प्रोस्टेट कैंसरः 40 के बाद टेस्ट ज़रूर करा लें

क्या आपकी उम्र 40 से ज़्यादा है? अगर हां तो आप अपना टेस्ट ज़रुर करवा लें. कहीं ऐसा न हो कि प्रोस्टेट <link type="page"><caption> कैंसर</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/01/130117_breast_cancer_medicine_va.shtml" platform="highweb"/></link> आपको भी अपनी चपेट में ले ले.
शोधकर्ताओं के अनुसार 40 साल से ज़्यादा की उम्र वाले व्यक्ति को प्रोस्टेट कैंसर की आशंकाओं का पता लगाने के लिए जांच करवानी चाहिए.
हालांकि इस विचार को विवादास्पद बताया जा रहा है. मतलब प्रोस्टेट विशिष्ट ऐंटीजेन (पीएसए) जांच ग़ैर भरोसेमंद भी साबित हो सकती है.
इस जांच के परिणाम केवल दिखने में पॉजिटिव हो सकते है.
फिर भी कुछ शोधकर्ता मानते हैं कि यदि 45 से 49 साल के उम्र के बीच के पुरुषों का टेस्ट किया जाए तो इससे प्रोस्टेट कैंसर से होने वाली लगभग <link type="page"><caption> आधी मौतों</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2012/12/121226_bowel_cancer_sdp.shtml" platform="highweb"/></link> पर रोक लग सकती है.
21 हज़ार से भी ज़्यादा पुरुषों की जांच करने के बाद स्वीडन स्थित शोधकर्ताओं का एक दल इस नतीजे पर पहुंचा है.
पीएसए जांच
ब्रिटेन में प्रोस्टेट कैंसर का पता लगाने का कोई नियमित तरीक़ा नहीं है.
हां, 50 साल से ज़्यादा के पुरुष अगर चाहें तो राष्ट्रीय स्वास्थ्य योजना यानी एनएचएस में मुफ़्त पीएसए टेस्ट के लिए अनुरोध कर सकते हैं.
यूरोप में हाल ही में की गई प्रोस्टेट कैंसर की स्क्रीनिंग टेस्ट 'ईआरएसपीसी' बताती है कि जांच की मदद से प्रोस्टेट कैंसर से होने वाली मौतों में 20 फ़ीसदी की कमी आई है. यह जांच ‘इलाज पर ज़रूरत से ज़्यादा ध्यान’ से जुड़ा हुआ है.
मतलब यह कि यदि एक <link type="page"><caption> ज़िंदगी</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2013/02/130218_long_life_excercise_adg.shtml" platform="highweb"/></link> बचानी है तो प्रोस्टेट कैंसर के 48 अतिरिक्त मरीज़ों का इलाज पहले करना होगा.
साल 2010 में तो इंग्लैंड की जांच समिति ने तय किया था कि जांच की शुरुआत करने की कोई ज़रूरत नहीं.
मगर स्वीडन की लुंद यूनिवर्सिटी तथा अमरीका के मेमोरियल स्लोअन कीटरिंग कैंसर सेंटर के प्रोफ़ेसर हैंस लिलिया और उनके साथी प्रोफ़ेसरों का कहना है, "40 साल से ज़्यादा के पुरुषों के लिए पीएसए का नियमित टेस्ट करवाना ज़रूरी है."
प्रोस्टेट कैंसर का ख़तरा

अपने इस तर्क को दमदार बनाने के लिए उन्होंने 1974 और 1984 के बीच किए गए एक अध्ययन का उदाहरण दिया है.
इस अध्ययन में 27 और 52 साल के क़रीब 21,277 स्वीडेन नागरिक शामिल थें. शोधकर्ताओं ने इनके ख़ून के नमूनों के आधार पर पीएसए टेस्ट किया था.
इस जांच के परिणाम पर नज़र रखते हुए पीएसए के ज़रिए इन शोधकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की थी कि इन लोगों की बीमारी का मेडिकल नाम क्या दिया जाए.
इन शोधकर्ताओं ने यह जानने की भी कोशिश की थी कि जिनका पीएसए टेस्ट पॉजिटीव था, उन्हें बाद में प्रोस्टेट कैंसर हुआ या नहीं.
और इस तरह यह साबित हुआ कि जिनका पीएसए ज़्यादा था उनमें प्रोस्टेट कैंसर का ख़तरा ज़्यादा पाया गया.
अब शोधकर्ताओं ने यह पता लगाने की कोशिश की है कि इस जांच के लिए कौन सी उम्र सबसे सही होगी.
जानलेवा
जब 45 साल से कम उम्र के व्यक्ति की जांच की गई तो पाया गया कि उनमें घातक कैंसर विकसित होने का ख़तरा कम था.
और जब 50 साल के उपर के लोगों की जांच की गई तो उनमें कैंसर का ख़तरा सबसे ज़्यादा पाया गया. 45 से 49 साल के बीच के पुरुषों की जांच में पाया गया कि क़रीब आधे (44 फीसदी) मामले में कैंसर जानलेवा बन चुका था.
जांच में शामिल 1,369 पुरुषों को प्रोस्टेट कैंसर था, 241 में यह रोग पूरी तरह फैल चुका था और 162 ऐसे थे जिनकी इस कैंसर से <link type="page"><caption> मौत</caption><url href="http://www.bbc.co.uk/hindi/science/2012/09/120924_cancer_death_fma.shtml" platform="highweb"/></link> हो चुकी थी.
इन सबका यही निष्कर्ष निकाला गया कि सभी को 45 से 50 के बीच अपना पीएसए टेस्ट ज़रूर करवा लेना चाहिए.
इसके अलावा जिनके टेस्ट में पीएसए का स्तर ज़्यादा हो वो जांच के लिए जल्दी जल्दी आएं और जिनका स्तर सामान्य हो वे 50 साल की उम्र पूरी होने के बाद अपना अगला पीएसए टेस्ट करवाएं.












