क्या मछलियों को सिखाई जा सकती है गिनती?

क्या केवल इंसान ही गिनती कर सकता है या दूसरे प्राणी भी ऐसा करने में सक्षम हैं? वैज्ञानिकों की मानें तो नवजात <link type="page"><caption> मछलियां </caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/10/121001_fish_research_ml.shtml" platform="highweb"/></link>न केवल गिनती कर सकती हैं बल्कि वे उन्हें बेहतर ढंग से गिनती करना सिखाया जा सकता है.
इटली में पाडोवा विश्वविद्यालय के मनोवैज्ञानिकों की एक टीम की ये खोज भले ही पहली नज़र में बेतुकी लगती हो लेकिन इससे ये दिलचस्प सवाल पैदा होता है कि हम लोगों, जानवरों या चीजों को देखकर कैसे उनकी संख्या का अनुमान लगाते हैं.
माना जाता है कि मनुष्यों में गिनती करने की क्षमता जन्मजात होती है. लेकिन अनुसंधानों से ये बात साबित हो चुकी है कि इंसान के अलावा कुछ दूसरे प्राणी भी हैं जो कम और ज्यादा के भेद को समझते हैं यानि उनके लिए दस चीजें सौ के बराबर नहीं हैं.
जंगल में इसका बड़ा महत्व है. उदाहरण के लिए जानवरों को ये समझने की जरूरत होती है कि भोजन के दो स्रोतों में से कौन बड़ा है या फिर साथियों का कौन सा समूह बड़ा है ताकि उसमें शामिल होकर शिकार बनने की संभावना कम की जा सके.
गिनती
लेकिन दो समूहों के छोटा बड़ा होने में भेद करना और हर समूह के सदस्यों की गिनती करना, दोनों में अंतर है. एक धारणा ये है कि प्राणी छोटे समूहों के लिए गिनती का इस्तेमाल करते हैं और बड़े समूहों के लिए आनुपातिक प्रणाली अपनाते हैं.
इसी आधार पर कुछ मछलियां चार की संख्या तक तो गिनती करती हैं लेकिन उसके आगे आनुपातिक व्यवस्था पर आ जाती हैं. मछलियां भी बच्चों की तरह उम्र बढ़ने के साथ-साथ गिनती करना सीखती हैं.
नवजात मछलियां एक या दो और यहां तक कि तीन या चार में भेद कर सकती हैं. लेकिन उनमें चार और आठ में भेद करने की क्षमता 20 से 40 दिन के भीतर विकसित होती है.
इस तरह नवजात मछलियों में चार तक की गिनती करने की क्षमता जन्मजात होती है लेकिन आनुपातिक प्रणाली वे उम्र बढ़ने से साथ सीखती हैं.
प्रयोग
लेकिन सवाल उठता है कि मछलियों को <link type="page"><caption> गणित</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/news/2012/03/120302_britain_maths_da.shtml" platform="highweb"/></link> कैसे सिखाया जाए? इसका सीधा उत्तर ये है कि इनाम के तौर पर उन्हें खाने की पेशकश की जाए.
अनुसंधानकर्ताओं ने मछलियों को एक आयताकार टैंक में रखा और हर छोर पर बिंदु बनाए. जिस छोर पर सबसे ज्यादा बिंदु बनाए गए वहां भोजन रखा गया. दो नंबरों में भेद करने की मछलियों की क्षमता को इस बात से आंका जा सकता है कि वे हर छोर पर कितना समय गुजारती हैं.
नवजात मछलियां सात और 14 बिंदुओं में भेद नहीं कर सकीं लेकिन 20 बार अभ्यास के बाद वे इसमें माहिर हो गईं. इससे इस बात की भी संभावना प्रबल हो जाती हैं कि मनुष्य के बच्चों में भी ऐसी छिपी प्रतिभा हो सकती है.












