हड्डियां बचाएंगी यान को राख होने से

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- Author, रिचर्ड होलिंगम
- पदनाम, विज्ञान पत्रकार
सूरज के नज़दीक जाने वाले किसी भी यान को राख होने से बचाना ही सबसे बड़ी चुनौती है.
वैज्ञानिक क्रिस ड्रेपर ने जानवरों की हड्डियों का इस्तेमाल करके इस चुनौती का जवाब ढूंढा है.
उन्होंने टाइटेनियम की फॉइल पर जानवरों की हड्डियों से बना एक लेप लगाया है जो सौर यान को जलने से बचाएगा.
यह पत्ती 0.20 मिलीमीटर मोटी है और इसकी सतह पर हड्डियों की काले रंग की परत चढ़ी है.
यह यान 2017 में अंतरिक्ष में भेजा जाएगा जो सूरज की कक्षा में उसके चारों ओर घूमेगा, यह किसी भी तारे के सबसे नज़दीक जाने वाला यान होगा.
यह अंतरिक्ष यान सौर प्रणाली में छोड़े जाने वाले उच्च ऊर्जा वाले कणों का विस्तृत अध्ययन करेगा.
यह न केवल हमें सूरज के बारे में बेहतर जानकारी उपलब्ध कराएगा बल्कि हम यह भी जान पाएंगे कि पृथ्वी पर इसका कैसा असर होता है.
हल्का लेकिन ठोस

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जब इस यान को अंतरिक्ष में छोड़ा जाएगा तो उसका जो हिस्सा सूरज के सामने होगा उसे 550 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान का सामना करना पड़ेगा जबकि यान का जो हिस्सा सूरज के सामने नहीं होगा उसे 200 डिग्री सेल्सियस तक ताप झेलना होगा.
ऐसी भयानक गर्मी में यान के अंदर के सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और यंत्रों को सही सलामत रखने की चुनौती होगी.
ड्रेपर कहते हैं, “सारी चिंता यही थी कि हीटशील्ड बनाने के लिए हम ऐसा कौन सा पदार्थ इस्तेमाल करें जिससे हमारे उपकरण जलें नहीं.”

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हीटशील्ड इतना हल्का तो होना ही चाहिए कि वह रॉकेट को ज़मीन से ऊपर जाने में मदद करे और सूरज की गर्मी को वह अंतरिक्ष में पाँच वर्षों तक झेल सके.
हीटशील्ड की बाहरी सतह पर खुले दरवाजे वाले छिद्र भी होने चाहिए ताकि यान में लगे उपकरण सूरज को देख सकें जिनका अध्ययन उनको करना है.
'हड्डी मामूली चीज़ नहीं'
हीटशील्ड 40 सेंटीमीटर मोटे सैंडविच की तरह है जिसके बीच में 8 से 18 परतें हैं. इसकी बाहरी परत टाइटेनियम से बनी है.
इस धातु का चुनाव इसकी मज़बूती और लचीलेपन के लिए किया गया है.
सबसे बड़ी बात ये है कि यह डेढ़ हज़ार डिग्री तक की गर्मी झेल सकता है.

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ड्रेपर कहते हैं, “हम इसे उच्च तापक्रम पर गरम करते हैं और फिर इसको द्रव नाइट्रोजन में गिरा देते हैं यह देखने के लिए कि इस पर कोई असर होता है कि नहीं."
अभी तक गर्म करने, ठंडा करने और खुरचने जैसे सभी प्रयोग सफल रहे हैं जो यह साबित करता है कि अंतरिक्ष युग में भी पाषाण युग के कुछ जुगाड़ उपयोगी साबित हो सकते हैं.
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