जब ट्विटर पर होगी परीक्षा की तैयारी

भविष्य के क्लासरूम

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    • Author, कौरोलिन राइस
    • पदनाम, तकनीकी संवाददाता, बीबीसी न्यूज़

सोशल मीडिया का असर स्कूलों में पढ़ाई के परंपरागत तरीकों में बदलाव का रास्ता खोल रहा है. अगर आप ब्लैकबोर्ड और चॉक को भूल गए हैं तो व्हाइटबोर्ड और मार्कर को भी भूल जाइये.

किताबें, कापियाँ और अभ्यास पुस्तिकाओं को भी भूला जा सकता है. शायद भविष्य के क्लासरूम में इनकी भी ज़रूरत न पड़े.

भविष्य में बच्चों के विकास के लिए शायद हाथ में टैबलेट लिए बच्चों से भरी कक्षा और सोशल मीडिया पर सक्रिय अध्यापक की ही ज़रूरत हो.

लेकिन नार्वे के एक स्कूल के लिए यह भविष्य की बात नहीं है बल्कि यह उसका वर्तमान है.

सोशल मीडिया पर क्लास

ओस्लो के नज़दीक स्थित सेंडविका हाई स्कूल की अध्यापिका एन माइकलसन को लंदन में आयोजित हो रहे शिक्षा क्षेत्र में दुनिया के सबसे बड़े तकनीकी मेले में आमंत्रित किया गया है. वे तकनीकी समझ रखने वाले अन्य अध्यापकों से अपने अनुभव साझा करेंगी.

माइकलसन कहती हैं, "सोशल मीडिया लोगों से जुड़ने का सबसे सहज तरीका है. हम हर रोज़ ऐसा करते हैं, कभी स्कूल में, कभी काम के बाद और कभी तो काम के दौरान ही."

वो बताती हैं,"ज़्यादातर लोग सोशल मीडिया पर आपस में जुड़ने को बढ़ावा देता है लेकिन स्कूल शायद अंतिम जगह हैं जहां इस पर पाबंदी है."

माइकलसन अपनी क्लास में हर छात्र को ब्लॉग बनाना सिखाती हैं. छात्र अपने काम का प्रदर्शन अपने ब्लॉग पर ही करते हैं. बाकी छात्र उस पर टिप्पणी देते हैं और अध्यापक वहीं नंबर दे देते हैं.

वे कहती हैं, "मैं किताबों का इस्तेमाल नहीं करती क्योंकि इससे आप सीमित हो जाते हैं. मैं अपने ब्लॉग पर ही बच्चों को यह बताती हूँ कि मैं क्या पढ़ाने वाली हूँ."

ऑनलाइन हुई पढ़ाई

कक्षा में पढ़ाई करते बच्चे

माइकलसन का उद्देश्य डिजिटल माहौल बनाने का है जिसमें बच्चे ऑनलाइन रहते हुए शिक्षा हासिल कर सकें और अध्यापक पर निर्भर रहने के बजाए रचनात्मक हो और स्वयं अपने तरीके खोजें.

उनकी क्लास में क्वॉडब्लॉगिंग सॉफ़्टवेयर का भी इस्तेमाल किया जाता है. इसके ज़रिए चार स्कूल आपस में जुड़ सकते हैं और एक दूसरे के ब्लॉग पर टिप्पणियाँ कर सकते हैं.

सेंडविका की 17 वर्षीय चात्रा हैकेन बाकर कहती हैं, "हम दूसरे देश के छात्रों से जुड़ सकते हैं और जानकारियाँ साझा कर सकते हैं."

छात्रों को फ़ेसबुक के एक पेज के ज़रिए अपडेट दिए जाते हैं. यहाँ छात्र फ़ेसबुक पर एक दूसरे के मित्र हुए बिना भी जानकारियाँ साझा कर सकते हैं और एक-दूसरे के काम पर टिप्पणियाँ कर सकते हैं.

ट्विटर का इस्तेमाल दुनिया भर के शिक्षिकों से प्रेरणा लेने के लिए किया जा रहा है.

माइकलसन कहती हैं, "यदि आप अंग्रेजी के शिक्षक हैं और आप ट्विटर का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं तो आप कुछ खो रहे हैं."

