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स्कूल, कॉलेज जाने वाले क्यों करने लगते हैं हैकिंग?
- Author, मानसी दाश
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
हैकर, डेटा लीक- ये सुनते ही जो छवि दिमाग़ में उतरती है, वो अक्सर अंधेरे में हुड से सिर ढँक कर कंप्यूटर के सामने बैठे एक युवा की होती है.
ऐसा शायद इसलिए क्योंकि डेटा लीक से जुड़े अधिकतर मामले चोरी-छिपे किए गए जाते हैं और ऐसे मामलों में जो ख़बरें हमारे सामने आती हैं उनमें किसी किशोर या युवा का नाम होता है.
क्या ये कोई पैटर्न है या फिर युवा ही ऐसा करने के लिए अधिक आकर्षित होते हैं? ऐसा क्यों है?
एथिकल हैकर साई कृष्णा कोटपल्ली जब इंजीनियरिंग की पहले साल की पढ़ाई कर रहे थे, तब उनके दोस्त ने उन्हें हैकिंग के बारे में बताया था.
वो कहते हैं कि दो तीन साल लगातार उन्होंने केवल जिज्ञासा के कारण हैकिंग की.
वो कहते हैं, "जो किशोर होते हैं उनके पास काफी समय होता है और नया जानने की इच्छा भी अधिक होती है. उनके लिए ये रोमांच होता है कि वो अपने दोस्त का फ़ेसबुक हैक कर उनके सभी मैसेज पढ़ सकते हैं. या फिर किसी चीज़ पर 10 फीसदी डिस्काउंट को 90 फीसदी कर सकते हैं."
आनंद प्रकाश एथिकल हैकर हैं और अब ऐपसिक्योर नाम की कंपनी के सीईओ हैं.
आनंद प्रकाश कम उम्र में फेसबुक, ऊबर और ट्विटर जैसी कंपनियों के सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी तलाश कर बग बाउंटी के रूप में काम करने के लिए जाने जाते हैं.
21 साल की उम्र में आनंद प्रकाश ने सबसे पहले हैकिंग की तो उन्होंने फेसबुक बग बाउंटी में हिस्सा लिया.
वो कहते हैं, "हैकिंग के ज़रिए जब आप बग बाउंटी का काम करते हैं तो आपको ईनाम का पैसा तो मिलता है, पहचान भी मिलती है और साथ में आपका करियर भी बन जाता है. ये युवाओं के लिए काफ़ी अच्छा साबित होता है. इन सबके अलावा जिज्ञासा भी होती है क्योंकि डेवेलपर तो हर कोई होता है लेकिन हैकर कम ही लोग होते हैं."
पैसा, पावर और रोमांच
एथिकल हैकर राहुल कुमार सिंह ने 9-10 साल की उम्र में जब पहली बार हैकिंग की थी, तब वो किसी और के कंप्यूटर में बिना उसकी जानकारी के घुसने के तरीक़े सीख रहे थे. लेकिन बाद में उन्होंने अपनी सॉफ्टवेयर कंपनी भी खोली और अब वो साइबर फॉरेंसिक जांचकर्ता के तौर पर काम कर रहे हैं. अब वो केवल अपने हुनर को बनाए रखने के लिए हैकिंग करते हैं.
वो कहते हैं, "हर घर में फोन हैं, और रोक-टोक ज़्यादा है. जो चीज़ आसानी से मिलती नहीं, वो लोग चोरी करते हैं जैसे सॉफ्टवेयर नहीं मिला तो हैक कर लिया. और ये ऐसी चीज़ है कि कोई भी इसे सीखने के लिए उत्साहित रहता है. इसमें पैसा भी है और पावर भी, लेकिन पैसा और पावर में पावर बड़ी होती है."
राहुल कहते हैं, ''युवाओं के लिए ये पावर एक रोमांच की तरह है, जो उन्हें आकर्षित करता है. उस समय सोचने समझने की शक्ति होती नहीं है. उम्र का क्रेज़ होता है, कहते हैं ना उम्र का दोष होता है."
एथिकल हैकर रिज़वान शेख़ 16 साल की उम्र से हैकिंग के मैदान में हैं. आज वो साइबर क्राइम कंसल्टेंट के तौर पर काम करते हैं और एथिकल हैंकिग सिखाते हैं.
वो कहते हैं, "फ्री टाइम का होना, फिर उसमें इंटरनेट तक पहुंच होना. ये दोनों वजहें ज़्यादातर मामलों में स्कूल या कॉलेज में पढ़ रहे बच्चों के पास होती हैं. उनमें सीखने की क्षमता और इच्छा भी काफ़ी होती है."
