चीन से आई गोल्डफिश झीलों और नदियों के लिए 'राक्षस' क्यों बनती जा रही है?

अगर आपके घर के ड्रॉइंग रूम में रखे एक्वेरियम में गोल्डफिश हो और आप उससे छुटकारा पाना चाहते हों तो आप क्या करेंगे? क्या आप उसे बाथरूम में बहा देंगे? या फिर उसे पास की झील या नदी में ले जाकर छोड़ देंगे?

अगर आप ये सबकुछ सोच रहे हैं तो थोड़ा ठहर जाइए और इस लेख को आख़िर तक पढ़िए क्योंकि कई विशेषज्ञों का कहना है कि आप ऐसा करके एक 'राक्षस' पैदा कर सकते हैं.

दोस्ताना से दिखने वाली ये मछलियां जिन्हें हम गोल्डफिश कहते हैं और विज्ञान में कैरेसियस ऑराटस कहा जाता है, हाल के सालों में दुनिया भर की नदियों, झीलों और अन्य जल स्रोतों में मौजूद जलीय जीव प्रजातियों के लिए मुसीबत का सबब बन गई हैं.

एक्वेरियम में नन्ही-सी दिखने वाली ये मछली बाहर की दुनिया में फुटबॉल की गेंद तक का आकार ले सकती हैं और इनका वजन दो किलो तक बढ़ता है.

मांसाहारी मछलियां

आकार और वजन की बात छोड़ दें तो गोल्डफिश की प्रकृति अन्य मछलियों पर हमलावर रहने की है और ये स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए ख़तरा बन जाती हैं.

हालात की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जाता है कि अमेरिका के मिनेसोटा प्रांत में अधिकारियों ने लोगों से इन मछलियों को झीलों और नदियों में नहीं छोड़ने की अपील की.

केले झील में गोल्डफिश की बहुत बड़े आकार की मछलियां देखने के बाद सरकारी अधिकारियों ने इसे हमलावर प्रजाति की मछली करार दिया है.

वैज्ञानिकों के अनुसार गोल्डफिश सबसे पहले चीन में पाया गया था और बाद में पूरी दुनिया में फैल गया. ये मूलतः मांसाहारी मछलियां हैं. जहां दूसरी मछलियां मच्छरों का लार्वा खाती (इसलिए इन्हें प्राकृतिक कीटनाशक कहते हैं) हैं, वहीं गोल्डफिश का प्रमुख आहार इन मछलियों के अंडे हैं.

बीमारियों का ख़तरा

गोल्डफिश भोजन की तलाश में एक ऐसा तरीका अपनाती है जिससे जल स्रोत के निचले सतह में काफी हलचल होती है, इससे दूसरी समस्या पैदा होती है. पानी के नीचे मौजूद कीचड़ ऊपर आने लगता है और उस जगह पर मौजूद पोषक तत्व तैरने लगता है.

इससे गोल्डफिश को खाना तो मिल जाता है लेकिन वहां शैवाल बनने की प्रक्रिया तेज़ हो जाती है. नदियों, झीलों या अन्य जल स्रोतों में गोल्डफिश को फेंकने से वहां पहले से मौजूद मछलियों पर उन बीमारियों का ख़तरा बढ़ जाता है जिनसे वो अनजान होती हैं.

कुछ साल पहले ऑस्ट्रेलिया में इस पर एक स्टडी हुई थी. स्टडी टीम ने 15 गोल्डफिश की गतिविधियों पर साल भर तक नज़र रखी. इसके बाद शोधकर्ताओं की टीम गोल्डफिश के यात्रा करने की क्षमता के बारे में नई जानकारी सामने आई.

रिसर्च में कहा गया, "हमने पाया कि ये मछलियां नहरों से (जहां उनके मालिकों ने उन्हें छोड़ दिया था) नदियों के रास्ते होते हुए दलदली क्षेत्र में पहुंचीं जहां उन्होंने अंडे दिए."

इसका मतलब ये हुआ कि गोल्डफिश एक साल में 230 किलोमीटर से ज़्यादा लंबी दूरी तय कर सकती हैं.

गोल्डफिश से छुटकारा पाना चाहते हैं?

रिसर्च टीम के सामने एक और ख़ास बात आई कि गोल्डफिश खरगोश की तरह बच्चे पैदा कर सकती हैं. अन्य मछलियों के अंडे देने का सीज़न होता है जबकि खरगोश एक बार बच्चे जनने के बाद फिर से गर्भवती हो सकती हैं.

घर में रखे एक्वेरियम में गोल्डफिश उतनी तेज़ी से नहीं बढ़ता लेकिन जैसे ही इसे बाहर छोड़ा जाता है, ये रफ़्तार पकड़ लेती हैं.

दिक्कतें और भी हैं. विशेषज्ञों ने एक्वेरियम के पानी को नदियों और झीलों में बहाने को लेकर भी चेतावनी दी है क्योंकि इससे ठहरे हुए पानी में पैदा होने वाले परजीवी जल स्रोत की प्रजातियों को नुक़सान पहुंचा सकते हैं.

क्या आप अभी भी अपने गोल्डफिश से छुटकारा पाना चाहते हैं?

तो विशेषज्ञों के मुताबिक़ आपके पास दो विकल्प हैं. आप इसे किसी ऐसे जल स्रोत में छोड़ें जहां दूसरे जीवों को इससे ख़तरा न हो या फिर आप इसे फ्रीज़र में रख दें."

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