स्टेम सेल से और बँधी उम्मीद

स्टेम सेल

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    • Author, पल्लब घोष
    • पदनाम, विज्ञान संवाददाता, बीबीसी न्यूज़

मल्टीपल स्लेरोसिस एक ऐसी बीमारी है, जो दिमाग़ और रीढ़ की हड्डी पर हमला करती है. लेकिन इस बीमारी का अब तक कोई इलाज नहीं है.

अब वैज्ञानिक एक परीक्षण के ज़रिए ये पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इस लाइलाज बीमारी का इलाज क्या स्टेम सेल तकनीक से किया जा सकता है.

पूरे यूरोप में इस बीमारी से ग्रस्त 150 लोगों पर ये परीक्षण किया जा रहा है.

ऐसी उम्मीद की जा रही है कि स्टेम सेल से मल्टीपल स्लेरोसिस से होने वाले नुक़सान को रोका जा सकता है और यहाँ तक कि उसे ठीक भी किया जा सकता है.

उम्मीद की किरण

इम्पीरियल कॉलेज लंदन के डॉक्टर पाउलो मुरारो का कहना है, “इस बात के बहुत मज़बूत सबूत हैं कि स्टेम सेल से काफ़ी असरकारी इलाज किया जा सकता है.”

इस परीक्षण के दौरान बीमार व्यक्तियों की अस्थि-मज्जा से उत्तक लिए जाएँगे और उन्हें एक प्रयोगशाला में विकसित किया जाएगा.

इन स्टेम ऊतकों को इंजेक्शन के ज़रिए मस्तिष्क में भेजा जाएगा. उम्मीद की जा रही है कि ये उत्तक दिमाग़ में मल्टीपल स्लेरोसिस के कारण हुए नुक़सान को रोक पाएँगे.

बीमारी का असर

स्टेम सेल
इमेज कैप्शन, स्टेम सेल का प्रयोग कई बीमारियों के इलाज के लिए किया जाता है.

एक अनुमान के मुताबिक़ दुनिया भर में मल्टीपल स्लेरोसिस से लगभग 30 लाख लोग पीड़ित हैं. इनमें से एक लाख लोग ब्रिटेन में हैं.

ये बीमारी तब होती है जब इंसान की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रणाली दिमाग़ और तंत्रिका तंत्र में पाए जाने वाले मायेलिन नाम के एक तत्त्व पर हमला शुरू कर देती है और उसे नष्ट कर देती है.

इस तत्त्व के नष्ट होने से दिमाग़ से शरीर के विभिन्न हिस्सों में जाने वाले संदेश में रुकावट आ जाती है.

इसके नतीजे में आँखें काम करना बंद कर देती हैं, मल-मूत्र त्यागने में समस्या पैदा होती है और माँसपेशियाँ सख़्त हो जाती हैं.