछ लोगों ने पुराने तरीक़ों से अपनी याददाश्त तेज़ की थी.

डिक्शनरी

एलेक्स ने भी क़िताब पढ़ने के बाद इस नुस्खे को आज़माने की सोची. पहले उनकी याददाश्त भी आम लोगों जैसी, बल्कि काफ़ी कमज़ोर थी. मगर, 2013 से उन्होंने जोशुआ की क़िताब में बताए नुस्खों की मदद से इसे सुधारने की कोशिश शुरू की. साल भर के अंदर ही अमरीका की मेमोरी चैंपियनशिप में वो दूसरे नंबर तक पहुंच गए. 2015 में वो वर्ल्ड मेमोरी चैंपियनशिप तक जा पहुंचे.

वर्ल्ड मेमोरी चैंपियनशिप पिछले साल दिसंबर में चीन के ग्वांगझाऊ शहर में हुई थी. इसमें दस राउंड में लोगों की याददाश्त का इम्तिहान लिया गया. जिसमें मुश्किल नंबर याद करने से लेकर, चेहरे और ताश के पत्ते याद करने तक के टेस्ट थे.

मुलेन इस चैंपियनशिप में एलेक्स ने महज एक सेकेंड कम वक़्त लेकर बाज़ी अपने नाम कर ली. एलेक्स मुलेन के नाम याददाश्त के कई रिकॉर्ड हैं. जैसे उन्हें 3029 जुड़वा अंक याद हैं. वो कहते हैं कि साल भर पहले उनके लिए ऐसा सोच पाना भी मुमकिन नहीं था. वो अमरीका में याददाश्त के छह रिकॉर्ड अपने नाम कर चुके हैं. इनमें आधे घंटे में दो अंकों वाली क़रीब चार हज़ार संख्या याद करना शामिल है.

हम आप अक्सर बाज़ार सामान लेने जाते हैं तो यही भूल जाते हैं कि क्या लेने आए हैं. उस पर इतने नंबर याद करना. मगर एलेक्स मानते हैं कि कोई भी अपनी याददाश्त उनके जैसी कर सकता है. इसके लिए आपको अपने दिमाग़ में ‘मेमोरी पैलेस’ बनाना होगा.

शेरलॉक होम्स

'माइंड पैलेस' किसी जगह की या रास्ते की वह तस्वीर है जो आपके ज़ेहन में रहती है. ये नाम आर्थर कानन डायल के जासूसी उपन्यासों के मशहूर किरदार शरलॉक होम्स के हवाले से दिया गया था. कई चीज़ों को याद करने के लिए हम अपने दिमाग़ के इस 'माइंड पैलेस' से गुज़रते हैं और ज़ेहन में बसी तस्वीरों की मदद से उन्हें याद करते हैं.

कहते हैं कि याददाश्त तेज़ करने की इस तकनीक की खोज यूनानी कवि, सिमोनाइड्स सियोस ने की थी. जो ईसा से 477 साल पहले यूनान में रहते थे.

क़िस्सा मशहूर है कि सिमोनाइड्स एक जागीरदार के यहां दावत में गए थे. दावत के दौरान ही उन्हें बाहर एक दूत से मिलने को बुलाया गया. जैसे ही वो दावत के हाल से बाहर आने लगे, छत गिर गई. अंदर बैठे सारे लोग मारे गए.

जब लोग मलबे में अपनों को तलाश रहे थे तो सिमोनाइड्स ने अंदर बैठने के दौरान की तस्वीरों को याद किया, जो उनके ज़ेहन में बसी थीं. उनकी इस याद की मदद से ही लोग मलबे में मरे अपने लोगों को पहचान सके. इसके बाद ही सिमोनाइड्स को लगा कि किसी चीज़ को याद करने का सबसे अच्छा तरीक़ा यही है कि उससे जुड़ी कोई तस्वीर याद रखी जाए.

सिमोनाइड्स के इस क़िस्से के सदियों बाद यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन की एलेनोर मैग्युआयर ने एक तजुर्बा किया. उन्होंने मेमोरी चैंपियनशिप में टॉप टेन पर रहे लोगों के दिमाग़ की पड़ताल की. ये जानने के लिए कि क्या उनके दिमाग़ की बनावट आम लोगों से अलग है.

मेमोरी

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तमाम टेस्ट के बावजूद, ऐसा कोई फ़र्क़ पकड़ में नहीं आया. बस एक ही बात समझ में आई कि तेज़ याददाश्त वाले लोग अपने 'माइंड पैलेस' वाले हिस्से का ज़्यादा इस्तेमाल कर रहे थे.

