स्पर्श और गरमाहट की गुत्थी सुलझाने के लिए दो वैज्ञानिकों को नोबेल पुरस्कार

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    • Author, जेम्स गैलाघर
    • पदनाम, स्वास्थ्य और विज्ञान संवाददाता, बीबीसी न्यूज़

अमेरिकी वैज्ञानिक डेविड जूलियस और अरडेम पैटापूटियन को साल 2021 का मेडिसीन का नोबेल पुरस्कार हासिल किया है. उन्हें ये पुरस्कार संयुक्त रूप से दिया गया है.

नोबेल पुरस्कार हासिल करने वाले वैज्ञानिकों ने दुनिया को बताया कि इंसान का जिस्म सूरज की गर्मी और अपनों को स्पर्श करने पर कैसे महसूस करता है.

उन्होंने बताया कि किस तरह हमारा जिस्म संवेदना को विद्युतीय तरंग में बदल देता है और उसे संदेश के रूप में नर्वस सिस्टम यानी तंत्रिका तंत्र तक पहुंचाता है.

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उन्होंने जो अनुसंधान किया है, उसके जरिए दर्द के इलाज के नए तरीके तलाशे जा सकते हैं.

नोबेल पुरस्कार कमेटी के थॉमस पर्लमैन ने कहा, "ये बहुत अहम और गूढ़ खोज है."

डेविड जूलियस और अरडेम पैटापूटियन

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अहम जानकारी

प्रोफ़ेसर डेविड जूलियस ने यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया में मिर्च खाने पर जो जलन होती है, उस पर अनुसंधान किया.

उन्होंने मिर्च की जलन के स्रोत कैमिकल कैप्साइन पर प्रयोग किया. उन्होंने कैपसाइन पर प्रतिक्रिया देने वाले ख़ास किस्म के रिसेप्टर यानी ग्राही (कोशिकाओं का वो हिस्सा जो उसके इर्दगिर्द की चीजों का पता लगाता है) का पता लगाया.

इसे लेकर आगे जो परीक्षण किए गए उनसे जानकारी हुई कि ग्राही जलन पर प्रतिक्रिया दे रहा था जिससे 'पीड़ा देने वाली' जलन पैदा हो रही थी. अगर उदाहरण के जरिए समझना चाहें तो एक कप कॉफी के जरिए हाथ में जलन की स्थिति पैदा होती है तो ऐसा ही महसूस होता है.

इस खोज के बाद 'तापमान संवेदी' कई और खोज सामने आईं. प्रोफ़ेसर जूलियस और प्रोफ़ेसर अरडेम पैटापूटियन ने सर्द अहसास का पता लगाने वाले ग्राही की भी तलाश की.

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प्रोफ़ेसर पैटापूटियन ने स्क्रिप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट में कोशिकाओं से जुड़े अनुसंधान में जुटे थे.

इन प्रयोगों के जरिए एक अलग किस्म के ग्राही का पता चला जो यांत्रिकी बल या स्पर्श के जरिए जाग जाता है.

नोबेल प्राइज़ कमेटी ने कहा है कि उनके काम से "हमें ये समझने में मदद मिली है कि किस तरह गर्मी, सर्दी या यांत्रिकी बल (मेकेनिकल फ़ोर्स) तंत्रिका में संवेदना ला देता है जिससे हम अपने आसपास की दुनिया को समझते हैं और उसके माकूल ढल जाते हैं."

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कमेटी ने आगे कहा, " इस जानकारी को गंभीर दर्द समेत की बीमारियों का इलाज तलाशने में इस्तेमाल किया जा रहा है."

ये दोनों वैज्ञानिक एक करोड़ स्वीडिश क्रोनोर (8 लाख 45 हज़ार पाउंड) की रकम साझा करेंगे.

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