वो कहते हैं, ''हम उस उम्र में ऑनलाइन गेम खेलते थे और फिर गेम के हैक खोजते थे. इस तरह हम ऐसी ऑनलाइन कम्युनिटी से मिले जहां हैकर्स अधिक थे. धीरे-धीरे यहीं से युवा की दिशा तय हो जाती है. ऐसी कम्युनिटी में आप देखेंगे तो अधिकतर 15 से 25 साल के युवा इनके सदस्य होते हैं.''
हैकिंग के कुछ मामले, जिनमें युवा शामिल रहे
- इसी साल जर्मनी की चांसलर एंगेला मर्केल समेत सैकड़ों राजनेताओं का निजी डेटा एक हैकर ने सोशल मीडिया पर लीक कर दिया था. ये हैकर 20 साल का एक स्कूली छात्र था. उसका कहना था कि वो सरकार से नाराज़ है.
- बीते साल 15 साल के एक किशोर ने खुद को सीआईए प्रमुख जॉन ब्रेनन के तौर पर पेश कर अफ़ग़ानिस्तान और इटली में सीआईए के ख़ुफिया अभियानों से जुड़े कंप्यूटर में घुसने की कोशिश की.
- 2012 में 22 साल के एक युवक ने 60 लाख कंप्यूटर्स में वायरस डालकर लोगों के बैंक अकाउंट डीटेल निकाल लिए. इसके ज़रिए उसने 15 करोड़ रूसी रूबल की चोरी की.
- एक जांच के तहत 2012 में ही एक हैकिंग ग्रुप से जुड़े 25 लोगों को इंटरपोल ने गिरफ्तार किया था. इंटरपोल 17 से 40 की उम्र के हैकर्स को आर्थिक मदद देने वालों की पड़ताल कर रहा था. गिरफ्तारियों के बाद इंटरपोल की वेबसाइट डाउन हो गई.
- ब्रिटेन में 2012 में लूल्ज़सेक हैकिंग ग्रुप के दो सदस्यों को वेबसाइट हैंकिंग के आरोप में सज़ा सुनाई गई थी. ये दोनों 18 और 19 साल के थे.
- जाने-माने हैकर जेरेमी हैमन्ड ने 18 साल की उम्र में हैकदिससाइट नाम से एक वेबसाइट बना ली थी. उन्हें 2012 में 27 साल की उम्र में स्ट्रैटेजिक फोरकास्टिंग नाम की निजी खुफ़िया कंपनी से डेटा चुराने के आरोप में 10 साल की सज़ा सुनाई गई. उनका कहना था कि ये कंपनी मानवाधिकार के समर्थन में बोलने वालों की जासूसी करती है.
- दुनिया के कई देशों में दहशत फैलाने वाले ब्लू व्हेल गेम को रूस में रहने वाले 21 साल के फिलिप बुडकिन ने बनाया था. ये खेल बच्चों के दिमाग़ को इस तरह अपने काबू में कर लेता था कि गेम की वजह से कई आत्महत्या की कोशिश के मामले सामने आए. बुडकिन का कहना था कि उन्हें लगता है कि वो सही हैं. वो 18 साल की उम्र से कंप्यूटर गेम बना रहे थे.
तो फिर अपराध की तरफ कदम कब बढ़ जाते हैं?
रिज़वान शेख़ कहते हैं कि "भले ही आप अपने दोस्तों का ईमेल या फेसबुक हैक मज़ाक मस्ती में ही करें. ये साइबर क़ानूनों का उल्लंघन ही होता है. तो ऐसा करके ही आप सीखते हैं और इसी तरह आप अपराध की तरफ़ भी मुड़ जाते हैं."
वो कहते हैं कि इस तरह के मामलों से निपटने के लिए क़ानून तो हैं लेकिन ऐसे मामलों की रिपोर्ट कम ही होती है. रिपोर्ट हो भी गई तो जांच किस हद तक हुई, सबूत मिले या नहीं, इस आधार पर सज़ा हो सकती है और इस कारण ऐसे मामलों में सज़ा होना हम कम ही देखते हैं. साथ ही हैकर्स की समझ जितनी तेज़ी से बढ़ती है जांच अधिकारियों की उस तरह से नहीं होती. इस कारण भी अपराध होते हैं.
वहीं आनंद प्रकाश कहते हैं, "जो अपराध की तरफ बढ़ते हैं, उनके लिए हैक करना रोमांच बन जाता है, जैसे किसी कंपनी को हैक करना. मन की संतुष्टि के लिए वो इस तरह की ग़लती कर बैठते हैं."
वो कहते हैं कि हैकर कितनी भी कोशिश करें ये बिल्कुल संभव है कि वो अपने पीछे सबूत छोड़ जाएं. वो कहते हैं, "ऐसा कुछ नहीं है कि आप पकड़े नहीं जाएंगे. इसका उम्र से कोई नाता नहीं है हैकर्स भी पकड़े जा सकते हैं."