वैसे हर तेज़ याददाश्त वाले इंसान का याद करने का नुस्खा अलग होता है. ख़ास तौर से नंबर याद करने के लिए लोग अलग अलग तरीक़े अपनाते हैं. जैसे एलेक्स जुड़वां नंबरों को याद करने के लिए उनको दो शब्दों से जोड़कर उनकी तस्वीर अपने ज़ेहन में बनाते हैं.

एलेक्स ने अमरीकी मेमोरी चैंपियनशिप का खिताब, योनास वॉन एसेन से जीता था. एलेक्स की ही तरह एसेन भी अलग तरीक़े से नंबर और दूसरी बातें याद करते हैं. एलेक्स की तरह उन्हें भी बड़ी उम्र में जाकर याददाश्त तेज़ करने का ख़याल आया. ताकि वह इम्तिहान में अच्छे नंबर ला सकें.

एसेन, स्वीडन की ग्रोथेनबर्ग यूनिवर्सिटी में पढ़ते हैं. उन्होंने बताया कि शुरू में उन्हें भी अपनी याददाश्त कमज़ोर लगती थी. मगर कुछ दिनों की मेहनत के बाद गाड़ी तेज़ी से चल निकली. वो पहले स्वीडन के मेमोरी चैंपियन बने. फिर उन्होंने 2012 और 2013 में वर्ल्ड मेमोरी चैंपियनशिप जीत ली.

वैसे हर इंसान के दिमाग़ में ‘मेमोरी पैलेस’ की अलग-अलग तस्वीर होती है. किसी को होटल याद रहते हैं तो किसी को घर. किसी को अपने रोज़ के रास्ते की तस्वीरें याद रहती हैं तो किसी के दिमाग़ में छुट्टियों की यादें. कोई ट्रेन का सफर याद रखता है तो कोई पार्क में बिताए कुछ पल.

याददाश्त

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एलेक्स कहते हैं कि अगर आप इत्मीनान से बैठकर सोचेंगे तो आपको बहुत सी बातें याद आ जाएंगी. आपको लगेगा कि आप उनके बारे में अच्छे से जानते हैं.

याददाश्त के दोनों ही वर्ल्ड चैंपियन अपने अलग-अलग ‘माइंड पैलेस’ की मदद से कार्ड, तस्वीर या फिर जुड़वां नंबर याद करते हैं. दोनों की ये तरक़ीब हमेशा काम आती है. कभी भी इसमें धोखा नहीं होता.

एलेक्स और एसेन दोनों ही कहते हैं कि किसी की याददाश्त तेज़ होने में कोई क़ुदरत का करिश्मा नहीं होता. ये सिर्फ़ एक भ्रम है. कोई भी प्रैक्टिस से ये क़ाबिलियत हासिल कर सकता है. जैसे एलेक्स मलेन ने वर्ल्ड मेमोरी चैंपियनशिप के लिए रोज़ आधे से एक घंटे तक की मेहनत की. इसी तरह वॉन एसेन ने भी रोज़ाना टुकड़ों में तैयारी की.

फिलहाल तो एसेन ने मेमोरी चैंपियनशिप में हिस्सा लेने से ब्रेक ले रखा है. मगर अगले साल वह पाई चार्ट याद करके वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ने का इरादा रखते हैं.

वहीं तमाम मेमोरी चैंपियनशिप जीतकर भी एलेक्स इससे अपना घर नहीं चला सकते. वह कहते हैं कि इनाम और शोहरत तो मिलती है. मगर अच्छी याददाश्त से घर का ख़र्च नहीं चल सकता. तो वो अपनी याददाश्त से पढ़ाई में कामयाब होने की कोशिश कर रहे हैं.

याददाश्त

वह इस काम में दूसरों की भी मदद कर रहे हैं. क्योंकि उन्हें इसमें मज़ा आता है. इसका वो ज़िंदगी के दूसरे मामलों में फ़ायदा उठाना चाहते हैं.

वॉन एसेन भी एलेक्स की बात से इत्तेफ़ाक़ रखते हैं. वो कहते हैं कि जैसे आप साइकिल या बाइक चलाना सीखते हैं. ठीक वैसा ही है याददाश्त बेहतर करना.

इसके लिए आपको वर्ल्ड चैंपियन बनने की ज़रूरत नहीं. थोड़ी प्रैक्टिस से आप याददाश्त बेहतर करके, इसका फ़ायदा ज़िंदगी की तमाम चुनौतियों से निपटने में ले सकते हैं.

(अंग्रेज़ी में मूल लेख <link type="page"><caption> यहां पढ़ें</caption><url href="http://www.bbc.com/future/story/20160411-the-man-who-thinks-like-sherlock-holmes" platform="highweb"/></link>, जो <link type="page"><caption> बीबीसी फ़्यूचर</caption><url href="http://www.bbc.com/future" platform="highweb"/></link> पर उपलब्ध है.)

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