ज़िंदगियां बदलने वाला 'बायोनिक मैन'

जब नृत्य अध्यापिका एड्रियान हैसल डेविस ने टेड (टेक्नोलॉजी, एंटरटेनमेंट एंड डिज़ाइन) के मंच पर अपना नृत्य पेश किया तो प्रशंसा में लोगों ने खड़े होकर तालियां बजाईं.
हैसल की नृत्य प्रतिभा की वजह से नहीं, बल्कि उनकी उपस्थिति की वजह से उनको यह सराहना मिली. बोस्टन बम विस्फोट के बाद उन्होंने पहली बार सार्वजनिक रूप से किसी मंच पर नृत्य पेश किया.
बोस्टन मैराथन के दौरान हुए दर्दनाक हादसे के बाद वो फिर से नृत्य के सपने देखती थीं. उनका सपना सच होना तब शुरू हुआ जब उनकी मुलाक़ात हग हेर से हुई.
हेर मैसाच्यूसेट्स इंस्टीच्यूट में टेक्नोलॉजी मीडिया लैब से जुड़े हुए बायोमेकैट्रॉनिक्स शोध समूह के मुखिया हैं. उन्होंने वास्तविक अंगों से भी बेहतरीन <link type="page"><caption> कृत्रिम अंग</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/12/121217_brain_controlled_prosthetic_limb_pn.shtml" platform="highweb"/></link> बनाने में अपनी ज़िंदगी के कई वर्ष लगाए हैं.
<link type="page"><caption> कृत्रिम अंगों की अजब दुनिया</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/multimedia/2012/03/120307_prosthetic_limbs_picgllry_pa.shtml" platform="highweb"/></link>
बायोनिक मैन डॉक्टर हेर

एक समय अमरीका के सबसे सफ़ल पर्वतारोहियों में से एक रहे डॉक्टर हेर साल 1982 में माउंट वॉशिंगटन पर चढ़ाई के समय अपना रास्ता भूल गए और अपने साथी के साथ तीन दिन तक भटकते रहे.
हालांकि उन्हें बचा लिया गया लेकिन अत्यधिक ठंड के कारण उन्हें दोनों पैरों से महरूम होना पड़ा जबकि उनके साथी का एक पैर काटना पड़ा.
वैंकुवर में टेड कांफ्रेंस के दौरान वो जिस आत्मविश्वास के साथ मंच पर उतरे, उससे कोई इस बारे में अंदाज़ा नहीं लगा सकता.
वो कहते हैं, ''मुझे कहीं से नहीं लगता कि मेरे शरीर में कोई कमी है. इसे मैं अन्य लोगों और खुद की अक्षमता को खत्म करने की प्रेरणा के रूप में देखता हूं.''
उन्होंने पर्वतारोहण के लिए एक विशेष अंग को विकसित किया और अपने प्रिय खेल में पहले से भी और मज़बूत व बेहतर वापसी की.
धातु, लकड़ी और रबर के बाद वो अब बायोनिक अंग बनाने लगे हैं.
उनकी प्रयोगशाला ने बायोम्स नाम का एक ऐसा कृत्रिम पैर बनाया है जो शरीर की मांसपेशियों पर भरोसा करने की बजाए असली मांसपेशियों की तरह काम करता है.
यह अंग सिंथेटिक त्वचा से जुड़ा होता है, जो असली त्वचा की तरह काम करती है.
अंग को नियंत्रित करने वाले चिप कृत्रिम अंग में लगे रहते हैं.
असली जैसे

इमेज स्रोत, mit
हैसल डेविस के लिए बनाए गए कृत्रिम अंग के लिए एमआईटी की टीम ने नर्तकों को प्रयोगशाला में आमंत्रित किया ताकि जाना जा सके कि नृत्य के समय मांसपेशियां कैसे काम करती हैं.
असल में कृत्रिम अंग बड़ी संख्या में लोगों के जीवन को बदल रहे हैं.
नाइजेल ऑकलैंड का हाथ एक औद्योगिक दुर्घटना का शिकार हो गया, छह महीने के इलाज और दर्द से निजात पाने के लिए अंततः उन्हें इसे कटवाना पड़ा.
जब 2012 में उन्हें टर्मिनेटर आर्म लगाया गया. उस समय बीबायोनिक द्वारा तैयार यह कृत्रिम अंग सबसे आधुनिक था. यह जीवन बदल देने वाला साबित हुआ, क्योंकि इससे वे अपने जूते के फीते भी बांध सकते थे.
वो कहते हैं, ''जब मैं सड़क से नीचे उतरता हूं तो लोग मेरी आंखों में देखते हैं. एक रोबोटिक हाथ उत्सुकता पैदा करता है, लेकिन कोई भी इस पर हंसता नहीं है.''
<link type="page"><caption> क्या दोबारा उग पाएंगे कटे हाथ?</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/03/130310_science_regenerate_limbs_sp.shtml" platform="highweb"/></link>
'एक्सो स्केलेटन'

पिछले साल अमांडा बॉक्सटेल 3डी प्रिंटर से बने कृत्रिम अंगों (एक्सो स्केलेटन) पर चलने वाली पहली महिला बनीं.
वो इस घड़ी का तब से इंतज़ार कर रही थीं जब साल 1992 में स्कीईंग के दौरान हुई एक दुर्घटना में वो लकवे का शिकार हो गई थीं.
एक्सो स्केलेटन (बाहरी कंकाल) बनाने के लिए उन्होंने एक्सोबायोनिक्स और 3डी सिस्टम के साथ काम किया. वो इसे दूसरी त्वचा कहती हैं.
एक मायने में ये लोग बहुत भाग्यशाली हैं. दुनिया भर में दो करोड़ ऐसे लोग हैं जिनके अंग किसी न किसी कारणवश काटने पड़े लेकिन वे कृत्रिम अंगों से महरूम हैं.
डॉक्टर हेर एक प्रस्ताव लेकर अगले हफ़्ते अमरीकी अधिकारियों से मिलने वाले हैं ताकि अमरीका में मरीज़ों को बायोनिक अंग उपलब्ध कराने के लिए उन्हें सहमत किया जा सके.
वो कहते हैं, ''हर व्यक्ति को अधिकार मिलना चाहिए कि वो अक्षमता से रहित जीवन जी सके.''
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