You’re viewing a text-only version of this website that uses less data. View the main version of the website including all images and videos.
बढ़ रहे हैं युवा उम्र में मेनोपॉज के मामले, जानिए क्यों?
आप ज़रा कल्पना कर के देखिए आप किशोरावस्था या 20 पार की उम्र में हैं और आप मेनोपॉज के दौर से गुज़र रही हैं. ये बात किसी के लिए भी चौंकाने वाली हो सकती है, जैसे एम्मा, सोए म्यात और एल्सपेथ नाम की तीन लड़कियों को भी हैरान कर रही है.
व्यस्क उम्र शुरु होते ही मेनोपॉज की कल्पना इन्होंने भी नहीं की थी. लेकिन जब मेडिकल जांच की रिपोर्ट सामने आई तो पता चला वो तीनों मेनोपॉज की ऐसी स्थिति से गुज़र रही है, जिससे हर महिला गुज़रती है, लेकिन उस पर खुलकर बात नहीं करती.
ये अगस्त 2013 की बात है, जब एक डॉक्टर ने एम्मा डेलैने की जांच रिपोर्ट देखी और कहा कि 'तुम तो 25 साल की उम्र में ही मेनोपॉज से गुज़र रही हो.'
ये सुनकर एम्मा अवाक रह गई. डॉक्टर के मुंह से सुनकर भी उन्हें ये यकीन नहीं हुआ. कुछ महीने पहले एक दवाई ( वो कौन सी पिल थी इसकी डिटेल नहीं है) लेने के बाद से उसे पीरियड्स नहीं हुए और ना ही आने के कोई संकेत दिख रहे हैं. वो शायद अब कभी मां भी नहीं बन सकती.
एम्मा बताती हैं "डॉक्टर की बात सुन पर पहले तो मुझे समझ ही नहीं आया, कि मैं क्या बोलूं. उन्होंने वो बात ही कुछ इस तरह बताई थी, जैसे अब मैं कभी मां नहीं बन सकती."
एम्मा महिलाओं के उस ग्रुप में शामिल हैं जो पीआईओ यानी 'प्राइमरी ओवेरियन इनसफिशिएंसी' नाम के एक मेडिकल कंडीशन की पीड़ित हैं. पीआईओ की वजह से ही महिलाओं में 40 की उम्र से पहले मेनोपॉज शुरू हो जाता है.
ज़्यादातर मामलों में इसकी कोई वजह सामने नहीं आती. पीआईओ से प्रभावित कई महिलाओं में मेनेपॉज 50 की उम्र तक भी शुरु होता है.
इस मेडिकल कंडिशन से ब्रिटन में हर 100 में से एक महिला प्रभावित है. विशेषज्ञों का मानना है, कि ये औसत इससे भी ज़्यादा हो सकता है. लेकिन ये एक ऐसा मसला है, जिस पर कोई बातचीत नहीं होती.
मेनोपॉज क्या है और इसके लक्षण क्या हैं?
डॉक्टर निग़त आरिफ़ ऐसे मामलों के विशेषज्ञ हैं. वो टिकटॉक पर मेनोपॉज केयर से जुड़े वीडियो को लेकर खासे मशहूर हैं. उनके मुताबिक़ 'मेनोपॉज जैसे मामले पर युवाओं के बीच ज़्यादा बाचचीत नहीं होती. इसका ज़िक्र होता है तो सामने एक अधेड़, पके-अधपके बालों वाली महिला की छवि जेहन में आती है. लेकिन ये पूरी तरह से सच नहीं है.'
यहां एम्मा जैसी लड़किया हैं, जिन्हें ये पता नहीं कि उनकी ओवरी (गर्भाशय) क्यों पूरी तरह सक्रिय नहीं है. पीओआई के बारे में ये माना जाता है कि ये 'ऑटो इम्यून कंडीशन', 'क्रोमोज़ोम डिसॉर्डर' और गर्भाशय की सर्जरी की वजह से हो सकता है.
