क्या है फ़ेसबुक का भविष्य?

पिछले कुछ दिनों से मैंने एक बात नोटिस की है. अपने फ़ोन पर जब भी फ़ेसबुक खोलता हूं तो किसी रेस्तरां का ऐप बार-बार न्यूज़ फ़ीड में आ जाता है.
मैंने न तो इस ऐप को लाइक किया है और न ही कभी किसी ऐसे पन्ने पर क्लिक किया है फिर भी पता नहीं क्यों ये ज़ोमाटो.कॉम बार बार न्यूज़ फ़ीड में आता है.
वैसे कमाल ये है कि डेस्कटॉप पर ऐसा कुछ नहीं होता. आपके साथ भी अगर ऐसा हो रहा है तो मैं जवाब खोज लाया हूं आपके लिए.
फ़ेसबुक की मुख्य कार्यकारी अधिकारी सैली सैंडबर्ग ने पिछले दिनों लंदन में संवाददाताओं से बातचीत में बताया कि कंपनी के लिए सबसे महत्वपूर्ण दो चीज़ों में एक मोबाइल और दूसरा विज्ञापन है.
मोबाइल में भी फ़ेसबुक का अधिक ध्यान एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म पर है. जब बीबीसी के टेक्नोलॉजी संवाददाता रोरी जोन्स ने सैली से पूछा कि क्या आईफ़ोन को दिक्कत होने वाली है तो सैली का कहना था, ‘‘हम ऐपल के साथ मिलकर काम कर रहे हैं लेकिन फ़ेसबुक का असली मज़ा फ़ेसबुक होम पर ही आएगा जो एंड्रॉयड से जुड़ा हुआ है.’’
सैली ने ये भी साफ किया कि फ़ेसबुक पर विज्ञापन भी ज़रूरी हैं और ये टेलीविज़न जितना महत्वपूर्ण नहीं तो उससे कम भी नहीं है.
ज़ाहिर है अब आप समझ गए होंगे कि आपके मोबाइल पर फ़ेसबुक देखने पर क्यों विज्ञापन आपके न्यूज़फ़ीड में आ जाता है.
लेकिन फ़ेसबुक के लिए भी विज्ञापन और मोबाइल क्यों है इतना ज़रुरी?
ज़रा इन आंकड़ों को देखिए.
पूरी दुनिया में फ़ेसबुक का इस्तेमाल करने वालों की संख्या एक अरब से अधिक है. सिर्फ भारत में ही 6.38 करोड़ लोग फ़ेसबुक पर हैं.
इसका एक बड़ा हिस्सा मोबाइल और स्मार्टफ़ोन के ज़रिए सोशल मीडिया या फ़ेसबुक का इस्तेमाल करता है. चौबीस घंटों में लोग जितना समय टीवी पर नहीं देते उतना समय फ़ोन पर बिताते हैं.
नील्सन के एक सर्वे में लोग दिन में ढाई घंटा समय अपने स्मार्टफ़ोन को देते हैं. जिसमें वो ऐप डाउनलोड करते हैं, संगीत सुनते हैं ब्राउज़िंग करते हैं. अब मोबाइल से बातचीत और मैसेज बहुत कम होता है.
भारत में मोबाइल के ज़रिए इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले लोगों की संख्या है करीब चार करोड़.
अब अगर स्मार्टफ़ोन की बात करें और फ़ेसबुक के एंड्रॉ़यड संबंधी बयान को ध्यान में रखें तो आप पाएंगे कि आखिर फ़ेसबुक किस दिशा में जा रहा है.
इंटरनेशनल डाटा कॉरपोरेशन यानी आईटीसी जो दुनिया भर में मोबाइल के आंकड़े जुटाता है- उसके अनुसार भारत में 2013 में स्मार्टफ़ोन बाज़ार में 38.8 प्रतिशत पर सैमसंग का कब्ज़ा है जबकि 15.5 प्रतिशत पर ऐपल का. नोकिया तीसरे नंबर पर 7.7 प्रतिशत लोगों के पास है.
सैमसंग ज़ाहिर है कि एंड्रॉयड प्लेटफॉर्म का प्रयोग करता है और फ़ेसबुक इसी वर्ग पर अपनी नज़रें जमा रहा है.
यानी इन आकड़ों से ये समझा जा सकता है कि फ़ेसबुक मूल रुप से एंड्रॉयड फ़ोन के बढ़ते बाज़ार के साथ अपनी पैठ बनाना चाह रहा है और अगर ऐसा दिन आए कि जब डेस्कटॉप पर फ़ेसबुक न दिखे तो घबराइएगा नहीं.
फ़ेसबुक मोबाइल पर उपलब्ध होगा और वो भी बेहतर फॉर्मेट के साथ.
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