पेड़ से लटकी ज़िंदगी पर सांस में दिक़्क़त नहीं

स्लोथ

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दक्षिण और मध्य अमरीका के वर्षावन के पेड़ों की शाखाओं पर नीचे की ओर लटके रहने वाली, पत्तियां-फल खाने वाली सुस्त स्तनधारी जानवर स्लोथ के बारे में स्वांसी यूनिवर्सिटी की टीम ने एक दिलचस्प जानकारी हासिल की.

स्वांसी विश्वविद्यालय की टीम का कहना है कि सुस्त स्लोथ अपनी 90 फ़ीसदी ज़िंदगी नीचे की तरफ़ लटक कर ही गुज़ारने में सक्षम होती हैं लेकिन इसके बावजूद वे सामान्य तरीक़े से सांस लेना जारी रखती हैं.

इस शोध में पाया गया है कि इन स्तनधारियों की ख़ूबी यह होती है कि वे अपने आंतरिक अंगों को पंजर से चिपकाए रख सकती हैं.

इस चिपकाव की वजह से ही पेट, जिगर, गुर्दे, आंत या मूत्राशय का दबाव झिल्ली पर नहीं बन पाता.

कोस्टा रिका में कराए गए इस शोध को रॉयल सोसायटी ने प्रकाशित किया.

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वैज्ञानिकों का कहना है कि इन मायावी और लुप्तप्राय प्राणियों जो दुनिया की सबसे धीमी रफ़्तार में चलने वाली स्तनधारी हैं, उनके बारे में अभी काफ़ी कुछ जानना बाक़ी है.

फिलहाल उनके प्राकृतिक आहार और रहने की पसंदीदा जगह से जुड़ी बुनियादी जानकारी भी एक रहस्य बनी हुई है.

प्राणीविज्ञान की 24 वर्षीय शोधकर्ता रेबेका क्लिफ़ भी उस शोध पत्र के लेखकों में से एक है जिसे कोस्टा रिका के स्लोथ सैंक्चुअरी में किया गया था.

उनका कहना है, "बेहद धीमी चयापचय दर और कम ऊर्जा आहार की वजह से स्लोथ ऊर्जा की बचत करने में माहिर हैं. उनके पाचन की दर बेहद धीमी है और उनके शरीर का एक-तिहाई वज़न मूत्र व मल में ही हो सकता है. ऐसी स्तनपायी जो लंबे समय तक उलटी लटकी होती हैं उनके पेट के वज़न का दबाव फेफड़ों पर पड़ता है जिससे ऊर्जा के लिहाज से सांस लेना असंभव तो नहीं लेकिन थोड़ा मुश्किल ज़रूर होगा."

"स्लोथ ने पंजर के मुक़ाबले अपने अंगों को स्थिर रख कर इस समस्या का हल कर दिया है."

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जब स्लोथ उल्टे लटके होते हैं तब उनमें आंतरिक स्तर पर कई ऐसे चिपकने वाले अवलंब होते हैं जो पेट और आंत का वज़न सह लेते हैं. हमारा यह अनुमान है कि ये चिपकने वाली चीज़ें एक स्लोथ के ऊर्जा खर्च में 7 से 13 फ़ीसदी तक की कमी कर सकती हैं.

स्लोथ के लिए 7 से 13 फ़ीसदी तक की ऊर्जा बचत बेहद अहम है. वे अपने भोजन के ज़रिये पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न करती हैं ताकि वे जब ज़रूरी हो तब चल सकें.

"अगर ये चिपकाव वाला अवलंब न हो तो स्लोथ के लिए हर सांस के साथ अपना अतिरिक्त वज़न उठाना अगर पूरी तरह असंभव नहीं भी हो तब भी मुश्किल होगा. इसी वजह से इन सरल चिपकाऊ अवलंबों की मौजूदगी ज़रूरी है."

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स्वांसी विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ साइंस के प्रोफेसर और इस शोध पत्र के सह लेखक रोरी विल्सन ने कहा, " स्लोथ जो भी करते हैं वह सामान्य नहीं होता."

"वे बेहद असाधारण स्तनधारी हैं जिनके बारे में मैंने जाना हैं हालांकि हम उनके बारे में अब भी कम ही जानते हैं."

"हमारे लिए यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि हम इन प्राणियों को वनों की कटाई का शिकार होते देखें और हमें यह ज़रा भी अंदाज़ा न हो कि इनकी मदद कैसे की जाए."

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