लेकिन बात सिर्फ़ इसके शारीरिक दुष्प्रभावों की नहीं, बल्कि जांच में इसकी पुष्टि होने के बाद इसका मनासिक असर भी गहरा होता है. जैसे एम्मा. डॉक्टर ने जब इन्हें मेनोपॉज की पुष्टि की, तो वो अपनी कार में बैठकर घंटे भर तक रोईं.
एम्मा को मेनेपॉज के बारे में कुछ भी नहीं पता था. सिर्फ़ अपने शहर मैनचेस्टर के एक पार्लर में बड़ी उम्र के महिलाओं को इस बारे में बात करते सुना था. इसके बाद एम्मा का वो सपना तार-तार होता दिख रहा था, जिसमें शादी और दो बच्चे पैदा करने का ख़्याल उन्होंने संजो रखा था.
इसके बाद कुछ महीनों तक एम्मा की 'हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी' चली. इस दौरान उन्हें पता चला कि उनकी ओवरी ने काम करना बंद कर दिया था. उनके शरीर में भी पीरियड्स के लिए ज़रूरी ओस्ट्रेजेन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन नहीं बन पा रहे थे. हार्मोन्स में इसी असंतुलन की वजह से उनकी स्वास्थ्य बरसों से प्रभावित हो रहा था.
इस दौरान वो जिस 'ब्रेन फॉग'का सामना कर रही थी( इसमें पीड़ित शख्स एकाग्रता की कमी महसूस करता है) वो उनके स्वाभाव का हिस्सा नहीं था. बल्कि ये मेनेपॉज के लक्षणों में से एक था. इस दौरान अक्सर उन्हें 'हॉट फ्लशेज' (अचानक शरीर में गर्मी महसूस करना) आते थे. ये इतना ज़ोरदार होता था जितना लंबे समय तक हेयर ड्रायर इस्तेमाल करने पर भी सिर गर्म नहीं होता. उन्हें रातों को नींद नहीं आती थी. इसकी वजह इन्सोमेनिया नहीं, जैसा कि वो समझती थी. ये सारे लक्षण हार्मोन्स में असंतुलन के थे.
ऐसे लक्षण एम्मा की मां में भी नहीं दिखाई पड़ते थे. घर में वो अकेली महिला थी जो 40 से ज़्यादा की उम्र की थी, लेकिन वो इस उम्र तक मेनोपॉज के स्टेज में नहीं पहुंची थी. एम्मा की उम्र की कई दोस्तों की शादी हो चुकी थी. उनके बच्चे भी हो चुके थे. तब एम्मा को लगता था 'उनकी हालत को शायद कोई नहीं समझ पाएगा.'
इन सबसे पीछा छुड़ाने के लिए एम्मा ने खुद को काम में व्यस्त कर लिया. वो इस पर कोई चर्चा से भी कतराने लगी. शाम में खुद को अकेलेपन से बचाने के लिए एम्मा ने देर रात की पार्टियों और कभी कभार डेट पर जाना शुरू कर दिया. जैसे उन्होंने ये तय कर लिया था उन्हें अपनी ज़िंदगी अपने दोस्तों की गृहस्थ ज़िंदगी से बिलकुल उलट जीनी है.
एम्मा बताती हैं "मैंने अपने आप को पूरी तरह शराब और सेक्स में डुबो लिया. मैंने ये महसूस ही नहीं किया कि इसके बारे में दूसरों से बातचीत करना कितना ज़रूरी है."
मैं तो सिर्फ़ उम्र से पहले मेनेपॉज से गुजर रही थी. लेकिन कई महिलाएं ऐसी भी थीं जो गंभीर बीमारियों से ग्रसित हो चुकी थीं. इनके इलाज के दौरान ये पता चला कि ये मेनेपॉज की स्थिति में आ चुकी हैं.
कम उम्र में मेनोपॉज की ऐसी ही एक शिकार हैं लंदन में ग्राफिक्स डिज़ाइन की स्टूटेंट सोए म्यात नोए. ये कैंसर के इलाज की वजह से मेनेपॉज की स्थिति में पहुंची. 23 की उम्र में ये इन्हें तीसरे स्टेज के आंत के कैंसर का पता चला था. पेट के निचले हिस्से में रेडियेशन थेरेपी की वजह से इनका गर्भाशय प्रभावित हुआ. लेकिन इन्हें तब पता नहीं चला, आगे इसका नतीजा क्या होगा.
