डिजिटल इंडियंस: आख़िर कहाँ तक पहुँची है बात

सबीर भाटिया
इमेज कैप्शन, सबीर भाटिया ने 1996 में हॉटमेल शुरू किया था
    • Author, रमा शर्मा
    • पदनाम, डिजिटल एडिटर, बीबीसी दिल्ली

बीबीसी की विशेष श्रृंखला डिजिटल इंडियंस में अब हम आधा सफ़र तय कर चुके हैं.

अब तक हमने आपको ऑनलाइन दुनिया में भारत के नए सिरे से उभरने की कहानी बताई है और इनोवेशन के ज़रिए पहचान बनाने वाले तीन अलग-अलग लोगों से मिलवाया है.

अपने पहले गूगल हैंगआउट में हमने भारत में सोशल मीडिया की स्थिति पर चर्चा की. हमने लोगों से पूछा कि क्या ये ऐसे देश में वास्तव में कुछ बदलाव ला सकता है जहाँ इंटरनेट तक महज़ 10 फ़ीसदी लोगों की ही पहुँच है.

हैंगआउट की ख़ास बातें हमने आप तक बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक और गूगल प्लस पेज पर पहुँचाई थीं.

इस सीज़न की शुरुआत में हमने आपसे कहा था कि आप अपने 'डिजिटल इंडियंस' के बारे में हमें सुझाव दीजिए.

वे कुछ नया बनाने की कोशिश कर रहे महिला या पुरुष हो सकते हैं, कोई उद्यमी हो सकता है या फिर कोई विशेषज्ञ जिसकी डिजिटल गतिविधि पर आप नज़र रखते हैं.

अब तक आपकी ओर से जो सुझाव आए हैं उनमें से कुछ लोकप्रिय सुझाव ये हैं:-

सबीर भाटिया एक भारतीय मूल के अमरीकी उद्यमी हैं जिन्होंने साल 1996 में हॉटमेल शुरू किया था. हॉटमेल ने दुनिया को सबसे शुरुआती दिनों में वेबमेल दिया था. बाद में माइक्रोसॉफ़्ट ने उसे ख़रीद लिया और आज भी वो दुनिया में ई-मेल के मामले में दूसरे नंबर पर है. एमआईटी ने भाटिया को टेक्नोलॉजी की दुनिया में प्रभावशाली 100 युवा इनोवेटर्स में एक माना था.

सैम पित्रोदा सार्वजनिक सूचना तंत्र के मामले में प्रधानमंत्री के सलाहकार हैं. वे नेशनल इनोवेशन काउंसिल यानी राष्ट्रीय नवरचना परिषद के प्रमुख भी हैं. 1980 के शुरुआती दिनों में पित्रोदा प्रधानमंत्री राजीव गाँधी के टेक्नोलॉजी सलाहकार थे और भारत में सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति की जो पहली लहर चली थी, उसका श्रेय उन्हें दिया जाता है.

राजू नारिसेट्टी
इमेज कैप्शन, राजू नारिसेट्टी ने न्यूज़रूम के कामकाज का तरीक़ा बदला

राजू नारिसेट्टी न्यूज़ कॉर्प के वरिष्ठ उपाध्यक्ष और स्ट्रैटेजी उप प्रमुख हैं. वे वॉल स्ट्रीट जर्नल डॉटकॉम पर उपलब्ध डिजिटल सामग्री के लिए ज़िम्मेदार हैं.

इससे पहले वे वॉशिंगटन पोस्ट के मैनेजिंग एडिटर रह चुके हैं जहाँ उन्होंने पूरे न्यूज़रूम के काम-काज का तरीक़ा बदल दिया. वह भारतीय अख़बार मिंट के संस्थापक संपादक भी थे.

सौगत मित्रा झोपड़-पट्टियों में 'होल इन द वॉल' यानी दीवार में छेद जैसे प्रयोग के लिए जाने जाते हैं. दीवारों में उन्होंने कंप्यूटर लगवा दिए. उन्हें इस साल का टीईडी पुरस्कार भी मिला. इसके तहत मिली दस लाख डॉलर की राशि उनकी ऐसे स्कूल की योजना को काफ़ी मदद करेगी, जहाँ बच्चे ऑनलाइन पढ़ सकें.

इस तरह के नामों की हम ट्विटर और फ़ेसबुक पर लिस्ट बनाएँगे और साथ ही गूगल सर्कल भी होगा जिसे महीने के आख़िर में हम आप सबके साथ साझा करेंगे.

सभी नाम #BBCDI की सूची का हिस्सा बनेंगे. मगर हमें अब भी कुछ उभरते हुए सितारों की ज़रूरत है. इस सूची में जो नाम आए हैं उनमें महिलाएँ अभी काफ़ी कम हैं इसलिए कृपया हमें इनोवेशन जगत में लगी महिलाओं के बारे में और बताइए.

इनमें से कुछ नाम इस सीज़न के अंत में 25 सितंबर को होने वाले 'इनोवेशन हैंगआउट' का हिस्सा बनेंगे.

(रमा शर्मा, दिल्ली में बीबीसी की डिजिटल एडिटर हैं और डिजिटल इंडियंस शृंखला की प्रोजेक्ट एडिटर भी. आप उनसे ट्विटर पर जुड़ सकते हैं @ramaamultimedia पर)

बताइए कौन हैं वे डिजिटल इंडियंस जो आपके अनुसार दिशा दे रहे हैं भारत के भविष्य को? अपने विचार और अनुभव हमसे साझा करने के लिए नीचे दिए गए कमेंट्स बॉक्स का प्रयोग कीजिए.