साई कृष्णा कोटपल्ली कहते हैं, "मौक़ों की कमी के कारण या फिर एथिकल हैंकिंग से पैसा ना कमा सकने पर व्यक्ति अंधेरे की दुनिया में कदम रख सकते हैं. आख़िर हैकर को ये पता होता है वो मुश्किलें बिना झेले कमरे में बैठ कर भी कमा सकता है."
अपने बारे में वो कहते हैं, "मैं बग बाउंटी का काम करने लगा और मुझे ये काम पसंद आया क्योंकि इसमें अच्छा पैसा भी मिलता था. पूरी दुनिया में जितने बग बाउंटी हैकर्स हैं उनमें से अधिकतर 23 फीसदी भारत में हैं. इनमें से 90 फीसदी हैकर्स युवा हैं."
साई कृष्णा कोटपल्ली हैक्रयू नाम की कंपनी के सीईओ हैं और तेलंगाना सरकार के साथ मिल कर सरकारी वेबसाइटों और सॉफ्टवेयर को हैक-प्रूफ़ बनाने के काम में लगे हैं.
युवाओं को कैसे ग़लत दिशा में जाने से रोका जाए?
साई कृष्णा कोटपल्ली समझाते हैं कि एक उम्र के बाद हैंकिंग छोड़ दी जाए ऐसा नहीं होता.
वो कहते हैं कि ये एक हुनर है जो सीख लिया तो बस सीख लिया लेकिन अगर इसके ख़तरों के बारे में पता हो तो आप ग़लतियां नहीं करेंगे.
वो कहते हैं, "मैं अपने करियर को लेकर ख़तरा नहीं लेना चाहता था. साथ ही हमारे प्रोफ़ेसर भी कहते थे कि हैकिंग में कोई महत्वपूर्ण जानकारी मिले तो हमारे पास लेकर आओ."
रिज़वान शेख भी मानते हैं कि सही उम्र और समय पर किसी जानकार का मार्गदर्शन मिले तो बेहतर होता है.
वो कहते हैं, "जब मैं 16 साल का था तब मैंने हैकिंग की और कई लोगों के भी काम किए. लेकिन एक दिन मेरे एक परिचित जो सरकारी अधिकारी थे वो मुझे सही वरिष्ठ अधिकारी के पास ले कर गए और इस तरह मेरा ध्यान साइबर सुरक्षा की तरफ मुड़ गया."
वो कहते हैं कि हैकिंग सीखने वालों को पहले साइबर क़ानूनों के बारे में और अनएथिकल हैकिंग के ख़तरों के बारे में बताया जाना चाहिए.
आनंद प्रकाश ने पुलिस के साइबर सेल के साथ इंटर्नशिप की थी, जहां उन्हें एथिकल और नॉन एथिकल हैकिंग के बारे में बताया जाता था.
वो कहते हैं, "मेरे लिए वो काफ़ी महत्वपूर्ण था. ऐसा कुछ दूसरे हैकर्स के साथ हो और नॉर्मल एजुकेशन में हम साइबर सिक्योरिटी डालने लगें तो अच्छा हो जाएगा. जैसे मेरे साथ हुआ वैसा सबके साथ हो जाएगा."
वहीं राहुल कुमार सिंह कहते हैं, "मैंने अपनी खुद की ज़िंदगी से यही जाना कि मैंने किसी का पेट मारा तो मेरा भी सारा धन चला जाएगा. बुरे काम का कोई भविष्य नहीं है. बुरा काम कर के आप एक लाख कमाएंगे, एक करोड़ कमाएंगे लेकिन जिस दिन अंदर जाएंगे उस दिन आपका पूरा परिवार इससे प्रभावित होगा."
वो कहते हैं कि "मेरा काम अब कम है लेकिन काम कभी रुकता नहीं है."
जिन-जिन एथिकल हैकर्स ने मैंने बात की सभी ने मुझसे एक बात कही- "टू बिकम अ गुड एथिकल हैकर यू हैव टू बिकम अनएथिकल फर्स्ट,"
यानी एथिकल हैकर बनने के लिए आपको पहले अन-एथिकल हैकर बनना होगा.
ज़्यादातर हैकर्स कहते हैं, "हैकिंग से आपको केवल सीखना होगा कि हैकर्स अपने काम को अंजाम देने के लिए किस तरह के रास्ते अपना सकते हैं."
"अगर आप इससे सीखें तो आप बेहतर हैकर बनेंगे लेकिन आख़िर में आपकी अपनी समझ ही आपको ग़लत रास्ते पर जाने से रोकेगी."
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