सोए म्यात बताती हैं "मेरा इलाज कर रहे डॉक्टरों का पूरा ध्यान कैंसर पर था. मुझे किसी ने नहीं बताया कि इसकी वजह से मैं मेनोपॉज के स्टेज में पहुंच जाऊंगी."
इलाज के दौरान उन्हें अचानक ही कानों में सीटी बजने, एंग्जायटी और थकान जैसे गंभीर लक्षण महसूस होने लगे. सोए म्यात जब बड़ी हो रही थी तब उनके आस-पास पीरियड्स, फर्टिलिटी और मेनेपॉज के बारे में बातचीत आम नहीं थी. इसलिए उन्हें पता नहीं था, कि इसका मतलब क्या होता है.
उनकी यूनिवर्सिटी की दोस्त भी जो प्रेगनेंसी से बचने के लिए पिल्स और आईयूडी (गर्भाशय में प्लांट किया जाने वाला एक यंत्र) का इस्तेमाल करती थीं, उन्हें भी उनकी हालत का अंदाज़ा नहीं था.
सोए म्यात कहती हैं "ये सब मेरे साथ ही हो रहा था. मेरी दोस्त मेरी तुलना बूढ़ी महिलाओं से करती थी. तब मुझे लगता था कि मैंने अपनी ज़िंदगी का बड़ा हिस्सा ऐसे ही गंवा दिया"
सोए म्यात हालांकि अपनी मानसिक हालत के बारे में अपने डॉक्टर से बात करती थी, लेकिन इस दौरान मेनेपॉज के लक्षणों पर ध्यान नहीं दिया गया. तब उन्होंने खुद ही मेनोपॉज के लक्षणों और इसके इलाज के बारे में गूगल करना शुरू किया.
इसी दौरान उन्हें पता चला 'हार्मोन रिप्लेसमेंट थेरेपी' का. हालांकि कैंसर के कुछ प्रकारों से पीड़ित महिलाओं को इस थेरेपी की सलाह नहीं दी जाती. लेकिन सोए म्यात के मामले में ऐसा नहीं हुआ. ये थेरेपी शुरू करने के बाद उन्होंने मेनोपॉज के लक्षणों में सुधार महसूस किया.
तब से लेकर आज तक सोए म्यात राहत महसूस कर रही हैं. इसमें और बेहतरी के लिए वो एचआरटी के साथ वो लंबी दूरी तक टहलने और गर्म पेय पीने से बचने जैसे नुस्खे अपनाती हैं. उन्हें लगता है कि काश, इलाज के दौरान मेनोपॉज के लक्षणों से भी निपटने के तरीके पहले बताए गए होते. वो कहती हैं 'तब ये इतना मुश्किल नहीं होता.'
डॉ. निग़त आरिफ़ का सोशल मीडिया एकाउंट ऐसी तमाम महिलाओं के मैसेज से भरा हुआ है, जो मेनोपॉज के लक्षणों से पीड़ित हैं. डॉ. आरिफ़ डॉक्टरों और हेल्थकेयर से जुड़े लोगों से कहती है कि मेनेपॉज के इलाज में सबसे ज़रूरी है इसकी समझ. लेकिन ये तब तक नहीं होगा, जब तक हर उम्र की महिलाएं इसे लेकर बने बनाए 'टैबू' को तोड़ने की हिम्मत नहीं करेंगी.
डॉ. आरिफ कहती हैं "आपकी ज़िंदगी में जो भी महिला हैं, उससे बात कीजिए. अपनी पत्नी, मां, दादी, चाची, बहन, भतीजी और गर्लफ्रैंड सबसे चर्चा कीजिए. इसमें शर्मिंदगी जैसी कोई बात नहीं. आप ये समझने की कोशिश कीजिए कि वो किस हालत से गुज़र रही हैं."
