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फ़ेसबुक, व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम में ऐसी क्या दिक़्क़त आई जिससे वो ठप पड़ गए
फ़ेसबुक ने बताया है कि उसके सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म फ़ेसबुक, इंस्टाग्राम और मैसेजिंग ऐप व्हाट्सऐप में आई तकनीकी ख़ामी को दूर कर लिया गया है.
कंपनी का कहना है कि कॉन्फ़िगरेशन बदलाव में ख़ामी होने की वजह से इस तरह की समस्या का सामना करना पड़ा.
ये तीनों प्लेटफ़ॉर्म फ़ेसबुक के ही हैं जिन्हें वेबसाइट या स्मार्टफ़ोन पर इस्तेमाल करने में दिक़्क़त हो रही थी.
इस ख़ामी का पता लगाने वाली डाउनडिटेक्टर वेबसाइट ने बताया है कि यह अभी तक की सबसे बड़ी ख़राबी है जिसके बारे में दुनियाभर के 1.06 करोड़ यूज़र्स ने अपनी परेशानी रिपोर्ट की.
भारतीय समयानुसार ये तकनीकी ख़राबी सोमवार रात 9.30 बजे के क़रीब सामने आई थी जिसे सुबह 4 बजे के क़रीब ठीक कर लिया गया और लोग इन वेबसाइट्स पर जा सकते थे.
किस कारण आई ऐसी दिक़्क़त
फ़ेसबुक ने मंगलवार को बयान जारी करके बताया है कि उसने एक कॉन्फ़िगरेशन बदलाव किया था जिसमें ख़ामी होने के कारण उसने कंपनी के आंतरिक टूल्स और सिस्टम को नुक़सान पहुंचाया और इसके जटिल होने के कारण इसमें ख़ासी दिक़्क़तें आईं.
इस बयान में यह भी कहा गया है कि ऐसा कोई 'सबूत नहीं है जो यह बताए कि इस समय के दौरान यूज़र के डेटा के साथ कोई छेड़छाड़ की गई है.'
इससे पहले फ़ेसबुक के संस्थापक मार्क ज़करबर्ग ने इससे प्रभावित हुए लोगों से माफ़ी मांगी थी.
कुछ लोगों ने फ़ेसबुक के वर्चुअल रिएलिटी हेडसेट प्लेटफ़ॉर्म ओक्युलस के इस्तेमाल करने में आ रही दिक्क़तों के बारे में भी बताया था क्योंकि इसके लिए फ़ेसबुक लॉगिन की ज़रूरत होती है. इसके साथ ही पोकेमॉन गो इस्तेमाल करने में भी लोगों को दिक़्क़त पेश आई है.
इस तरह की तकनीकी दिक़्क़त को अब तक की सबसे बड़ी समस्या बताया जा रहा है.
इस तरह की समस्या फ़ेसबुक के साथ 2019 में आई थी जब उसके बहुत से ऐप्स 14 घंटों तक बाधित रहे थे.
रेडिट और ट्विटर जैसी कई दूसरी तकनीकी कंपनियों ने इस सोशल मीडिया कंपनी की स्थिति का मज़ाक भी उड़ाया है.
फ़ेसबुक को कितना नुक़सान हुआ
फ़ेसबुक को इस समस्या का तब सामना करना पड़ा है जब एक दिन पहले एक व्हिसलब्लोअर ने अमेरिकी टीवी पर सामने आकर यह बात बताई थी कि फ़ेसबुक के दस्तावेज़ लीक करने वाली वही थीं.
फ़्रांसिस हाउगिन ने सीबीएस न्यूज़ को रविवार को बताया था कि फ़ेसबुक सार्वजनिक सुरक्षा से अधिक अपने मुनाफ़े को तवज्जो देता है.
हाउगिन मंगलवार को सीनेट की उस उप-समिति के सामने पेश होंगी जो 'इंटरनेट पर बच्चों की सुरक्षा' के मामले को सुन रही है. दरअसल कंपनी ने इंस्टाग्राम के युवा यूज़र्स के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर पर शोध किया है.
एक अनुमान के मुताबिक़ छह घंटे तक जारी रही इस ख़ामी के कारण फ़ेसबुक, मैसेंजर, इंस्टाग्राम और व्हाट्सऐप प्लेटफ़ॉर्म के दुनियाभर में 3.5 अरब लोग प्रभावित हुए हैं.
विश्लेषकों का मानना है कि फ़ेसबुक और उसके दूसरे सोशल मीडिया प्लटेफ़ॉर्म में आई ख़ामी के कारण कंपनी को विज्ञापन से होने वाली कमाई में ख़ासा नुक़सान हुआ है.
कंपनी को हर घंटे तक़रीबन 1 मिलियन डॉलर (7.45 करोड़ रुपये) के क़रीब नुक़सान हुआ है.
इससे उसे शेयर मार्केट में भी ख़ासा नुक़सान उठाना पड़ा है और न्यूयॉर्क में उसके शेयर पांच फ़ीसदी तक नीचे आ गए हैं.
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
बीबीसी के नॉर्थ अमेरिका टेक्नोलॉजी रिपोर्टर जेम्स क्लेटन कहते हैं कि अधिकतर ख़ामियों को जल्द ही ठीक कर लिया जाता है और ये अक़्सर स्थानीय स्तर की ही होती हैं जिनमें एक जगह पर कुछ लोग ही वेबसाइट खोलने में असमर्थ होते हैं जबकि दूसरे देशों में वो देखी जा सकती है.
वो कहते हैं कि यह ख़ामी वैश्विक स्तर की थी और इसने फ़ेसबुक के अधिकतर सोशल मीडिया प्लटेफ़ॉर्म्स को प्रभावित किया है.
क्लेटन ने कहा कि ख़ामी के बने रहने का समय भी काफ़ी लंबा था, ऐसी रिपोर्ट्स भी हैं कि फ़ेसबुक मुख्यालय में इससे 'हाथापाई' की नौबत आ गई थी क्योंकि कई टेक्नीशियंस समस्या सुलझाने में बैचेनी से लगे हुए थे.
"ये भी ध्यान देने वाली बात है कि इस ख़ामी से फ़ेसबुक की समस्या दूर करने की तकनीक भी प्रभावित हुई है. इसके कारण उसके इंटरनल टूल्स भी काम नहीं कर पाए."
"यह भी कहा जाना चाहिए कि फ़ेसबुक का बयान सावधानी से लिखा गया है क्योंकि इसके कारण किसी बेईमानी को ख़ारिज नहीं किया जा सकता है."
"वैसे भी फ़ेसबुक के लिए ये सप्ताह बेहद ख़राब शुरू हुआ है जब 'फ़ेसबुक फ़ाइल्स' को लाने वाली व्हिसलब्लोअर ने रविवार को अपनी पहचान सार्वजनिक कर दी थी."
"लेकिन अब यह बुरा सप्ताह इस सोशल नेटवर्क कंपनी के लिए भयानक बन गया है."
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