गूगल ने माइक्रोसॉफ़्ट पर किया क्रोमबुक से वार

गूगल क्रोमबुक को एचपी ने तैयार किया है.
    • Author, रॉरी सेलन-जोंस
    • पदनाम, बीबीसी संवाददाता

पर्सनल कंप्यूटर्स की बिक्री में नाटकीय गिरावट जारी है लेकिन ये बाज़ार में एक नए खिलाड़ी के लिए अवसर हो सकता है. गूगल ने इस हफ़्ते एक और क्रोमबुक लैपटॉप लॉन्च कर दिया है जिसे एचपी ने बनाया है.

ये लैपटॉप सिकुड़ते बाजार के बड़े हिस्से पर कब्ज़ा कर सकता है.

इससे माइक्रोसॉफ़्ट ज़्यादा ख़ुश नहीं होगी जो अपने मज़बूत पक्ष पर्सनल कंप्यूटर से बाज़ार के दूसरे हिस्सों में विस्तार के अभियान पर आगे बढ़ती नहीं दिख रही.

गूगल क्रोमबुक में जटिल ऐप नहीं हैं, ये डिवाइस वेब सर्फिंग, ईमेल और डॉक्यूमेंट पर काम करने में कहीं बेहतर है.

लेकिन इसके दाम हर उस शख़्स को आकर्षित कर सकते हैं, जो ऑनलाइन होने का आसान तरीका खोज रहा हो और ऐसे टेबलेट ख़रीदने के ख़र्च से बचना चाहता हो जिसका टचस्क्रीन इंटरफेस शायद उसे मुफ़ीद न लगे.

पीसी की बिक्री में गिरावट

अमरीकन इंफार्मेशन टैक्नॉलॉजी रिसर्च कंपनी 'गार्टनर' के हालिया आंकड़ों के अनुसार, एक वर्ष पहले की तुलना में पिछली तिमाही में पर्सनल कंप्यूटर की बिक्री में 8.6 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. रुझान क्रोमबुक जैसे लैपटॉप से दूर और टेबलेट की ओर जाता लग रहा है.

साल 2008 के बाद से जुलाई से सितंबर के बीच पर्सनल कंप्यूटर की बिक्री न्यूनतम स्तर पर है.

इस सब के बावजूद क्रोमबुक आगे बढ़ता लगता है. गार्टनर का अनुमान है कि इस साल 20 लाख क्रोमबुक लैपटॉप की बिक्री होगी. वहीं साल 2014 में 50 लाख से ज़्यादा और साल 2016 तक बिक्री 1.20 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है.

तब भी क्रोम आपरेटिंग सिस्टम का हिस्सा उस पर्सनल कंप्यूटर मार्केट में तीन फ़ीसदी से कुछ ज़्यादा पर होगा, जहां मार्जिन में बढोतरी के कम होने और मुनाफा मुश्किल होते जाने के आसार हैं.

हालांकि गूगल के लिए ये वास्तव में कोई मुद्दा नहीं है. हर बार जो भी क्रोमबुक का इस्तेमाल करेंगे, उन्हें गूगल अकाउंट के ज़रिए साइन-इन करना होगा.

गूगल
इमेज कैप्शन, गूगल क्रोमबुक को लेकर सैमसंग और एसर के साथ काम कर चुकी है.

ऐसे में वह निश्चित रूप से गूगल पर विज्ञापन देखने वालों का भी हिस्सा बन जाएंगे. मशीन बेचने की जगह कंपनी इस तरह से पैसा बनाएगी. इसकी पहुंच तो पर्सनल कंप्यूटर, मोबाइल फ़ोन और टेबलेट तक बढ़ ही रही है.

हां, निर्माताओं के साथ गूगल के रिश्तों की भी अहमियत बढ़ रही है. गूगल क्रोमबुक को लेकर सैमसंग और एसर के साथ पहले ही काम कर चुकी है और अब एचपी के साथ काम कर रही है. एचपी पहला स्थान लेनोवो के हाथों गंवाने के बाद क्रोम ऑपरेटिंग सिस्टम पर अपनी पूरी ताकत लगा रही है.

क्रोम के साथ एचपी

इसके उलट माइक्रोसॉफ़्ट अकेले ही गूगल के एंड्रॉयड के प्रभुत्व वाले मोबाइल बाज़ार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रही है.

माइक्रोसॉफ़्ट का विंडोज़ आरटी आपरेटिंग सिस्टम जो यूज़र को जाने-पहचाने विंडोज़ डेस्कटॉप के साथ टचस्क्रीन टैबलेट का फ़ायदा देने के लिए लॉन्च किया गया था, वो बड़े निर्माताओं को रोमांचित नहीं कर सका.

अभी माइक्रोसॉफ़्ट का सरफ़ेस आरटी इकलौता टैबलेट है जो इस ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है. सैमसंग, डेल और लेनोवो जैसी कंपनियां एंड्रॉयड या विंडोज़ 8 के लिए इस ऑपरेटिंग सिस्टम को छोड़ चुकी हैं.

हालांकि माइक्रोसॉफ़्ट के गूगल के मुकाबले निर्माताओं के साथ लंबे और नज़दीकी रिश्ते हैं और गूगल विज्ञापन से जितना मुनाफ़ा नहीं कमाती उससे कहीं ज़्यादा माइक्रोसॉफ़्ट विंडोज़ और ऑफ़िस की बिक्री से कमाती है.

लेकिन माइक्रोसॉफ्ट के एग्जीक्यूटिव अगर नए एचपी क्रोमबुक को हाथ में लेंगे तो थोड़ा असहज महसूस कर सकते हैं, जहां ये संदेश लिखा है, ''मेड विद गूगल'' यानी गूगल के साथ मिलकर बनाया हुआ.

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