डॉ. आरिफ़ बताती हैं आज अगर पीओआई से पीड़ित महिलाओं की बड़ी तादाद सामने आ रही है, तो इसकी वजह है इसके लक्षणों की बेहतर समझ. लेकिन समय पर जांच कराने की जागरुकता आने में अभी और वक्त लगेगा. आप ये समझ लीजिए कि पीओआई का इलाज अगर समय पर नहीं हुआ, तोइससे महिलाओं के दिल, हड्डियों और मानसिक स्वास्थ्य पर ज़्यादा बुरा असर डालेगा.
डॉक्टर आरिफ़ के मुताबिक 'पीओई से पीड़ित कई महिलाओं को अपनी ज़िंदगी अंधेरे में लगने लगती है. इनमें से बहुत सारी महिलाएं बच्चा चाहती हैं, लेकिन इसकी वजह से उनकी चाहत हमेशा के लिए अधूरी रह जाती है.'
कई मरीज़ों की सर्जरी के दौरान डॉक्टर आरिफ़ को सेक्स के दौरान दर्द और यौन उत्तेजना में कमी जैसी स्थितियों का भी पता चला, जिनके बारे में कोई बात नही करता.
23 साल की एलस्पेथ विल्सन भी इसे बखूबी समझती हैं. विल्सन जब 15 साल की थीं, तभी उन्हें मेनोपॉज का पता चला था. इसकी वजह से डेटिंग लाइफ के दौरान सेक्स में तकलीफ़ होती थी.
विल्सन बताती है "इसके साथ रिलेशनशिप में होना बहुत मुश्किल हो जाता है. आप ये जताना चाहते हो कि आप प्यार करते हो, लेकिन आपका शरीर साथ नहीं देता."
विल्सन कहती हैं कि उन्हें ये बात ज़्यादा निराश करती है कि डॉक्टरों ने उन्हें कभी ये नहीं बताया, कि ये मेरे लिए गंभीर मसला हो सकता है.
विल्सन ने कॉलेज खत्म करने के बाद न्यूकैसल में एक मार्केट रिसर्चर के तौर पर नौकरी शुरू की है. हालांकि कंपनी के प्रभारी उन्हें काफी सपोर्ट करते हैं, लेकिन पीओआई से पूरी तरह निजात पाने की राह काफी मुश्किल दिखती है.
विल्सन आगे बताती हैं "ये आपके अंदर 'इंपोस्टर सिंड्रोम' (मन में उठने वाला एक तरीके का भ्रम) पैदा करता है. मैं कई बार ब्रेन फॉग का शिकार हो जाती हूं, और ये बहुत ही बुरे वक्त में शुरू होता है."
विल्सन इस बारे में अपने व्टासअप ग्रुप में बात करने से राहत महसूस करती हैं. इस ग्रुप में पीओआई से पीड़ित महिलाएं हैं, जो इसके बारे में हर तरह की बात करती हैं.
विल्सन कहती है "इस बात से आपको काफी सहारा मिलता है जब आप लक्षणों को लेकर खुलकर बात करते हैं. अगर आपको सलीके से बात करने आता है, तो इसमें ज़रा सी भी शर्म की बात नहीं."
इस बात से सोए म्यात भी सहमत दिखती हैं. इन्होंने भी कैंसर और मेनेपॉज से पीड़ित महिलाओं के लिए ऑनलाइन सपोर्ट ग्रुप ज्वाइन किया हैं.
ये बात एम्मा ने भी इलाज के दौरान सीखीं. बरसों तक इसके लक्षणों और इसकी वजह से होने वाली परेशानियों को मन में दबाए रखने के बाद एम्मा आज इस पर खुलकर बात करती हैं. इसकी शुरुआत अपने डॉक्टर को खुलकर पूरी बात बताने से हुई. उस डॉक्टर ने ही उन्हें एक आम इंसान की तरह खुलकर बताना सिखाया.
एम्मा कहती है "इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ता कि मुझे क्या बीमारी है, फर्क इस बात से पड़ता है कि आप खुद को समझें कि आप हैं. इलाज के दौरान मैंने ये बड़ी बात सीखी."
कुछ साल पहले वो एक शख्स से मिली, जो उनकी हालत को पूरी संवेदना से समझता है. आज वो दोनों एक साथ रहते हैं.
(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक, ट्विटर, इंस्टाग्राम और यूट्यूबपर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)