क्या है पृथ्वी को आसमानी आफ़त से बचाने के लिए नासा का महाप्रयोग

नासा

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    • Author, पॉल रिंकन
    • पदनाम, साइंस एडिटर, बीबीसी न्यूज़ वेबसाइट

नासा के वैज्ञानिक एक अंतरिक्ष यान से ऐसी तकनीक के परीक्षण की तैयारी कर रहे हैं जिसे भविष्य में किसी ख़तरनाक उल्का या एस्ट्रॉयड को पृथ्वी से टकराने से रोका जा सकता है.

नासा के इस मिशन का नाम 'डार्ट मिशन' है जिसके आधार पर वो पृथ्वी की ओर आने वाली किसी बड़ी अंतरिक्ष चट्टान को निष्क्रिय करने के लंबे समय से चल रहे प्रस्ताव का मूल्यांकन करेगा.

ये अंतरिक्ष यान डिमोर्फ़ोस नामक एक आकाशीय पिंड या ऑब्जेक्ट से टकराएगा. नासा के वैज्ञानिक ये देखना चाह रहे हैं डिमोर्फ़ोस की गति और रास्ते को कितना बदला जा सकता है.

वैज्ञानिकों जो काम करना चाह रहे हैं उसकी अहमियत का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि अगर कुछ सौ मीटर के ब्रह्मांडीय मलबे (कॉस्मिक डेबरी) का एक हिस्सा पृथ्वी से टकराता है, तो यह एक पूरे महाद्वीप पर तबाही मचा सकता है.

हालांकि, डिमोफ़ोर्स से पृथ्वी को कोई ख़तरा नहीं है. ये भविष्य में पृथ्वी की ओर आने वाले ऐसे ख़तरों से निपटने का तरीका सीखने का पहला प्रयास है, यानी कल को कोई ऐसा पिंड या मलबा धरती की ओर आया तो उसे कैसे दूर रखा जा सकता है.

नासा के प्लेनेटरी डिफ़ेंस कोऑर्डिनेशन ऑफ़िस के केली फास्ट ने कहा, "डार्ट केवल डिमोर्फोस की कक्षा की अवधि में बस छोटा सा परिवर्तन करने की कोशिश है.और वास्तव में भविष्य में हमारी ओर आने वाले एस्ट्रॉयड को रोकने के लिए बस इतना भर ही करना होगा.

बुधवार को फॉल्कन 9 रॉकेट, डार्ट अंतरिक्ष यान को कैलिफ़ोर्निया के वेंडेबर्ग स्पेस फ़ोर्स बेस से अंतरिक्ष में भेजेगा.

एस्टेरॉयड या उल्कापिंड, सौर मंडल के बचे हुए खंड हैं, जिनमें से अधिकांश से पृथ्वी के लिए कोई ख़तरा नहीं होता. लेकिन जब ऐसी कोई चट्टान सूर्य का चक्कर लगाते हुए पृथ्वी की ओर बढ़ती तो टक्कर की संभावना हो सकती है.

ऑर्बिट

कैसे होगा परीक्षण

करीब 32 करोड़ अमेरिकी डॉलर का डार्ट मिशन, एस्टेरॉयड की एक जोड़ी को निशाना बनाएगा जो इस वक्त एक-दूसरे की परिक्रमा कर रहे हैं. ऐसी परिक्रमा को बाइनरी कहा जाता है. इन दोनों में से बड़े एस्ट्रॉयड का नाम है डिडिमोस, जो करीब 780 मीटर में फैला है. डिमोफ़ोर्स करीब 160 मीटर चौड़ा है.

डिमोफ़ोर्स के आकार वाले एस्टेरॉयड के पृथ्वी से टकराने के बाद, कई परमाणु बमों की ऊर्जा जितना असर होगा. इससे लाखों की जान जा सकती है. लेकिन 300 मीटर और इससे अधिक चौड़ाई वाली एस्टेरॉयड तो पूरे के पूरे महाद्वीप तबाह कर सकती हैं. और एक किलोमीटर के आकार वाले पिंड तो पृथ्वी को ख़तरे में डाल सकते हैं.

डार्ट प्रक्षेपण के बाद सितंबर 2022 तक अंतरिक्ष में घूमता रहेगा और फिर पृथ्वी से 67 लाख मील दूर जाकर अपने लक्ष्य को निशाना बनाएगा.

डार्ट लगभग 15,000 मील प्रति घंटा की गति से (6.6 किमी/सेकेंड) की गति से डिमोफ़ोर्स से टकराएगा. इससे डिमोफ़ोर्स की दिशा चंद मिलिमीटर ही बदलने के आसार हैं. अगर ये हो गया तो, उसकी कक्षा बदल जाएगी.

ये एक बहुत ही छोटा परिवर्तन लग सकता है लेकिन एक एस्टेरॉयड को पृथ्वी से टकराने से रोकने के लिए बस इतना ही करना है.

हालांकि इतना करना भी आसान नहीं है.

डार्ट का साइज़

पृथ्वी के निकट मौजूद एस्टेरॉयड

नासा की इस मिशन के प्रोग्राम साइंटिस्ट टॉम स्टेटलर ने कहा, "बड़े एस्टेरॉयड की तुलना में, अंतरिक्ष में बहुत सारे छोटे एस्टेरॉयड हैं और इसलिए सबसे अधिक संभावित ख़तरा भी इन्हीं से है."

साल 2005 में, अमेरिकी कांग्रेस ने नासा को पृथ्वी के निकट मौजूद 90% फ़ीसदी एस्टेरॉयड को ट्रेक करने का निर्देश दिया था जिनसे पृथ्वी को संभावित ख़तरा हो सकता है. नासा इनमें से अब तक केवल 40% की ही पहचान कर पाया है.

डार्ट पर ड्रेको नाम का एक कैमरा भी है जो अपने मिशन की तस्वीरें लेगा ताकि अंतरिक्ष यान के डिमोफ़ोर्स से टकराने के लिए सही दिशा का पता चलता रहे.

अपने लक्ष्य को भेदने से लगभग 10 दिन पहले डार्ट, लिसियाक्यूब नामक एक छोटे सैटेलाइट का इस्तेमाल करेगा. ये छोटा यान टकराने के बाद की तस्वीरें वापस भेजेगा.

डार्ट की टीम

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डिमोर्फोस के घूमने के पथ में छोटे-से परिवर्तन को भी पृथ्वी पर दूरबीनों के ज़रिए मापा जाएगा. टॉम स्टेटलर ने कहते हैं, "हम वास्तव में जानना चाहते हैं कि क्या हमने सही में एस्टेरॉयड की कक्षा को बदल दिया है और अगर हां तो हमने ये कितनी कुशलता से किया है?"

इस तरह के परीक्षण के लिए ये एक दुरुस्त प्रयोगशाला है. इस प्रयोग से डिमोर्फ़ोस को अपना रास्ता लगभग 1% बदल लेना चाहिए. लेकिन इसका सही-सही पता यहाँ पृथ्वी पर मौजूद दूरबीनों से कई हफ्तों या महीनों में लगेगा.

इस बात पर भी अनिश्चितता है कि डिमोफ़ोर्स डार्ट से टकराने के बाद कैसे व्यवहार करेगा क्योंकि हमें इसकी आंतरिक संरचना के बारे में पता नहीं है. यदि डिमोफ़ोर्स अंदर से ठोस है तो ज़ाहिर है कि बहुत सा मलबा निकलेगा, जिससे इसे एक अतिरिक्त धक्का लगेगा.

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