वे बताती हैं, "शिक्षक रोचक और नए विचार साझा कर रहे हैं. मेरी फ़ीड में अमरीका, दक्षिण अफ़्रीका, न्यूज़ीलैंड और अन्य देशों के लोग जुड़े हैं. मैं दुनियाभर के लोगों से मदद माँग सकती हूँ."

स्कूल बैग की जगह टैब

भविष्य के स्कूल

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इमेज कैप्शन, भविष्य में स्कूली बच्चे शायद बैग की जगह टैब लेकर आएं.

हैकन कहती हैं, "हम सांस्कृति विभिन्नताओं और जीवन के अलग-अलग रंगों पर बात करते हैं."

सेंडविका स्कूल में प्रत्येक छात्र को टैबलेट उपलब्ध करवाया गया है और पूरे स्कूल कैंपस में वाई फ़ाई सेवा मौजूद है.

वेंड्सवर्थ के बर्न्टवुड स्कूल से आए जिम वॉटसन मानते हैं कि उनके स्कूल के सेंडविका स्कूल जैसी सुविधाएं मिलने में अभी वक़्त लगेगा.

उनके स्कूल में वर्ड वॉल प्रणाली मौजूद है जिसमें बच्चे वॉयरलैस कीबोर्ड के ज़रिए एक बड़ी इंटरएक्टिव स्क्रीन पर पूरी क्लास के सामने एक्सरसाइज़ में हिस्सा ले सकते हैं.

सॉफ़्टवेयर का नया वर्ज़न भी आ रहा है जिसमें बच्चे टैब का इस्तेमाल कर सकते हैं लेकिन बर्न्टवुड स्कूल के पास अभी टैबलेट नहीं हैं. स्कूल ऐसा कार्यक्रम स्थापित करने की कोशिश कर रहा है जिसके तहत बच्चे अपना टैब लेकर स्कूल आ सकेंगे.

वॉटसन मानते हैं कि सेंडविका के स्तर तक पहुँचने के लिए ब्रितानी अध्यापकों के सोशल मीडिया को लेकर नज़रिए को बदलने की ज़रूरत होगी.

वे कहती हैं, "पिछले पंद्रह सालों से शिक्षक छात्रों से फ़ोन से दूर रहने के लिए कहते रहे हैं, अब उन्हें इनका इस्तेमाल करने के लिए कहना होगा."

ट्विटर से परीक्षा की तैयारी

भविष्य के क्लासरूम

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इमेज कैप्शन, शिक्षा के क्षेत्र में सोशल मीडिया बड़े बदलाव ला सकता है.

वॉटसन ने ट्विटर के ज़रिए परीक्षा से एक दिन पहले बच्चों की तैयारी जाँचने के लिए सवाल-जबाव किए थे. छात्र इसे लेकर काफी सकारात्मक थे और वे आगे भी ऐसा करना चाहते हैं.

जेनेट क्रोंपटन छोटे बच्चों को पढ़ाती हैं और मानती हैं कि तकनीक के क्षेत्र में हो रहे विकास प्राइमरी स्कूल के स्तर के शिक्षकों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं.

वे कहती हैं, "ज़रूरी नहीं है कि हर शिक्षक पूरी तरह से अपडेट हो लेकिन नए विचारों के खुला होना ज़रूर है."

एन माइकलसन कहती हैं, "यदि अध्यापक यह नहीं जानेंगे कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल कैसे किया जाए तो कुछ नहीं बदलेगा. यदि छात्र इसके इस्तेमाल के बारे में नहीं जानेंगे तब वे भी इसे लेकर अध्यापकों की तरह ही रूढ़िवादी होंगे."

एक अन्य छात्र हैने वेगर यह बताने के लिए उत्साहित हैं कि उनके लिए सीखने का यह तरीका कितना मायने रखता है.

वे कहती हैं, "इससे जीवन आसान हो जाता है. यदि आप क्लास में नहीं हैं तो सिर्फ़ ऑनलाइन रहकर भी अपडेट रहा जा सकता है. आप कुछ खोते नहीं हैं."

क्या हैकेन और हैने अब सोशल मीडिया के बिना स्कूल की कल्पना कर सकती हैं?

इस सवाल पर दोनों ही हंसती हैं. सीधा सा जबाव है. सोशल मीडिया ही उनका स्कूल है.

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