आवाजों से महिलाएं ज्यादा 'परेशान' होती हैं

कुछ आवाजों से महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ज्यादा परेशान होती हैं
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ब्रिटेन के एक घरेलू रेडियो स्टेशन 'रेडियो फोर' के एक अध्ययन से पता चला है कि ब्लैकबोर्ड पर नाखून रगड़े जाने की आवाज़ से पुरुषों के मुकाबले महिलाएँ ज्यादा परेशान हो जाती हैं.

इज्ज़ी थॉमलिन्सन ने 14,000 से ज्यादा लोगों पर अध्ययन कर ये जानने की कोशिश की है कि लोग आवाज़ों पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं.

शोध से पता चला है कि बुजुर्गों की तुलना में बच्चे आवाज़ों से ज्यादा परेशान होते हैं जबकि 19 से 29 साल के युवा वयस्क इन पर कोई खास ध्यान नहीं देते.

दरअसल रेडियो फोर ने शौकिया वैज्ञानिकों की खोज के लिए 'क्या आप वैज्ञानिक बनना चाहते हैं' नाम से एक प्रतियोगिता आयोजित की है.

थॉमलिन्सन उन चार शौकिया वैज्ञानिकों में से हैं जिन्हें प्रतियोगिता के फाइनल के लिए चुना गया है और इन्हीं में से सबसे अच्छे शौकिया वैज्ञानिक का चुनाव किया जाना है.

आवाज के प्रभाव पर शोध का विचार थॉमलिन्सन के मन में उस समय आया जब उनकी मां ने उनकी प्लेट पर खाने वाले कांटे से खरोंचा और फिर परेशान हो गईं.

वो बताती हैं, ''मैंने महसूस किया कि मेरी मां को कुछ आवाज़ें एकदम नागवार लगती हैं.वो भयभीत हो जाती हैं जबकि कुछ लोग उन्हीं आवाज़ों से कतई नहीं डरते. इसलिए मैं ये जानना चाहती थी कि लोगों की प्रतिक्रिया में ये अंतर क्यों है.''

उसके बाद थॉमलिन्सन ने रेडियो फोर की पर अपना विचार रखा और एक हजार से ज्यादा प्रविष्टियों में से उन्हें चुन लिया गया.

तीन अन्य फाइनल प्रतियोगियों के साथ उन्होंने इस प्रश्न को एक वैज्ञानिक प्रयोग में बदल दिया और इसके लिए एक पेशेवर सलाहकार की मदद भी ली.

वजह की खोज

जनवरी महीने से थॉमलिन्सन श्रवण इंजीनियर प्रोफेसर ट्रेवर कॉक्स के साथ एक ऑनलाइन प्रयोग की दिशा में काम कर रही हैं ताकि ये पता लगाया जा सके कि लोग खरोंचने की आवाजों पर कैसी प्रतिक्रियाएं देते हैं.

प्रोफेसर कॉक्स बताते हैं, ''ये एक दिलचस्प विषय है क्योंकि ये तो मालूम है कि लोग आवाज़ों से परेशान होते हैं लेकिन इसकी वजह क्या है इसके बारे में बहुत कम जानकारी है.''

फेसबुक रिसर्च पेज पर आने वाले लोगों की सलाह पर सात तरह की आवाज़ों का चुनाव किया गया है.

इन आवाज़ों में प्लास्टिक पर घर्षण, आरी चलने, माइक्रोफोन और बैलून की रगड़ जैसी आवाज़ें शामिल थीं.

थॉमलिन्सन बताती हैं, ''मैं ये जानना चाहती हूं कि कुछ आवाज़ें क्यों डरावनी होती हैं और लोग उनसे कैसे डर जाते हैं. अगर कोई व्यक्ति उल्टी कर रहा हो तो उसकी आवाज परेशान करनेवाली होती है लेकिन मुझे उन आवाज़ों में ज्यादा दिलचस्पी है जिन्हें सुनना ज्यादा परेशानदेह होता है और हम ये भी नहीं जानते कि उसकी वजह क्या है.''

शोधकर्ताओं ने ये जानने की कोशिश भी की है कि इन आवाज़ों का विभिन्न उम्र, लिंग और व्यक्तित्व के लोगों पर कैसा असर पड़ता है.

शोध से ये पता चला है कि ब्लैकबोर्ड पर नाखून की खरोंच और पॉलिथीन की रगड़ की आवाज़ उम्र के साथ कम परेशान करती है.

लेकिन दिलचस्प बात ये थी कि महिलाएं इन आवाज़ों से पुरुषों के मुकाबले ज्यादा परेशान होती हैं.

थॉमलिन्सन वर्तमान में ए लेवेल की परीक्षा दे रही हैं और रसायनशास्त्र की पढ़ाई के लिए सितंबर में यूनिवर्सिटी जाने की तैयारी कर रही हैं.

फाइनल के लिए चुने गए तीन अन्य प्रतियोगियों विलियम रुडलिंग, डारा जवन खोशडेल और वाल वाथम के साथ थॉमलिन्सन अपने शोध के नतीजे चेल्थेनहम साइंस फेस्टिवल में पेश करेंगी.