स्वीडनः नौ महिलाओं का गर्भाशय प्रतिरोपण

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स्वीडन में एक आधुनिक चिकित्सकीय परीक्षण में नौ महिलाओं ने गर्भाशय का प्रतिरोपण कराया है. इन महिलाओं में उनकी जीवित रिश्तेदारों के गर्भ प्रतिरोपित किए गए हैं.
यूनिवर्सिटी ऑफ़ गोथेनबर्ग के डॉक्टर मैट्स ब्रैनस्ट्रॉम, प्रजनन क्षमता विकसित करने वाले इस परीक्षण का नेतृत्व कर रहे हैं. उन्होंने उम्मीद जताई है कि इस तकनीक की मदद से कई महिलाएं माँ बन सकेंगी. यह इस दिशा में पहला बड़ा प्रयोग माना जा रहा है.
मैट्स ब्रैनस्ट्रॉम के मुताबिक, अकेले ब्रिटेन में कम से कम 15,000 महिलाओं को इस तकनीक का लाभ मिलेगा. इस तकनीक से उन महिलाओं को मदद मिलेगी जिनका जन्म गर्भाशय के बिना हुआ हो या फिर जिनके गर्भ में भ्रूण का विकसित होना संभव नहीं है.
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ब्रैनस्ट्रॉम ने प्रशिक्षण के लिए 10 महिलाओं का चयन किया था. चिकित्सकीय वजहों के चलते इनमें से एक महिला पर प्रयोग नहीं हो पाया, लेकिन बाक़ी नौ महिलाओं में नया गर्भाशय लगाया गया.
नए तरह का प्रयोग
ये वैसी महिलाएं हैं जिनका जन्म गर्भाशय के बिना हुआ था या फिर कैंसर की वजह से उनके गर्भाशय को हटाना पड़ा था.
इनमें से ज्यादातर महिलाओं की उम्र 30 साल के आसपास है.
ब्रिटेन और दुनिया के दूसरे देशों में भी ऐसे प्रयोग किए जाने की दिशा में काम चल रहा है, लेकिन स्वीडन में हुआ प्रयोग सबसे अत्याधुनिक है.
हालांकि इससे पहले तुर्की और सऊदी अरब में गर्भाशय को प्रतिरोपित किए जाने की कोशिशें हो चुकी है. लेकिन दोनों देशों में की गई कोशिशों में बच्चे का जन्म संभव नहीं हो पाया था.
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डॉक्टर मैट्स ब्रैनस्ट्रॉम ने समाचार एजेंसी एपी को बताया, "यह नई तरह की सर्जरी है. इसके बारे में जानने के लिए कोई संदर्भ उपलब्ध नहीं है."
ब्रैनस्ट्रॉम और उनके सहयोगी जल्द ही इससे संबंधित वैज्ञानिक रिपोर्ट जारी करने वाले हैं.
हालांकि इस ऑपरेशन के तहत गर्भाशय को महिलाओं की फ़ैलोपियन ट्यूब से नहीं जोड़ा गया है, इसका मतलब यह है कि ये महिलाएं प्राकृतिक रूप से गर्भवती नहीं हो सकती लेकिन आईवीएफ़ तकनीक (कृत्रिम गर्भाधान) की मदद से वे गर्भवती हो सकती हैं.
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